रक्षा
पी-8आई विमान क्यों दिखा था दक्षिण चीन सागर के निकट, जानें इसकी विशेषताएँ

भारतीय नौसेना के एक समुद्री गश्त विमान पी-8आई को फिलिपीन्स के ऊपर उड़ते देखा गया था जो दक्षिण चीन सागर के निकट है और इस सागर के लगभग पूरे भाग पर चीन अपना अधिकार जमाता है।

इस क्षेत्र में यह पनडुब्बी-शिकारी विमान इसलिए था क्योंकि वह मालाबार अभ्यास में भाग लेने गया था। पिछले वर्ष की तरह ही इस वर्ष भी मालाबार अभ्यास में चारों क्वाड सदस्य देशों ने प्रतिभाग किया था।

26 से 29 अगस्त के बीच हुए इस अभ्यास का आतिथ्य यूनाइटेड स्टेट्स नौसेना ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में किया था जो ग्वाम के तट के निकट है। यह क्षेत्र दक्षिण चीन सागर से अधिक दूर नहीं है।

इस सागर में चीन ने भारी संख्या में कृत्रिम द्वीप बनाकर उनका सैन्यकरण भी किया है ताकि वह इस जलक्षेत्र पर अपने दावे को मज़बूत कर सके। इस जलक्षेत्र से विश्व की सबसे व्यस्त शिपिंग रेखाएँ भी गुज़रती हैं।

दक्षिण चीन सागर के जलमार्गों के उपयोग पर अधिकार जामाने के लिए यूएस द्वारा की जाने वाली फ्रीडम ऑफ नेविगेशन गश्तियों समेत चीन इस क्षेत्र में विदेशी सैन्य वाहनों की तैनाती का विरोध करता है।

मालाबार अभ्यास के लिए पश्चिम प्रशांत में ग्वाम तक पहुँचने से पहले दिशानिर्देशित मिसाइल विध्वंसक रणविजय, दिशानिर्देशित मिसाइल युद्धपोत शिवालिक, पनडुब्बी-रोधी रणपोत कदमत और दिशानिर्देशित मिसाइल रणपोत कोरा से लैस भारतीय नौसैन्य कार्यबल को दक्षिण चीन सागर में भी तैनात किया गया था।

दक्षिण चीन सागर में चीन के कुछ दावों का विरोध करने वाले उसके दो पड़ोसियों- फिलिपीन्स और वियतनाम की नौसेनाओं के साथ भारतीय नौसेना ने अभ्यास किया। 2 अगस्त को भारतीय नौसेना ने कहा था, “इन समुद्री प्रयासों से भारतीय नौसेना और मित्रवत देशों के बीच समन्वय बढ़ता है।”

आईएनएस सह्याद्री फिलिपीन्स में

मालाबार अभ्यास के लिए नौसैन्य कार्यबल में भारतीय नौसेना के पी-8आई पनडुब्बी-शिकारी विमानों का बेड़ा भी जुड़ गया। कई प्रकार के अभ्यासों के बीच पनडुब्बी-रोधी युद्ध का भी अभ्यास किया गया था जिसमें इन विमानों ने भूमिका निभाई।

पी-8आई विमान

इस वर्ष की जुलाई में नौसेना को बोइंग से 10वाँ पी-8आई विमान मिला था। भारत द्वारा खरीदे गए चार पी-8आई विमानों के दूसरे बेड़े का भाग है यह विमान जो यूएस के सिएटल से उड़ान भरकर हवाई, ग्वाम और ब्रुनेई रुकता हुआ गोवा पहुँचा।

ऐसे नौ विमान पहले से ही भारतीय नौसेना को अपनी सेवाएँ दे रहे हैं जो कि पी8 मंच का सबसे बड़ा विदेशी ग्राहक है। सेवारत नौ विमानों के अलावा अपेक्षा है कि दो और इस वर्ष मिलेंगे व छह और खरीदे जाएँगे।

रिपोर्टों में बताया गया कि नौसेना की योजना है कि अगले कुछ वर्षों में ऐसे 22 विमान हों जिससे भारतीय महासागर क्षेत्र में चीनी गतिविधियों पर दृष्टि रखी जा सके, विशेषकर चीनी पनडुब्बियों पर।

इन विमानों का उपयोग भारत ने वर्तमान में पूर्वी लद्दाख में चल रहे गतिरोध के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट चीनी तैनातियों पर दृष्टि रखने के लिए भी किया था। कम-से-कम दो बार भारतीय नौसेना के पी8 को लद्दाख की ओर उड़ते हुए देखा गया है।

2017 में 73 दिन लंबे चले डोकलाम गतिरोध के समय भी सीमा पर चीनी गतिविधियों पर दृष्टि रखने के लिए इन विमानों का उपयोग हुआ था। भारतीय के तत्कालीन प्रवक्ता व जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन डीके शर्मा (सेवानिवृत्त) ने बताया था-

“डोकलाम गतिरोध के समय निर्णय लेने में सहायता करने के लिए यह विमान डाटा का सीधा प्रसारण कर रहा था।” एक रिपोर्ट का कहना है कि इस विमान का उपयोग पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी सैनिकों की गतिविधियों पर दृष्टि रखने के लिए भी हुआ था।

भारतीय नौसेना का पी-8आई

पी-8आई में एन/एपीवाइ-10 रडार होते हैं जिसे रेथियॉन “समुद्री, तटीय और भूमि पर सर्वेक्षण करने वाला रडार” कहते हैं। जैसा कि विविरण से स्पष्ट है कि इस रडार का उपयोग भूमि गतिविधियों पर दृष्टि रखने और किसी भी मौसम में दिन व रात का डाटा प्राप्त करने के लिए होता है।

सिन्थेटिक अपर्चर और इन्वर्स सिन्थेटिक अपर्चर मोड में एन/एपीवाइ-10 रडार बादलों और पेड़-पत्तियों के बीच से भी देखकर उसके नीचे की भूमि का विस्तृत चित्र दे सकता है। ये चित्र भूमि पर स्थित वस्तुओं एवं संरचनाओं का आकार बताने के साथ-साथ गतिविधि और परिवर्तन की भी जानकारी देते हैं।

यूनाइटेड स्टेट्स के समुद्री गश्त दल- पैट्रोल स्क्वाड्रन फाइव के पायलट, जिन्हें मैड फॉक्स के नाम से भी जाना जाता है, ने दवॉरज़ोन के टाइलर रोगोवे को बताया था, “ईएसएम (इलेक्ट्रॉनिक्स निगरानी उपकरण) का उपयोग भूमि आधारित सुविधाओं के एमिटर को पकड़ने के लिए होता है।”

वे आगे कहते हैं कि इसकी सहायता से वे विदेशी पनडुब्बी, सतही लड़ाकू पोत या भूमि आधारित सतह से हवा में मारक स्थल के एमिटर से उन्हें भौगोलिक रूप से चिह्नित कर सकते हैं। यह एक प्रतिरोधी प्रणाली है जो बड़े क्षेत्र पर छुपकर नज़र रखने में सहायता करती है।

“इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (आईआर) कैमरे से भूमि और समुद्र आधारित लक्ष्यों को पहचाना जा सकता है। इसके आईआर कैमरे में वाइट हॉट व ब्लैक हॉट, दोनों प्रकार के चित्र कैद होते हैं।”, पायलट ने आगे कहा था।