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चीन द्वारा 1959 से अधिकृत भारतीय क्षेत्र पर बने गाँव के विरुद्ध भारत की मुद्रा उदासीन

भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान ने मंगलवार को अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में विवादित सीमा पर चीन के एक नए गाँव के निर्माण पर विवाद को कमतर दर्शाना चाहा। दरअसल, इस क्षेत्र पर बलपूर्वक बीजिंग ने 1959 में अपना नियंत्रण स्थापित किया था।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, हालाँकि, तथ्य यह है कि त्सारी चू नदी के तट पर 100 घरों का बना गाँव भारत के दावा किए गए क्षेत्र पर है और गत वर्ष इसका निर्माण दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करता है।

एक अधिकारी ने कहा, “गाँव उस क्षेत्र में है, जिसे भारतीय सेना चीन द्वारा प्रतिकूल नियंत्रण के रूप में वर्णित करती है। हम इसे लेकर अधिक कुछ नहीं कर सकते। इनमें से अधिकांश गाँव एलएसी के चीनी पक्ष में हैं। कुछ विवादित क्षेत्र में हैं जैसे अरुणाचल प्रदेश में।”

पेंटागन अपनी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा में करीब 4.5 किमी अंदर घुसकर एक गाँव बसा लिया। भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के आधिकारिक सूत्रों ने कहा, “चीनियों द्वारा किए गए विभिन्न निर्माण थोड़े समय में नहीं हुए हैं।”

इसे 2005 के द्विपक्षीय समझौते के अनुच्छेद-7 के उल्लंघन के रूप में भी देखा जाता है, जिसमें भारत-चीन सीमा प्रश्न के निपटान के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत निर्धारित किए गए थे।

अधिकारी ने कहा, “चीन इसका उपयोग यह दावा करने के लिए कर सकता कि सीमा को अंतिम रूप दिए जाने पर ऐसे गाँवों में उसकी आबादी को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “भारत और चीन के बीच सीमा समझौता क्षितिज पर कहीं नहीं है। चीन ने वास्तव में अब तक एलएसी पर स्थिति स्पष्ट करने से भी मना कर दिया है, जो आमने-सामने की घटनाओं को रोकने में सहायता करेगा। लद्दाख गतिरोध ने दोनों देशों में केवल कठोर रुख अपनाया है।”