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भारतीय ब्रांड कैसे बना रहे हैं स्मार्ट वियरेबल्स में दबदबा

विदेशी वस्तुओं के प्रति आकर्षण से अधिक प्रभाव रखने लगी है भारत की “पैसा वसूल” मानसिकता। स्मार्ट वियरेबल्स (शरीर पर धारण करने वाले गैजेट)- स्वास्थ्य ट्रैकर और बैंड, स्मार्टवॉच व ईयरवियर यानी कान में आवाज़ सुनने वाले उपकरण- के तेज़ी से बढ़ते बाज़ार में यह बात प्रत्यक्ष है।

अधिकतम उत्पाद श्रेणियों में भारतीय उपभोक्ता देसी ब्रांडों को चुन रहे हैं। मार्केट इंटेलीजेंस विशेषज्ञों द्वारा किए गए आईडीसी अध्ययन को इस सप्ताह में जारी किया गया था जो बताता है कि हाल के महीनों में वियरेबल्स की खरीद दोगुनी हो गई है।

इसका सर्वाधिक लाभ बोट, नॉइज़, फायर-बोल्ट और पीट्रॉन जैसे भारतीय ब्रांडों को मिला है जिन्होंने कई मामलों में अमेज़फिट, शाओमी, वनप्लस और सैमसंग को सर्वाधिक बिकने वाले नामों में से हटाकर अपनी जगह बनाई है।

यह सबकुछ आक्रामक मूल्य व आधुनिकतम तकनीक लाने में जो फूर्ति दिखाई है, उसके कारण संभव हो पाया है। आईडीसी की बाज़ार विश्लेषक अनिशा दुंबरे कहती हैं, “सस्ता होने के कारण भारतीय ब्रांड लोकप्रिय हुए हैं। प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य, आक्रामक मार्केटिंग व नई विशेषताओं को शीघ्र जोड़ने से घड़ी बाज़ार में इन कंपनियों ने पर्याप्त भागीदारी बना ली है।”

सीईएस में ऊँची लहरें

यह एक रात में नहीं हुआ है। वैश्विक महामारी कोविड के आगमन से पूर्व अपने पूर्ण स्वरूप में हुए पिछले उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स प्रदर्शन- सीईएस 2020 में गूगल और अमेज़ॉन, दोनों के बूथ पर प्रदर्शित होने वाले ऑडियो उपकरण निर्माता- बोट और लाइफस्टाइल पहले भारतीय ब्रांड बने थे।

स्वदेशी बोट ने एक इनबिल्ट गूगल असिस्टेन्ट के साथ अपने रॉकर्ज़ 315 एसीवीए स्मार्ट वायरलेस ईयरफोन का अनवारण किया था। साथ ही स्मार्ट स्पीकर स्टोन 200ए, जो कि इनबिल्ट एलेक्सा आवाज़ क्षमताओं से लैस है, का प्रदर्शन भी किया गया था।

यह स्पीकर गाना बजाने, समाचार सुनाने, मौसम भविष्यवाणी, स्मार्ट घरेलू उपकरणों को नियंत्रित करने और 30,000 एलेक्सा कार्य-कुशलताओं तक पहुँच में सक्षम है। बोट पाँच वर्ष पुरानी कंपनी है जिसकी स्थापना अमन गुप्ता और समीर मेहता ने की थी।

यदि हम आईडीसी द्वारा जारी अप्रैल-जून 2021 अवधि के आँकड़े देखेंगे तो पाएँगे कि ईयरवियर श्रेणी में 45.5 प्रतिशत की भागीदारी के साथ बोट सर्वश्रेष्ठ बिकने वाला उत्पाद है। वहीं, दूसरे और तीसरे नंबर पर वनप्लस और सैमसंग हैं जिनकी क्रमशः 8.5 प्रतिशत और 7.9 प्रतिशत की भागीदारी है।

ट्रू वायरलेस स्टीरियो (टीडब्ल्यूएस) ईयरबड्स की प्रतिस्पर्धी श्रेणी में भी बोट 39.6 प्रतिशत की भागीदारी के साथ सबसे अग्रणी ब्रांड है। इसी अवधि में स्मार्टवॉच श्रेणी को देखें तो पाएँगे कि 26.9 प्रतिशत भागीदारी के साथ बोट दूसरे नंबर पर है।

वहीं, पहले नंबर पर 2014 में अमित और गौरव खत्री द्वारा स्थापित गुरुग्राम आधारित नॉइज़ रही, 28.6 प्रतिशत भागीदारी के साथ। आईडीसी कहता है, “शीर्ष पाँच ब्रांडों में से तीन भारतीय ब्रांड हैं, वहीं तीसरे और पाँचवें नंबर पर क्रमशः हुआमी और रियलमी हैं।” घड़ी श्रेणी में शीर्ष पाँच में तीसरा भारतीय ब्रांड फायर-बोल्ट है।

हेल्थ या रिस्टबैंड श्रेणी एकमात्र वियरेबल्स की श्रेणी है जिसमें शाओमी और वनप्लस जैसे अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों का दबदबा है लेकिन यहाँ भी टाटा के टाइटन की वर्ष की दूसरी तिमाही में 21.3 प्रतिशत भागीदारी रही थी। नॉइज़ और बोट जैसे भारतीय ब्रांड संख्या में भारी मात्रा बेच रहे हैं।

परंतु जब मूल्य में देखा जाए तो वे वैश्विक बड़ी कंपनियों से पीछे हैं। भारत में मूल्य के अनुसार ऐप्पल की 37 प्रतिशत भागीदारी है, दूसरे नंबर पर 18 प्रतिशत के साथ सैमसंग और तीसरे नंबर पर 10 प्रतिशत के साथ फॉसिल है।

वियरेबल्स में कई भारतीय खिलाड़ियों की देश में ही विनिर्माण सुविधाएँ हैं लेकिन यह कहना होगा कि मात्रा की अर्थव्यवस्था को देखते हुए कोई भी कंपनी पूरे उत्पाद को स्वदेशी रूप से नहीं बना सकती है। कुछ भारतीय वियरेबल ब्रांड अपने उपकरणों के कुछ भाग या पूरे उपकरण को विदेश में बनवाते हैं लेकिन स्वदेशीकरण पर ज़ोर भी बढ़ता जा रहा है।

इंडोनेशिया में एक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण संयंत्र

रिस्टेबल- एक प्रमुख स्मार्ट वियरेबल

टेकआर्क के हालिया अध्ययन से पता चलता है कि 2020 में भारतीयों ने 54 लाख रिस्टेबल्स खरीदे जो कि फिटनेस बैंड और स्मार्ट कलाई घड़ी को एकीकृत करके बने उपकरण को दिया गया नाम है। इनका कुल मूल्य 54 करोड़ डॉलर यानी 3,800 करोड़ रुपये था।

टेकआर्क के संस्थापक और मुख्य विश्लेषक फैसल कवूसा कहते हैं, “स्वास्थ्य और फिटनेस ट्रैकिंग से आगे बढ़कर रिस्टेबल एक प्रमुख स्मार्ट वियरेबल श्रेणी बन गए हैं। नोटिफिकेशन और संदेश देखने के लिए बार-बार स्मार्टफोन खोलने की बजाय लोग रिस्टेबल में उसे देखना पसंद करते हैं क्योंकि अधिकतम बार कोई प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं होती है।”

टेकआर्क यह भी बताता है कि कोविड-19 के शुरू होने से स्वास्थ्य व ट्रैकिंग श्रेणी महत्त्वपूर्ण बन गई है। इसके कारण रिस्टेबल में एसपीओ2 मापने की विशेषता तेज़ी से जुड़ती जा रही है और आगे के समय में यह रिस्टेबल में एक प्रमुख विशेषता बन जाएगी।

भारत में मिलने वाले अधिकांश स्वास्थ्य बैंड, आधारभूत मॉडल को छोड़कर, हृदय गति और रक्तचाप नापते हैं। कुछ में ईसीजी विशेषता भी रहती है। विशेषकर वृद्धों में यह बहुत महत्त्वपूर्ण विशेषता बन गई है क्योंकि इससे उन्हें स्वास्थ्य जाँच के लिए बार-बार क्लिनिक नहीं जाना पड़ता है।

लॉकडाउन के समय में आधुनिक स्वास्थ्य बैंडों से स्व-परीक्षण करके टेलीमेडिसिन मंचों से परामर्श प्राप्त करके दवाई प्राप्त करने की प्रणालियों ने एक क्रांति शुरू की है। अब वियरेबल्स श्रेणी में अगली लहर किसकी होगी?

तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि अगली पीढ़ी की स्मार्ट घड़ियों में ई-सिम जैसी कोई विशेषता होगी, जिसे सैमसंग और ऐप्पल ने तो प्रोत्साहित करना भी शुरू कर दिया है। इससे सिम बदले बिना ही उपभोक्ता मोबाइल सेवा बदल पाएँगे। अपेक्षा है कि इस नई विशेषता के साथ रिस्टेबल व्यापार की भारतीय कंपनियाँ भी शीघ्र ही तैयार होंगी।

आनंद ऑनलाइन इंडिया टेक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन निदेशक व वरिष्ठ आईटी पत्रकार हैं।