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भारत पाँचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमानों का निर्माण 2022 में शुरू करने की तैयार में

भारत अब पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू या उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए) के निर्माण हेतु अपनी सबसे महत्वाकांक्षी स्वदेशी सैन्य विमानन परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसमें राडार से बच निकलने वाली उन्नत सुविधाओं के साथ सुपरक्रूज़ क्षमताएँ भी होंगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शीर्ष सूत्रों ने रविवार कहा कि दोहरे इंजन वाले एएमसीए प्रतिकृति के पूर्ण पैमाने पर इंजीनियरिंग विकास के मामले को अंतिम रूप दे दिया गया है और रक्षा एवं वित्त मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श के बाद आगामी वर्ष की शुरुआत तक कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का उत्पादन अत्यंत जटिल और महंगा होता है। हालाँकि, विशेषज्ञों का तर्क है कि जे-20 और सुखोई-57 लड़ाकू विमान अब भी पाँचवीं पीढ़ी के सच्चे-नीले लड़ाकू विमानों से कुछ कम हैं। सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ 59,000 करोड़ रुपये के सौदे के अंतर्गत भारतीय वायुसेना में शामिल किए जा रहे 36 राफेल भी 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं।

अब तक, 25-टन एएमसीए की विकास लागत लगभग 15,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। डीआरडीओ और इसकी वैमानिकी विकास एजेंसी (एडीए) द्वारा निर्धारित समयसीमा के अनुसार, एएमसीए की पहली प्रतिकृति के 2025-26 तक आने और मार्क-1 जेट का उत्पादन 2030-31 में शुरू होने की संभावना है। हालाँकि, एएमसीए को शुरू करने के लिए एक अधिक यथार्थवादी समय सीमा 2035 के आस-पास होगी।

एएमसीए परियोजना आईएएफ के लिए महत्वपूर्ण है, जो सिर्फ 30-32 लड़ाकू स्क्वॉड्रनों के साथ है और आगामी 10 से 15 वर्षों में नियोजित प्रेरण के साथ भी 42 स्क्वॉड्रन की स्वीकृत संख्या तक नहीं पहुँच पाएगी।

विस्तृत एएमसीए डिज़ाइनिंग, जिसे दिसंबर 2018 में स्वीकृत किया गया था, आईएएफ की प्रारंभिक स्टाफ गुणात्मक आवश्यकताओं को पूरा करती है लेकिन अपेक्षित शक्तिशाली इंजन एक बड़ी समस्या बनी हुई है।