इन्फ्रास्ट्रक्चर
दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ आरआरटीएस गलियारे पर महामारी के बीच भी कार्य गतिशील

2023 तक परियोजना पूरा करने के लक्ष्य के साथ लगभग 85 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांज़िट सिस्टम (आरआरटीएस) के 17 किलोमीटर लंबे प्राथमिकता खंड पर कार्य कोविड-19 वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के बीच भी संपूर्ण गति से चल रहा है।

आरआरटीएस एक रेल आधारित सेमी-हाई स्पीड (180 किलोमीटर प्रति घंटा की डिज़ाइन गति), अधिक आवृत्ति वाली दैनिक परिवहन प्रणाली है। इसका उद्देश्य लोगों को समान, द्रुत, विश्वसनीय, सुरक्षित, सहज, कुशल और टिकाऊ परिवहन समाधान देना है जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके।

यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के आर्थिक विकास और वाहन-प्रदूषण एवं सड़क पर भीड़ जैसी समस्याओं के समाधान के लिए भी सहायक होगा। एनसीआर परिवहन निगम आरआरटीएस का क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी है।

एनसीआरटीसी ने बताया कि कोविड-19 की चुनौतियों के बावजूद 17 किलोमीटर लंबे प्राथमिकता खंड पर पड़ने वाले पाँच स्टेशनों- साहिबाबाद, गाज़ियाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो पर काम पूरी तेज़ी से चल रहा है।

ये पाँचों स्टेशन भूमि से ऊपरी स्तर (एलिवेटेड) हैं और वर्तमान में स्तंभों का निर्माण कार्य चल रहा है। इन स्टेशनों के स्तंभ (पियर) के लिए पाइलिंग का काम पूरा किया जा चुका है। अब पियर और पियर-कैप संरचनाओं के निर्माण के साथ-साथ पाइलिंग-कैप का निर्माण भी तेज़ी से हो रहा है।

इसके बाद स्टेशन का ऊपरी भाग बनाया जाएगा। अपेक्षा है कि 24 स्टेशनों के साथ भारत की पहली आरआरटीएस परियोजना- 82 किलोमीटर लंबा दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ आरआरटीएस गलियारा 2025 तक पूरा हो जाएगा।

आरआरटीएस ट्रेन ऐसी दिखेगी

“इस कठिन समय में भी एनसीआरटीसी का दल कोविड नियमों का पालन करते हुए पूरा काम कर रहा है। हमें विश्वास है कि इस क्षेत्र के नागरिकों को हम यह दैनिक आवाजाही वाली परिवहन प्रणाली तय समय सीमा के अंदर बनाकर दे देंगे।”, विनय कुमार सिंह ने कहा।

एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक सिंह ने आगे बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन का पूरा सहयोग मिल रहा है जिससे वे चुनौतियों का सामना कर पा रहे हैं। आरआरटीएस गलियारे पर गाज़ियाबाद एक बड़ा स्टेशन है जिसपर काम शुरू हो गया है।

दिल्ली के सराय काले खां से गाज़ियाबाद आने वाली मार्ग रेखा स्टेशन से तुरंत पहले दिल्ली मेट्रो (लाल रेखा) वायाडक्ट और एक फ्लाईओवर को पार करती है। स्टेशन का प्लैटफॉर्म स्तर भूमि से 24 मीटर ऊँचा है जो इसे आरआरटीएस नेटवर्क का अब तक का सबसे ऊँचा स्टेशन बनाता है।

यह एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रीय नोड भी है जो आरआरटीएस नेटवर्क के दूसरे चरण में बनने वाले भावी गलियारों को इस स्टेशन पर एकीकृत करेगा। यह स्टेशन गाज़ियाबाद में मेरठ तिराहे पर बन रहा है और यहाँ से सरलता से दिल्ली मेट्रो के (शहीद स्थल न्यू बस अड्डा) स्टेशन और गाज़ियाबाद के बस अड्डे तक पहुँचा जा सकता है।

इसके अलावा तीन अनन्य प्रवेश/निकास मार्ग होंगे जिनमें से दो दिल्ली से मेरठ की ओर जाने वाली सड़क पर होंगे और तीसरा दूसरी तरफ होगा जो यात्रियों की आवाजाही के सहज बनाएँगे। पैदल पुल, एस्केलेटर और लिफ्ट जैसी सुविधाओं से वृद्ध व दिव्यांग यात्रियों की पहुँच सरल की जाएगी।

यात्रियों की सुविधा के लिए गाज़ियाबाद में हर प्लैटफॉर्म पर पहुँचने के लिए दो एस्केलेटर, तीन सीढ़ियाँ और एक लिफ्ट होगी। आरआरटीएस स्टेशनों के सभी प्लैटफॉर्मों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्वचालित प्लैटफॉर्म स्क्रीन द्वार (पीएसडी) होंगे।

साहिबाबाद स्टेशन के निकट निर्माण कार्य

आरआरटीएस स्टेशनों पर जो लिफ्ट होगी, वह इतनी बड़ी होगी कि उसमें स्ट्रेचर भी लाया जा सके जो चिकित्सा आपातकाल स्थितियों के लिए लाभकारी होगी। उत्तम सुरक्षा के लिए सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी रखी जाएगी।

स्टेशनों पर यात्री जानकारी डिस्प्ले बोर्ड, डिजिटल मानचित्र आदि जैसी अत्याधुनिक तकनीक-आधारित सुविधाएँ होंगी। जिस स्तर पर भीड़ अधिक होती है, वहाँ टिकट वेंडिंग मशीनों के अलावा अग्नि-शमन प्रणाली, खुदरा दुकानें, खाद्य सामग्रियों की वेंडिंग मशीन और शौचालयों की सुविधा होगी।

स्टेशन के भीतर और बाहर गाड़ियों का कुशल आवागमन बना रहे, इसके लिए ट्रैफिर एकीकरण को डिज़ाइन किया जा रहा है जो सभी प्रकार के वाहनों को अतिरिक्त ड्राइव-इन स्थान दे। पिक-अप और ड्रॉपडऑफ के लिए विशेष ज़ोन बनें होंगे जिससे गाड़ियों की भीड़ नहीं लगी होगी।

साहिबाबाद, गुलधर और दुहाई आरआरटीएस स्टेशनों पर भी यह सुविधाएँ होंगी। साहिबाबाद को भविष्य के लिए आवश्यक मल्टी-मोडल परिवहन एकीकरण को ध्यान में रखे हुए बनाया जा रहा है क्योंकि मेट्रो को चौथे चरण का एक स्टेशन निकटस्थ होगा।

गुलधर का डिज़ाइन राज नगर एक्सटेन्शन और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया है। दुहाई में कई शैक्षिक संस्थान हैं इसलिए वहाँ पर विद्यार्थियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

स्वच्छ और हरित पर्यावरण हेतु योगदान देने के प्रयास के तहत एनसीआरटीसी आरआरटीएस स्टेशनों को उच्चतम आईजीबीसी रेटिंग दिलवाना चाहता है। इन स्टेशनों की छत पर सौर्य पैनल लगेंगे। महामारी के बावजूद इस परियोजना को समय पर पूरा करने का प्रयास है।

अरुण कुमार दास रेलवे के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनसे akdas2005@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।