इन्फ्रास्ट्रक्चर
समर्पित मालवाहक गलियारे मार्च तक 40 प्रतिशत होंगे पूरे, कुछ खंडों पर दौड़ी मालगाड़ी

मार्च 2021 तक समर्पित मालवाहक गलियारा निगम (डीएफसीसी) 2,000 किलोमीटर लंबी ट्रैक को सभी यंत्रों और सिग्नलिंग तंत्र सहित क्रियान्वित करने की तैयारी में है। साथ ही घोषणा की गई है कि इस प्रकार वित्तीय वर्ष 2020-21 के अंत तक 40 प्रतिशत गलियारे पर मालगाड़ियाँ दौड़ने लगेंगी।

इस परियोजना में भूमि अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती थी लेकिन डीएफसीसी ने 96 प्रतिशत से अधिक भूमि का अधिग्रहण कर इस समस्या को सुलझा लिया है। इसके बाद से ही भारतीय रेलवे की इस वृहत् इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर तीव्र गति से कार्य किया जा रहा है। दैनिक रूप से रेलवे बोर्ड इसके प्रगति कार्य पर लगातार नज़र बनाए हुए है।

81,459 करोड़ रुपये की इस प्रकार की पहली परियोजना रेल नेटवर्क पर से भीड़ को कम करने और मालवहन को बढ़ावा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समर्पित गलियारे के माध्यम से सैनिकों और रक्षा कार्यों के लिए भारी सामानों को भी आपातकालीन परिस्थितियों में तेज़ गति से पहुँचाया जा सकेगा।

अभी तक पूर्वी समर्पित मालवाहक गलियारे (ईडीएफसी) की 351 किलोमीटर लंबी ट्रैक और पश्चिमी समर्पित मालवाहक गलियारे (डब्ल्यूडीएफसी)की 306 किलोमीटर लंबी ट्रैक को मालगाड़ियों के संग सफल ट्रायल के बाद क्रियान्वित कर दिया गया है।

डब्ल्यूडीएफसी महाराष्ट्र के मुंबई स्थि जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से उत्तर प्रदेश के दादरी के बीच 1,504 किलोमीटर लंबा होगा जबकि ईडीएफसी पंजाब से लुधियाना से पश्चिम बंगाल के दानकुनी के बीच 1,856 किलोमीटर की दूरी तय करेगा।

निगम के प्रबंध निदेशक आरएन सिंह ने कार्य प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि 2021 के अंत तक खुर्जा, कानपुर, रेवाड़ी, दादरी, अजमेर और पालनपुर को गलियारे के माध्यम से गुजरात के बंदरगाहों से जोड़ा जा सकेगा।

प्रेस को संबोधित करते हुए आरएन सिंह (बाएँ से दूसरे)

वर्तमान में क्रियान्वित ट्रैक पर 1,500 मालगाड़ियाँ ईडीएफसी और 600 मालगाड़ियाँ डब्ल्यूडीएफसी पर दौड़ चुकी हैं। लॉकडाउन के खुलने के बाद से कार्य स्थलों पर कर्मचारियों और निर्माण सामग्री को गति देकर समय सीमा के भीतर परियोजना पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया।

अभी तक इस परियोजना पर 64,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, परियोजना क्रियान्वयन देखने वाले एक वरिष्ठ डीएफसीसी अधिकारी ने बताया। लक्ष्य है कि भारत की 70 प्रतिशत मालगाड़ियों को इन दो मालवाहक गलियारों पर चलाया जाए।

पईडीएफसी पर 104 रेल पुल, 368 रेल ओवर ब्रिज (आरओबी), 189 रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी), 21 फ्लाईओवर होंगे, साथ ही पहले से निर्मित 9 आरोओबी और 10 आरयूबी की मरम्मत भी की जाएगी। ऐसे ही डब्ल्यूडीएफसी पर 24 आरओबी और 10 आरयूबी का पुनर्निर्माण होगा तथा 262 बड़े पुल, 33 फ्लाईओवर, 505 आरओबी व 200 आरयूबी नए बनाए जाएँगे।

अरावली की पहाड़ियों को काटकर हरियाणा में 857 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई है जो डब्ल्यूडीएफसी के मालवहन में सहायक सिद्ध होगी। रेल की पटरियाँ बिछाने के लिए स्वचालित मशीनों को उपयोग किया जाएगा जिससे इस कार्य को गति दी जा सके। अधिकारी ने बताया कि ऐसी मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और गलियारे पर किसी प्रकार की लेवल क्रॉसिंग नहीं होगी।

 

उपरोक्त सुरंग

निर्माण की गुणवत्ता और गति बढ़ाने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। मार्च 2022 तक अधिकांश खंड क्रियान्वित हो जाएँगे और जून 2022 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

डब्ल्यूडीएफसी को जिका से वित्त मिल रहा है, वहीं ईडीएफसी को वर्ल्ड बैंक की वित्तीय सहायता प्राप्त है। क्रियान्वित होने के बाद मालवाहक गलियारों पर स्वचालित सिग्नल तंत्र की सहायता से मालगाड़ियों 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति पर चलेंगी और दोनों दिशाओं से प्रतिदिन 120 मालगाड़ियाँ चलेंगी जिनकी मालवाहक क्षमता 13,000 टन होगी।

हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल से गुज़रने वाले ईडीएफसी पर मुख्य रूप से बल्क ट्रैफिक होगा, वहीं दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरने वाले डब्ल्यूडीएफसी पर कंटेनर ट्रैफिक की मात्रा अधिक होगी।

डीएफसी के माध्यम से भारत पेरिस पर्यावरण समझौते के अपने वादों को पूरा करने में भी आगे बढ़ सकेगा। डीज़ल से चलने वाली मालगाड़ियों और जीवाश्म ईंधन की सहायता से सड़क पर दौड़ने वाले मालवाहकों के स्थान पर भारत में विद्युत-चालित मालगाड़ियाँ होंगी।

दादरी और रेवाड़ी के बीच बनने वाले खंड के पूरा हो जाने से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के प्रदूषण में भी कमी आएगी, एक अधिकारी ने बताया। वर्तमान में इस क्षेत्र से लगभग 66,000 ट्रक गुज़रते हैं लेकिन मालवाहक गलियारे का विकल्प मिलने से सड़क की भीड़ और प्रदूषण कम होगा।

रेवाड़ी-दादरी पर यमुना पुल का गर्डर

इन गलियारों पर मालगाड़ियों से रेडियो संचार के माध्यम से संपर्क स्थापित कर उन्हें जीएसएम की सहायता से ट्रैक भी किया जाएगा जो कि भारत में पहली बार होगा। डीएफसी की यह एक और विशेषता है।

इन दो गलियारों के अलावा भारतीय रेलवे तीन और गलियारों- पूर्व तट गलियारा, पूर्व-पश्चिम गलियारा और उत्तर-दक्षिण उप-गलियारा- पर भी विचार कर रही है। इनके लिए सर्वेक्षण 2021 के अंत तक पूरा हो जाएगा और अधिकारियों के अनुसार 2030 तक इन्हें पूरा करने का लक्ष्य होगा।

1,115 किलोमीटर लंबा पूर्व तट गलियारा पश्चिम बंगाल के खड़गपुर से आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा तक होगा। 975 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण उप-गलियारा विजयवाड़ा-नागपुर-इटारसी को जोड़ेगा। पूर्व-पश्चिम गलियारे का 1,673 किलोमीटर लंबा मार्ग भुसावल से दानकुनी तक जाएगा।