इन्फ्रास्ट्रक्चर / भारती
निर्माण तकनीक की प्रयोगशालाओं के रूप में कैसे काम करेंगी लाइट हाउस परियोजनाएँ

निर्माण तकनीक के नए युग की ओर भारत के बढ़ते कदमों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल हाउसिंग तकनीक चैलेंज इंडिया (जीएचटीसी-इंडिया) प्रयास के अंतर्गत छह लाइट हाउस परियोजनाओं (एलएचपी) का शिलान्यास वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से छह राज्यों में किया था।

जीएचटीसी-इंडिया 2019 में चुनी गईं 54 तकनीकों में से छह विभिन्न तकनीकों को छाँटा गया है जिनके आधार पर इन सभी स्थानों पर एक वर्ष में लगभग 1,000-1,000 घर बनने हैं। इस तकनीकी क्रांति की सहायता से प्रधानमंत्री का विज़न 2022 तक ‘सभी के लिए आवास’ पूरा हो पाएगा।

तेज़ी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहे भारत की निर्माण आवश्यकताओं को आधुनिक और वैकल्पिक वैश्विक तकनीक नवाचारों से पूरा किया जाएगा, आवास और शहरी मामले मंत्रालय ने बताया। यह प्रयास न सिर्फ लोगों को तकनीक से जोड़ेगा बल्कि एलएचपी एक ऐसा नया पारिस्थितिकी तंत्र बनाएगा जहाँ वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त तकनीकों को कम लागत, पर्यावरण अनुकूलता और तेज़ निर्माण के लिए अपनाया जाएगा।

एलएचपी के कई लाभ हैं लेकिन मुख्य रूप से ये घर टिकाऊ, हर मौसम को झेलने वाले, सस्ते, सुरक्षित और तेज़ी से बनने वाले होंगे, मंत्रालय ने एक बयान में कहा। हयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के साथ एलएचपी को इंदौरा (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात), चेन्नई (तमिलनाडु), राँची (झारखंड), अगरतला (त्रिपुरा) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में शुरू किया गया है।

राज्य और उनके स्थानों को राष्ट्रीय स्तर की एक प्रतिस्पर्धा से चुना गया है तथा अब ये परियोजनाएँ निर्माण के लिए तैयार हैं। “प्रधानमंत्री के विज़न 2022 तक ‘सभी के लिए आवास’ को पूरा करने में एलएचपी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। रणनीति यह है कि निर्माण की नई वैश्विक आधुनिक तकनीकों को स्वीकार करके सरकार के आत्मनिर्भऱ भारत प्रयास के अनुकूल लागू किया जाए।”, आवास और शहरी मामले मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा।

प्रीफैब्रिकेटेड सैंडविच पैनल तकनीक

इंदौर के एलएचपी में ‘प्रीफैब्रिकेटेड (पूर्व निर्मित) सैंडविच पैनल प्रणाली’ होगी जिसका उद्गम चीन में हुआ है। राजकोट में फ्रांस से आने वाली तकनीक ‘टनल फॉर्मवर्क के उपयोग से मोनोलिथिक कॉन्क्रीट निर्माण’ होगा। चेन्नई में यूएसए और फिनलैंड की तकनीक ‘प्रीकास्ट कॉन्क्रीट निर्माण प्रणाली’ का उपयोग होगा।

राँची में एलएचपी को ‘3डी वॉल्यूमेट्रिक प्रीकास्ट कॉन्क्रीट निर्माण प्रणाली’ से बनाया जाएगा जो कि जर्मनी की तकनीक है। न्यूज़ीलैंड से आने वाली ‘लाइट गेज स्टील इनफिल पैनल के साथ स्ट्रक्चरल स्टील फ्रेम’ प्रणाली का उपयोग अगरतला में होगा। लखनऊ के एलएचपी में कनाडा की तकनीक ‘पीवीसी स्टे इन प्लेस फॉर्मवर्क प्रणाली’ का उपयोग होगा।

तकनीक को ज़मीन पर उतारने और उसे आगे बढ़ाने के लिए एलएचपी जीवंत प्रयोगशालाओं की भूमिका निभाएँगे। इसके अंतर्गत नियोजन, डिज़ाइन, पुर्जों का उत्पादन, निर्माण प्रक्रिया और परीक्षण आएगा जिसे आईआईटी, एनआईटी, अभियांत्रिकी, नियोजन एवं वास्तुशास्त्र महाविद्यालयों के छात्र व प्राध्यापक, बिल्डर, निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के व्यवसायी तथा अन्य हितधारक करेंगे।

विश्व भर से आई इन तकनीकों का सामूहिक उपयोग इन संरचनाओं की निर्माण गति, स्थिरता, संसाधन उपयोग कुशलता, पर्यावरण अनुकूलता, आपदा झेलने की क्षमता, गुणवत्ता और सहनशीलता बढ़ाएगा। मार्च 2019 में जीएचटीसी-इंडिया के शुभारंभ में बड़े स्तर पर नई और वैकल्पिक तकनीकों के प्रोत्साहन के लिए प्रधानमंत्री ने 2019-20 को ‘निर्माण तकनीक वर्ष’ घोषित किया था।

प्रधानमंत्री आवास योजना का निरीक्षण करते मोदी

‘निर्माण तकनीक वर्ष’ के अंतर्गत एलएचपी के अलावा नवाचारपूर्ण निर्माण तकनीकों, जिसका नाम नवारीतिह (भारतीय आवास के लिए नई, सस्ती, मान्य शोध नवाचार तकनीक) रखा गया, पर सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया और जीएचटीसी-इंडिया में पहचानी गईं 54 नवाचारपूर्ण आवास निर्माण तकनीकों का सारांश एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा जारी किया गया।

भारत के भेद्यता मानचित्रों (वलनरेबिलिटी एटलास) पर एक ई-पाठ्यक्रम भी शुरू किया गया। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के अंतर्गत अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सीलरेटर्स – इंडिया (आशा-इंडिया) के तहत पाँच इनक्युबेशन केंद्र स्थापित किए गए जो संसाधन उपयोग कुशलता, आपदा झेलने की क्षमता और टिकाऊ निर्माण के लिए नवाचारपूर्ण सामग्री, प्रक्रिया और तकनीक विकसित कर सकें।

इसके अलावा कार्यक्रम में एक्सीलरेंशन सहयोग के लिए पोस्ट-प्रोटोटाइप तकनीक के लिए पाँच विजेता भी घोषित किए गए। इससे स्वदेशी स्टार्ट-अप, इनोवेटर और संबंधित हितधारकों को बल मिलेगा। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के अंतर्गत 1.12 करोड़ आवास आवश्यकता का आकलन किया था जिनमें से 1.09 करोड़ आवासों को स्वीकृति मिल चुकी है।

70 लाख घरों में निर्माण कार्य विभिन्न चरणों में हैं, वहीं लगभग 40 लाख घरों को निर्माण पूरा होने के बाद लाभार्थियों को भी दिया जा चुका है। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना लाभार्थियों के जीवन में बड़ा परिवर्तन करके उनका सम्मान, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण सुनिश्चित करेगी।

राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और शहरी स्थानीय निकायों के योगदान और प्रदर्शन को सम्मानित करने के लिए भी प्रधानमंत्री ने छह श्रेणियों में उन्हें पुरस्कृत किया। इस अवसर पर देश भर से 88 लाभार्थियों का भी सम्मान हुआ।

कार्यक्रम में आवास और शहरी मामलों के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और जिन छह राज्यों में एलएचपी का शुभारंभ हुआ, वहाँ के मुख्यमंत्री भी उपस्थित थे। उनके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।