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विक्रांत हेतु सरकार से सरकार सौदे के माध्यम से 26 लड़ाकू विमान खरीदे जाएँगे- रिपोर्ट

15 अगस्त को पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत विक्रांत के सम्मिलित होने के साथ भारतीय नौसेना के पास दो विमान वाहक होंगे लेकिन दोनों को चालू रखने के लिए पर्याप्त लड़ाकू विमान नहीं होंगे।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार से सरकार सौदे के माध्यम से आईएनएस विक्रांत के लिए 26 लड़ाकू विमान खरीदेगा।

भारतीय नौसेना आईएनएस विक्रमादित्य से संचालित करने के लिए रूस से खरीदे गए 45 मिग-29के लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है। हालाँकि, वर्तमान में सेवा में यही एकमात्र विमानवाहक पोत है।

डसॉल्ट एविएशन के राफेल-एम और बोइंग के एफ/ए-18 ब्लॉक-3 सौदे की दौड़ में हैं। हालाँकि, इन दोनों लड़ाकू विमानों को उनके उपयोगकर्ताओं फ्रांस और अमेरिका ने केवल परमाणु-संचालित विमान वाहक से संचालित किया है।

भारत के दो वाहकों के विपरीत, जो पारंपरिक रूप से संचालित होते हैं और विमान को अपने डेक से उड़ान भरने में सहायता करने के लिए स्की-जंप प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। वहीं, यूएस और फ्रांसीसी वाहक लड़ाकू जेट संचालित करने के लिए कैटापल्ट-असिस्टेड टेक-ऑफ का उपयोग करते हैं।

सौदे की अर्हता प्राप्त करने के लिए दो लड़ाकू विमानों को स्की-जंप मंच से उड़ान भरने की क्षमता का प्रदर्शन करना होगा।

डसॉल्ट के राफेल-एम की बोइंग के एफ/ए-18 पर बढ़त है क्योंकि भारतीय वायुसेना ने पहले ही लड़ाकू विमानों के दो स्क्वाड्रन सम्मिलित कर लिए हैं। साथ ही देश में रखरखाव की सुविधा स्थापित की है, जिसे देखते हुए अधिक राफेल के लिए अनुबंध कर सकते हैं।

नौसेना ने अपनी आवश्यकताओं को वायुसेना के साथ जोड़ दिया है, जो अर्थव्यवस्थाओं और अन्य बातों को सुनिश्चित करने हेतु दोनों को एक ही निर्माता से लड़ाकू विमानों को खरीदने के लिए देख सकता है।

नई दिल्ली जब विमानों की खरीद पर निर्णय पर करेगी तो फ्रांस के साथ भारत की तेज़ी से बढ़ती रक्षा साझेदारी, जिसकी पश्चिमी हिंद महासागर में भी महत्वपूर्ण उपस्थिति है, पर भी विचार होगा।