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विश्व व्यापार संगठन संग भारत को अनाज निर्यात में आ रहीं कठिनाइयाँ- निर्मला सीतारमण

यूक्रेनी युद्ध के बाद खाद्यान्न की वैश्विक कमी के मध्य केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में कहा कि भारत जैसे देश जो कृषि उत्पादों, विशेष रूप से अनाज का निर्यात करने की क्षमता रखते हैं, उसे विश्व व्यापार संगठन से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मंत्री ने भारतीय पत्रकारों के एक समूह को बताया कि भारत की चिंताओं के जवाब में विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक न्गोजी ओकोन्जो-इवेला ने अंतर-राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की हाल ही में संपन्न वार्षिक बैठक के दौरान कहा कि संगठन इसे बहुत सकारात्मक रूप से देख रहा है और अपेक्षा है कि इसे सुलझा लिया जाएगा।

अमेरिका में भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने मंत्री के साथ एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान बताया कि यूएस ने भारत से खाद्यान्न की स्थिति में अभी सहायता करने का अनुरोध किया।

निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘मैं इस तथ्य से सकारात्मक रूप से प्रेरित थी कि पूर्ण सत्र में विश्व व्यापार संगठन की प्रतिक्रिया सकारात्मक थी। मुझे अपेक्षा है कि हम उस दशक के लंबे प्रतिबंध को तोड़ देंगे। यूक्रेन संकट के बाद भारत ने खाद्यान्न के निर्यात और विनिर्माण के अवसरों की पहचान की है। विशेष रूप से गेहूँ हमारा निर्यात है।”

उन्होंने कहा, “युद्ध ने दुनिया के सामने कुछ वास्तविकताओं का खुलासा किया है। मैंने आवाज़ उठाई है कि भारत जैसे देश अपनी कृषि उपज, विशेष रूप से अनाज को आगे बढ़ाने की अपार क्षहमता है, को विश्व संगठन के साथ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। इसकी वजह से सबने यह मान लिया था कि खाद्यान्न की कमी है। भारत जैसे देश तत्काल आपूर्ति कर सकते हैं।”