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“भारत लागत प्रभावी तकनीक चाहता, जो परिवहन हेतु बनाई जा सके”- नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर तेज़ी से परिवहन के लिए बिजली आधारित तकनीक ढूँढ रहा, जो लागत प्रभावी हो और जिसे देश में बनाया जा सके। मंत्रालय ने पहाड़ी और भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में वैकल्पिक परिवहन समाधान के रूप में रोपवे के विकास की योजना बनाई है।

उन्होंने ‘रीइमेजिनिंग इंडिया 2.0 सीरीज’ के एक भाग ‘रीबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर इंडिया 2.0’ पर अपने संबोधन में बताया कि कुछ अमेरिकी कंपनियों ने भी प्रौद्योगिकी के साथ उनसे संपर्क किया है।

संवादों की शृंखला- सिलिकॉन वैली मासिक संवाद का एक भाग है। इसे फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज द्वारा आज़ादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आरंभ किया गया।

नितिन गडकरी ने सिलिकॉन वैली से भारतीय-अमेरिकियों को भारत द्वारा भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेष रूप से परिवहन प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में बताया, “हम उस तकनीक को ढूँढ रहे, जो लागत प्रभावी हो और जिसे देश में बिजली पर बड़े पैमाने पर तेज़ी से परिवहन (सिस्टम) के लिए बना सकें।”

उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और सिक्किम में संयोजकता को बढ़ावा देने हेतु 11 रोपवे परियोजनाओं की योजना बना रही है। घरेलू और अंतर-राष्ट्रीय व्यापार मार्गों की दक्षता बढ़ाने हेतु सभी बंदरगाहों और अंतर्देशीय जल अपशिष्ट खनिजों को जोड़ने वाले कार्गो की तेज़ आवाजाही के लिए पोर्ट संयोजकता परियोजनाओं को लागू किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बंदरगाह संपर्क के लिए 2,050 किलोमीटर लंबी 65 परियोजनाओं की योजना है, जो विकास के विभिन्न चरणों में हैं। भारत राष्ट्रीय राजमार्गों पर लड़ाकू विमानों के लिए 29 आपात लैंडिंग सुविधाएँ भी विकसित कर रहा है।”

“सरकार ईवी बैटरी के लिए बैटरी अदला-बदली नीति और मानकों पर काम कर रही। इसे सभी प्रौद्योगिकियों के लिए एक बड़ा अवसर कहेंगे क्योंकि यह बिल्कुल नया क्षेत्र है।”