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भारतीय वायुसेना को झांसी में 19 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी सौंपेंगे स्वदेशी एलसीएच

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 नवंबर को उत्तर प्रदेश के झांसी में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) को आधिकारिक तौर पर स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) सौंपेंगे।

भारत का पहला स्वदेशी निर्मित हेलीकॉप्टर एलसीएच हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है।

लाइवफिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हेलो गत वर्ष से लद्दाख में आईएएफ के साथ काम कर रहा है। इनमें से दो हेलीकॉप्टर अगस्त 2020 में बेंगलुरु से लद्दाख पहुँचे थे। मई में एलएसी पर कब्जे वाले क्षेत्रों से अपनी सेना को वापस लेने में चीन की अनिच्छा की खबरों के मध्य हेलोस इस क्षेत्र में सशस्त्र गश्ती उड़ानें भर रहा है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब एयर मार्शल के तत्कालीन वाइस चीफ एयर मार्शल हरजीत सिंह अरोड़ा ने लद्दाख में तैनात दो एलसीएच हेलो में से एक में उड़ान भरी थी।

एयर मार्शल अरोड़ा ने एचएएल परीक्षण पायलट के साथ एलसीएच से थोइस से लेह के लिए उड़ान भरी थी। एलसीएच को ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भारतीय सेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है। इसने न केवल लद्दाख में बल्कि सियाचिन ग्लेशियर पर भी परीक्षण के दौरान ऊँचाई की स्थितियों में संचालन की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख फाली होमी मेजर वायु सेना प्रमुख बनने वाले एकमात्र हेलीकॉप्टर पायलट ने हाल ही में लिखा था, “1999 के करगिल युद्ध के दौरान ऊँचाई पर संचालन में सक्षम सशस्त्र हमले वाले हेलीकाप्टरों की आवश्यकता महसूस की गई थी। यहीं एलसीएच फिट बैठता है।”

लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपनी नाक के नीचे एक तोप से लैस होता है। यह दोनों तरफ पॉड्स पर 70 मिलीमीटर के रॉकेट ले जाता है। यह हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल और कवच रोधी मिसाइल से भी लैस हो सकता है।