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भारत ने वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन घरेलू कोयला गैसीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया

भारत में कोयला गैसीकरण को बढ़ाने हेतु कोयला मंत्रालय ने शुक्रवार (4 मार्च) को नौकरशाहों, नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और क्षेत्र के 100 से अधिक विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ एक सत्र का आयोजन किया।

यह सत्र सतत विकास के लिए ऊर्जा पर एक वेबिनार का भाग है। यह बजट के बाद वेबिनार की शृंखला में नौवाँ वेबिनार है।

सत्र में वर्ष 2030 तक 10 करोड़ टन घरेलू कोयले के कोयला गैसीकरण लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु आवश्यक बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया, जो स्थायी कोयले के उपयोग का एक नया मार्ग तैयार करेगा।

कोयला गैसीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जो कोयला या बायोमास जैसे कार्बनयुक्त पदार्थों को कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन में परिवर्तित करती है। विद्युत उत्पादन तकनीक के रूप में कोयला गैसीकरण लोकप्रियता प्राप्त कर रहा क्योंकि इसे अपेक्षाकृत टिकाऊ प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है।

कोयला सचिव डॉ अनिल कुमार जैन ने वेबिनार को संबोधित किया और एक उपयुक्त व्यवसाय मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि ना केवल सार्वजनिक क्षेत्र बल्कि निजी क्षेत्र भी कोयला गैसीकरण संयंत्र स्थापित करने में भूमिका निभाए।

नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके सारस्वत ने स्वदेशी प्रौद्योगिकी को बढ़ाने के लिए प्रदर्शन संयंत्र स्थापित करने और कोयला गैसीकरण संयंत्र स्थापित करने के लिए पीएलआई योजना शुरू करने पर बल दिया।

कोयला के अतिरिक्त सचिव वीके तिवारी ने सत्र से छह प्रमुख बातों पर प्रकाश डाला। इनमें गैसीकरण परियोजनाओं के लिए कोयले की उपलब्धता, वाणिज्यिक पैमाने पर स्वदेशी गैसीकरण प्रौद्योगिकी का विकास, सिनगैस से मेथेनॉल के उत्पादन के लिए स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास, कोयला गैसीकरण से प्राप्त स्वदेशी उत्पाद के विपणन के लिए उपयुक्त नीति प्रावधान, प्रारंभिक स्तर पर गैसीकरण परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता मंच और परियोजनाओं की स्थापना के लिए सभी व्यावसायिक मॉडलों को हाथ में लेना है।