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विशेषज्ञों की राय में कोविड-19 की बूस्टर खुराक सभी आयु समूहों को देना उचित नहीं

केंद्र जल्द ही कोविड के टीकों की बूस्टर खुराक पर अपनी नीति पर पुनः विचार कर सकती है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरी खुराक अन्य आयु समूहों को देना ठीक नहीं है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने टीओआई को बताया कि वर्तमान नीति के अनुसार, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य कर्मियों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, जो बीमारियों से ग्रस्त हैं, को एहतियाती खुराक देना जारी रखा जाएगा।

अधिकारी ने कहा, “बूस्टर खुराक पर पुनः विचार किए जाने की आवश्यकता है। इस पर काफी मंथन हुआ है। यह भी पता चला कि जिन देशों में बूस्टर खुराक दी गई, वहाँ पर संक्रमण के मामलों में कमी नहीं आई। हम अन्य देशों का इस तरह अनुसरण नहीं करेंगे। भारत में इसे देने के बारे में देश के हालात को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाएगा।”

कोविड-19 के लिए टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) और डब्ल्यूएचओ की मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई।

अधिकारी के अनुसार, डब्ल्यूएचओ व एनटीएजीआई के विशेषज्ञों ने उन देशों के वास्तविक आँकड़ों का आकलन किया, जहाँ बूस्टर खुराक दी गई। स्थानीय आँकड़ों का भी अध्ययन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ संक्रमण के तरीके, वायरस के व्यवहार, नए प्रकार व वायरल लोड्स, ब्रेकथ्रू और पुनः संक्रमण की भी समीक्षा कर रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ भी बूस्टर डोज के बारे में नई गाइडलाइन जारी कर सकता है।

देश में 10 जनवरी तक 60 साल और उससे ऊपर के लोगों, स्वास्थ्य कर्मियों एवं अंग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को कुल 86.87 लाख एहतियाती टीका लगाया जा चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुमान है कि करीब तीन करोड़ स्वास्थ्य कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को बूस्टर खुराक दी जानी है। 60 साल से ज्यादा उम्र के करीब 2.75 करोड़ लोग हैं, जिन्हें अतिरिक्त खुराक दी जानी है।