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भारत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने हेतु यूनेस्को समिति का सदस्य चुना गया

भारत को 2022-2026 चक्र के लिए अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने हेतु यूनेस्को के 2003 सम्मेलन की अंतर सरकारी समिति के सदस्य के रूप में चुना गया है।

इसकी घोषणा केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री जीके रेड्डी ने की।

एशिया-प्रशांत समूह के भीतर खाली होने वाली चार सीटों के लिए छह देशों, भारत, बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया, मलेशिया और थाइलैंड ने अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत की थी। भारत को 155 देशों के दलों से 110 वोट मिले, जो उपस्थित थे और मतदान कर रहे थे।

2003 के सम्मेलन की समिति में 24 सदस्य होते हैं और समान भौगोलिक प्रतिनिधित्व और आवर्तन के सिद्धांतों के अनुसार सम्मेलन की आम सभा में चुने जाते हैं। समिति के सदस्य देश चार वर्ष की अवधि के लिए चुने जाते हैं।

समिति के कुछ मुख्य कार्यों में सम्मेलन के उद्देश्यों को बढ़ावा देना, सर्वोत्तम प्रथाओं पर मार्गदर्शन प्रदान करना और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के उपायों पर सिफारिशें देना सम्मिलित है। समिति की सूची में अमूर्त विरासत के शिलालेख के साथ कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं के प्रस्तावों हेतु देशों के दलों द्वारा प्रस्तुत अनुरोधों की भी जाँच करती है।

इससे पहले भारत ने इस सम्मेलन की समिति के सदस्य के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए हैं। एक एक 2006 से 2010 तक और दूसरा 2014 से 2018 तक है। 2022-2026 कार्यकाल के लिए भारत ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण घोषित किया है।

भारत सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना, अमूर्त विरासत के माध्यम से अंतर-राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत पर अकादमिक शोध को बढ़ावा देना और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के साथ सम्मेलन के काम को संरेखित करने वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा।