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भारत के स्वदेशी 5जीआई के 5जी मानक के साथ विलय होने की संभावना- रिपोर्ट

भारत के स्वदेशी 5जी मानक 5जीआई को उद्योग और स्थानीय मानक के समर्थकों के मध्य समझौता व्यवस्था के तहत पाँचवीं पीढ़ी की मोबाइल नेटवर्क प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक मानक के साथ मिलाए जाने की संभावना है।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 5जी रेडियो इंटरफेस टेक्नोलॉजी है, जिसे 5जीआई कहा जाता है। यह शिक्षा जगत के साथ मिलकर दूरसंचार मानक विकास सोसायटी भारत (टीएसडीएसआई) की एक पहल है।

स्थानीय 5जी मानक की शुरुआत को न केवल उद्योग से बल्कि दूरसंचार विभाग की तकनीकी शाखा दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टेक) से भी कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

ईटी ने इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के हवाले से कहा, “गत सप्ताह एक बैठक में टीईसी ने प्रौद्योगिकी विखंडन और इंटरऑपरेबिलिटी चुनौतियों के कारण एक नए (स्थानीय) मानक के विचार का विरोध किया था। अब 5जीआई और 3जीपीपी 5जी विलय एक समझौता व्यवस्था के हिस्से के रूप में काम करता है, जिसे अंतर-राष्ट्रीय मानक निकाय से आगे बढ़ने की संभावना है।”

रिपोर्ट में एक उद्योग कार्यकारी के अनुसार, बैठक में भाग लेने वाले संगठनों ने एक व्यवस्था पर सहमति व्यक्त की, जो 5जीआई और 3जीपीपी के मध्य विलय की सुविधा प्रदान करेगी।

नए विलय किए गए मानकों को इस सप्ताह की शुरुआत में 3जीपीपी द्वारा स्वीकार किए जाने की संभावना है।

3जीपीपी या तीसरी पीढ़ी की साझेदारी परियोजना एक वैश्विक पहल है, जो दूरसंचार प्रौद्योगिकियों पर मानक और विनिर्देश प्रदान करती है।

भारत के मानक निकाय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 5जीआई और 3जीपीपी-5जी का विलय सभी के लिए उच्च गति, उच्च गुणवत्ता संयोजकता प्राप्त करने हेतु एक महत्वपूर्ण प्रवर्तक होगा क्योंकि 5जी भारत और बाकी दुनिया में शुरू हो चुका है।