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भारत का पहला स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत मई में नौसेना को सौंपा जाएगा

भारतीय नौसेना को देश का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत मई में सौंपा जाएगा।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा निर्मित विमानवाहक पोत को भारतीय नौसेना को सौंपे जाने के बाद इसका नाम आईएनएस विक्रांत रखा जाएगा।

केरल के कोच्चि में गुरुवार (28 अप्रैल) को आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान सीएसएल के निदेशक (तकनीकी) बिजॉय भास्कर ने घोषणा की कि आगामी कुछ सप्ताह में विमानवाहक पोत का अंतिम समुद्री परीक्षण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि स्वदेशी विमान वाहक (आईएसी) इस वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर चलेगा।

टीएनआईई की रिपोर्ट में भास्कर के हवाले से कहा गया, “इस माह अंतिम समुद्री परीक्षण निर्धारित किया गया था लेकिन इसमें थोड़ी देर हो गई। हम अगले माह आईएसी को भारतीय नौसेना को सौंप देंगे, जिसके बाद जहाज का नाम आईएनएस विक्रांत हो जाएगा। भारत का पहला विमानवाहक पोत इस वर्ष अगस्त में स्वतंत्रता दिवस पर पानी में उतरेगा।”

विमानवाहक पोत के लगभग 60 प्रतिशत घटक स्वदेशी हैं, जबकि शेष 40 प्रतिशत आयात किए गए। अधिकारी ने आगे कहा कि आईएसी विनिर्देशों का एक नया विमानवाहक पोत शिपयार्ड द्वारा केवल 5 वर्षों में बनाया जा सकता है।

रिपोर्ट में बिजॉय के हवाले से कहा गया, “हमें आईएसी परियोजना में अनुभव प्राप्त हुआ है। यदि भारतीय नौसेना हमें आईएनएस विक्रांत की तरह 45,000 टन श्रेणी का एक और विमानवाहक पोत बनाने को कहती है तो हम इसे 5 वर्ष में तैयार कर सकते हैं।”

आईएसी वाहक से विमान को लॉन्च करने के लिए स्की-जंप तकनीक का उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि शिपयार्ड अमेरिकी नौसेना के विमान वाहक में तैनात इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (ईएमएएलएस) का उपयोग करने वाले विमान वाहक भी बना सकता है।