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गेहूं की बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने हेतु तत्काल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया

भारत ने बढ़ती घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के उपायों के अंतर्गत गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 13 मई को एक अधिसूचना में कहा कि अधिसूचना की तिथि या उससे पहले जिस खेप के लिए अपरिवर्तनीय ऋण पत्र (एलओसी) जारी किए गए हैं, उसके निर्यात की अनुमति होगी।

डीजीएफटी ने कहा, “गेहूं की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है।”

साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भारत सरकार द्वारा अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु और उनकी सरकारों के अनुरोध के आधार पर दी गई अनुमति के आधार पर निर्यात की अनुमति दी जाएगी।

एक अलग अधिसूचना में डीजीएफटी ने प्याज के बीज के लिए निर्यात शर्तों को आसान बनाने की घोषणा की। पहले प्याज के बीज का निर्यात प्रतिबंधित था।

इस सप्ताह जारी आधिकारिक आँकड़ों से पता चलता है कि ईंधन और खाद्य पदार्थों के ऊँचे मूल्यों के कारण अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति 8 वर्ष के उच्च स्तर पर पहुँच गई।

मजबूत वैश्विक मांग के कारण 2021-22 में भारत का गेहूं निर्यात बढ़कर 70 लाख टन, जिसका मूल्य 2.05 अरब अमेरिकी डॉलर है, हो गया था।

गत वर्ष इसी अवधि में 130,000 टन के मुकाबले देश ने इस वर्ष लगभग 963,000 टन गेहूं का निर्यात किया है।

भारत 2022-23 में एक करोड़ टन गेहूं का निर्यात करना चाहता था। वाणिज्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि भारत गेहूं के शिपमेंट को बढ़ावा देने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए नौ देशों- मोरक्को, ट्यूनीशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, वियतनाम, तुर्की, अल्जीरिया और लेबनान में व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजेगा।

कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2021-22 (जुलाई-जून) में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.132 करोड़ टन होने का अनुमान है।