विचार
आयुष्मान भारत – यह मोदी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना हो सकती है

प्रसंग

  • यदि इसे सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया गया, तो आयुष्मान भारत एक ऐसा निर्णय हो सकता है जिसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को याद किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री जन आरोग्य अभियान के शुभारंभ की घोषणा के माध्यम से आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (एनएचपीएस) की शुरुआत का संकेत दिया जो इस वर्ष में आगे 25 सितंबर को शुरू होगी। दुनिया में सबसे बड़े सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम के रूप में बताई जा रही योजना पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “इस स्वास्थ्य देखभाल पहल का 50 करोड़ भारतीयों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।” उन्होंने स्वास्थ्य को गरीबी से जोड़ते हुए कहा कि “यह तय करना आवश्यक है कि हम गरीबों को गरीबी के चंगुल से आजाद कर दें!”

और वास्तव में आयुष्मान भारत आपके, मेरे और एक आम भारतीय के लिए क्या मायने रखता है? आंकड़े बताते हैं कि यदि एक औसत भारतीय स्वास्थ्य समस्या के लिए 100 रुपये खर्च करता है, तो उसमें लगभग 70 रुपये वह अपनी खुद की जेब से खर्च करता है जबकि सरकारी अस्पतालों और मौजूदा बीमा योजनाओं के माध्यम से उसे कुल खर्च में 30 रुपये से भी कम मिलता है। इस कठोर वास्तविकता के प्रकाश में, ऐसा पहली बार हुआ है कि भारत सरकार ने 12,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने का संकल्प लिया है जो भारत भर में 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख स्वास्थ्य बीमाकृत राशि प्रदान करेगा।

एक ऐसे देश में जहां स्वास्थ्य पर भयानक खर्च के कारण हर साल 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे पहुंच जाते हैं, इस तरह की व्यापक स्वास्थ्य बीमा कवरेज समाज के विभिन्न स्तरों पर संसाधन वितरण की इक्विटी में सुधार के लिए एक गेम चेंजर के रूप में आता है। साथ ही, सबसे जरूरतमंद परिवारों की पहचान तथा लक्षित करने में मदद के लिए सामाजिक-आर्थिक जाति सर्वेक्षण का चयन किया है, जिससे सरकार 10.74 करोड़ गरीब, वंचित ग्रामीण परिवारों की मदद करने का प्रयास करेगी और साथ ही शहरी श्रमिकों के परिवारों के व्यावसायिक वर्ग की पहचान करेगी।

केंद्र सरकार और राज्य के बीच 60:40 अनुपात के साथ सरकार द्वारा प्रीमियम का भुगतान किया जाएगा तथा सार्वजनिक और निजी दोनों अस्पतालों में लक्षित लाभार्थियों को सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को आश्वस्त करने के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आयुष्मान भारत अपने आप में लचीला है, जो एक बड़े लक्ष्य के साथ सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देने के लिए, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार राज्यों द्वारा क्रिएटिव प्रोग्रामिंग की अनुमति देता है। एनएचपीएस लगभग सभी माध्यमिक और तृतीयक बीमारियों के इलाज के लिए लगभग 22 चिकित्सा पैकेजों को कवर करेगा। साथ ही, लागत को नियंत्रित करने के लिए, उपचार के लिए भुगतान पैकेज दर के आधार पर किया जाएगा। उपर्युक्त कार्यक्रम की इस प्रकार बनावट निचले वर्ग में चिकित्सा सेवाओं के बेहतर और समय पर वितरण के उद्देश्य से किया गया है। इसका लक्ष्य यह है कि कम से कम उन ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ भुगतान क्षमता कम है, निजी सुविधाओं कि जगह सार्वजनिक अस्पतालों की सुविधाओं के उपयोग का प्रोत्साहन हो।

आपूर्ति पक्ष पर, आयुष्मान भारत पूरे भारत में हजारों  स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्र खोलने की योजना बना रहा है। पिछली बीमा योजनाओं के विरोध में, जिनके कारणवश निजी अस्पतालों में महंगे और अनावश्यक निदान तथा तृतीयक प्रक्रियाओं की अनैच्छिक माँग का सृजन हुआ है, एनएचपीएस प्राथमिक देखभाल, स्वास्थ्य रोकथाम और योग पर दृढ़ता से ध्यान केंद्रित करने के लिए पूरित है। इसके अलावा भारत स्वास्थ्य की चिकित्सा परिभाषा, जिसने माध्यमिक और तृतीयक देखभाल पर भारतीय स्वास्थ्य सेवा उद्योग को कल्याण के क्षेत्र तथा जीवनशैली संशोधन की ओर विवेकहीनता से ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया है, को मीलों आगे ले जायेगा।

यह विशेष रूप से इस तथ्य के प्रकाश में महत्वपूर्ण है कि भारत वर्तमान में तपेदिक, मलेरिया और एचआईवी जैसी संक्रमणीय बीमारियों के दोहरे बोझ का सामना कर रहा है, लेकिन मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसे गैर-संवादात्मक या जीवनशैली विकारों की एक बड़ी महामारी भी है। ‘हम फिट तो इंडिया फिट’, स्वच्छ भारत अभियान और नए मानसिक हेल्थकेयर अधिनियम को स्वास्थ्य प्रचार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए और बेहतर स्वास्थ्य माँग व्यवहार पर इसका असर होना चाहिए।

कार्यान्वयन के लिए, बीमा पैकेज के प्रभावी वितरण को सुनिश्चित करने के लिए कार्यक्रम योजना में तीन महत्वपूर्ण नवाचार किए गए हैं। पहला बारकोड / क्यूआर कोड का उपयोग है, जिसे लाभार्थी द्वारा सरकारी प्रीमियम की स्वचालित कटौती और चिकित्सा पैकेजों के वितरण को सक्षम करने के लिए स्वाइप किया जा सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रक्रिया आईटी-सक्षम, पारदर्शी और समय पर है।

नीति आयोग ने देश के लिए इस आईटी बुनियादी ढांचे को विकसित करने हेतु पहले से ही एक प्रमुखता शुरू कर दी है। दूसरा, उपरोक्त उल्लिखित केंद्रों के हजारों ‘आयुष्मान मित्रों’ में से प्रत्येक को इन केन्द्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। आयुष्मान मित्र विभिन्न लाभार्थियों को उनके अधिकारयोग्य अधिकारों का लाभ उठाने में सूचित करने और समर्थन करने में सहायता के लिए एक विशेष प्रकार का दृष्टिकोण प्रदान करेंगे। तीसरा, राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी जाँच के लिए, आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन एजेंसी (एबी-एनएचपीएमए) नामक एक इकाई स्थापित की जाएगी, जबकि राज्य योजनाओं का निरीक्षण राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) द्वारा किया जाएगा, इस प्रकार सेवा वितरण के लिए मानक प्रोटोकॉल संस्थागत होगा।

दुनिया भर में सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलुओं में से एक के रूप में आयुष्मान भारत विशेष रूप से गरीबों और बीमार आबादी दोनों, जो पहले महंगे चिकित्सा उपचार के लिए भुगतान करने में सक्षम नहीं थे, की अनमोल जरूरतों को पूरा करने के लिए उपयुक्त है और यह स्वास्थ्य तथा सामाजिक भलाई एवं आर्थिक निर्धारकों को संबोधित की दिशा में भी सक्षम है। विशेष रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में आगे बढ़ते हुए, प्रभावी कार्यान्वयन, करीबी जाँच और मानव संसाधन के लिए क्षमता निर्माण, देश के लिए स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण होगा। इसके अलावा “स्वस्थ भारत” न केवल अपने आप में एक लक्ष्य होगा बल्कि कार्यबल की बेहतर उत्पादकता, सामाजिक सेवाओं और मानव विकास के नैतिक वितरण में भरण करने के लिए अंततः भारत को सतत विकास लक्ष्यों की उपलब्धि के लिए प्रयास करने में भी मदद करेगा।

डॉ. अनन्या अवस्थी हार्वर्ड इंडिया रिसर्च सेंटर मुंबई में सहायक निदेशक