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चीन के अत्यधिक बांधों से क्या हेनान प्रांत में आई बाढ़?

मध्य चीन के हेनान प्रांत में आई बाढ़ के कारण कम-से-कम 33 लोगों की मृत्यु हो गई है और लगभग 12.4 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा। बाढ़ को सर्वाधिक झेलने वाले शेंगज़ू के राजधानी शहर में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

लगातार हो रही तेज़ वर्षा के कारण शहर की नाली प्रणाली ध्वस्त हो गई और कई रिहायशी क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भर गया। सड़क पर उल्टी पड़ी कारों और पानी में डूबे हुए दुकानों व घरों के निचले स्तरों के दुखदायी चित्र हमें देखने को मिले।

भारी वर्षा ने काफी तबाही मचाई। ध्यान दें कि शेगज़ू शहर में 1.2 करोड़ लोग रहते हैं। शहर की डूब चुकी रेल प्रणाली में फँसे यात्रियों ने सोशल मीडिया पर आपातकालीन सहायता माँगी ताकि देर होने से पहले बचाव दल उनके पास पहुँच जाए।

शेंगज़ू के 80 किलोमीटर (50 मील) पश्चिम में स्थित गोंगई से भूस्खलन और बाढ़ का समाचार आया जिसमें कम-से-कम चार लोगों ने प्राण गवाएँ और कई गाँवों को 24 घंटे से अधिक समय के लिए बिना बिजली के रहना पड़ा।

देश के उद्योग और कृषि क्षेत्र के लिए हेनान प्रांत एक महत्त्वपूर्ण आधार है। इसमें कई जलमार्गों का जाल बिछा है जिनमें से कई येलो नदी से जुड़े हैं। भारी वर्षा के समय अपने तटों पर तबाही मचाने का येलो नदी का इतिहास रहा है।

यह प्रांत मध्य चीन के मैदानी क्षेत्रों में बसा है जिसपर चार बड़ी नदियों- हाइही नगी, येलो नदी, हुआइही नदी और यांग्त्ज़े नदी- का जल-संग्रहण क्षेत्र पड़ता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में कुल 1,030 नदियाँ हैं और प्रत्येक का जल-संग्रहण क्षेत्र कम-से-कम 50 वर्ग किलोमीटर का है।

येलो नदी का मानचित्र

मौसम वैज्ञानिक इस तेज़ वर्षा का कारण दक्षिण चीन के निकट बने इन-फा तूफान और क्षेत्र की स्थलाकृति को बताते हैं। स्थिर वायुमंडलीय परिसंचरण के कारण हेनान के मध्य और पश्चिमी भाग में लगातार वर्ष हुई, चीन के मौसम प्रशासन (सीएमए) ने बयान में कहा।

बचाव अभियान के लिए सहस्रों सैनिकों और सशस्त्र पुलिस बलों को लगाया गया। रिपोर्ट के अनुसार चीन की सेना ने लुओयान शहर में बाढ़ के पानी को निकालने के लिए एक बांध को ब्लास्ट किया जिससे घनी जनसंख्या वाले प्रांतों पर खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय प्राधिकरण का कहना है कि भारी वर्षा के कारण यिहेताम बांध में जल खतरे के निशान से 20 मीटर ऊपर था और उन्हें भय था कि वह कभी भी टूट सकता है। चीनी सेना की एक इकाई को स्थल पर भेजकर आपातकालीन ब्लास्टिंग करवाई गई।

ऐतिहासिक रूप से चीन पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए बांधों व जलाशयों पर आश्रित रहा है। एशिया की सबसे बड़ी नदी यांग्त्सी पर बने बांधों और जलाशयों से पिछले वर्ष लगभग 30 अरब घन मीटर बाढ़ के जल को रोका जा सका था।

इसके कारण शंघाई समेत निचले क्षेत्रों को बाढ़ से बचाया जा सका, चीन के आपातकाल प्रबंधन मंत्रालय ने कहा था। लेकिन देश की जल प्रबंधन योजनाएँ बाढ़ के पानी के प्रबंधन में चुनौतियों का सामना कर रही हैं और दशकों पहले बने इन बांधों की विश्वसनीयता पर भीसंदेह व्यक्त किया जा रहा है।

खेतीहर भूमि पर जल भरने से रोकने के लिए चुहे नदी पर बने बांध को पिछले वर्ष प्राधिकरण ने पूर्वी अनहुई प्रांत में बलपूर्वक उड़ाया था। ऊपरी यांग्त्सी नदी पर बने थ्री गॉर्जेस बांध, विश्व का सबसे बड़ा पनबिजली बांध, की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न किए जाते रहे हैं।

थ्री गॉर्जेस बांध

यह बांध भौगोलिक रूप से कमज़ोर जगह पर बना है औक इसपर 95.5 अरब युआन (10 खरब रुपये) से अधिक खर्च हुआ है। यह विश्व का सबसे बड़ा बांध और सबसे महंगी परियोजनाओं में से एक है। यह जिस नदी पर बना है, उसके आसपास 50 करोड़ लोग रहते हैं जो यूएस की जनसंख्या से अधिक है।

थ्री गॉर्जेस जलाशय 175 मीटर की ऊँचाई तक जल संचय करके रख सकता है। इसके निर्माण के दशक भर बाद 2020 की चीन बाढ़ से अब तक इस बांध की कड़ी परीक्षा हो रही है। बीजिंग मानता नहीं है लेकिन उजागर हुआ था कि बांध में पानी का रिसाव और कुछ विकृति आई है।

जूलाई 2020 में पानी पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 164.18 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया था और खतरे के निशान को पार कर गया था। तह कह गया था कि इससे 61,000 घन प्रति सेकंड की गति से पानी रिस रहा था। उस समय पानी छोड़ने के लिए तीन द्वार खोले गए थे।

चीन इनकार करता है कि इसके अत्यधिक बांधों के कारण बाढ़ आ रही है

चीन के विशेषज्ञों ने इस बात से इनकार कर दिया है कि हेनान प्रांत में आई बाढ़ का कारण अत्यधिक बांधों का निर्माण है। उसका कहना है कि जल आपदजाओं से निपटने में बांध चीन की सहायता करते हैं। ग्लोबल टाइम्स में चीनी विशेषज्ञों ने कहा कि बाढ़ हमें मानव निर्मित सुविधाओं की महत्ता समझाते हैं।

कई देश बांध बनाते हैं जो बाढ़ से निपटने की उनकी क्षमताओं में बढ़ोतरी करता है और इसलिए किसी एक दुर्घटना के आधार पर बांधों के निर्माण को गलत नहीं ठहराना चाहिए, ग्लोबल टाइम्स ने हेहाई विश्वविद्यालय के प्राध्यापक फा ज़ोगफू को उद्धृत किया।