विचार
क़ुतुब मीनार जितने लम्बे कूड़े के ढेर के पास रहने वालों का स्वास्थ्य कैसा होगा
गाजीपुर खत्ताघर

प्रसंग 
  • क्योंकि गाजीपुर खात्ताघर के बढ़ने का प्रहार गाजीपुर के लोग झेल रहे हैं, प्राधिकारी अब इसका हल निकलने के लिए जाग रहे हैं

देश की राजधानी नयी दिल्ली में पिछले साल क़ुतुब मीनार जितने लम्बे हो चुके एक खतरनाक खत्ताघर ने दो जानों को लील लिया जब उसके एक भाग को दफ्न किया जा रहा था।

खत्ताघर 1984 में बनाया गया था तब इसकी क्षमता 20 मीटर निर्धारित की गयी थी लेकिन 2017 तक इसने 60 मीटर को पार कर दिया। सितंबर के महीने में एक सरकारी रिपोर्ट ने चेतावनी के साथ खुलासा किया कि खत्ताघर 65 मीटर तक पहुंच गया है। इसका मतलब ये हुआ कि राजधानी क्षेत्र में सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाने वाला खत्ताघर, उसके यहाँ स्थित 73 मीटर लम्बे स्मारक, क़ुतुब मीनार जितना ऊँचा हो गया है।

गाजीपुर खत्ताघर

गाजीपुर स्थित गाजीपुर खत्ताघर का एक दृश्य

विज्ञान और प्रोद्योगिकी, पर्यावरण और वन पर संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट कहती है, दिल्ली के नगर निकायों का ढीला रवैया घज़िपुर खत्ताघर के ६५ मीटर ऊँचे हो जाने में प्रतिलिम्बित होता है।

यह प्राधिकारियों के लिए खतरे की घंटी होनी चाहिए क्योंकि यह गाजीपुर की स्थिति के हाथ से निकलने की एक और चेतावनी है। दिल्ली सरकार द्वारा खुद दी गयी जानकारी के अनुसार रिपोर्ट कहती है कि शहर करीब 10,400 टन का ठोस कूड़ा रोज़ पैदा करती है जिसमें से सिर्फ  5,600 ही शहर में संसाधित किया जाता है। बाकी का कूड़ा तीन मुख्य खात्ताघरों में डाला जा रहा है जो दिल्ली, मुख्यतः गाजीपुर, भलस्वा और ओखला में हैं।

गाजीपुर खत्ताघर 2002 में ही अपनी क्षमता को पार कर गया था लेकिन  कूड़ा लगातार डाला जाता रहा। इसके फलस्वरूप, जो खत्ताघर पिछले सालों में कम होना चाहिए था, विशेषकर 2017 की दुर्घटना के बाद, जिसमें जाने चली गयीं, सिर्फ बढ़ा है।

खत्ताघर में कभी-कभार आग लगा दी जाती है और खुदाई कर दी जाती है। लेकिन जो चीज़ बदलती नहीं वह है इसके 2 किलोमीटर के परिधि में रहने वाले गाँव वालों के स्वास्थ्य पर खत्ताघर का बुरा प्रभाव। गाजियाबाद के सीमा में आने वाले इलाके जैसे कि खोडा, कौशाम्बी, घरोली, कोंडली, कल्यानपुर और गाजीपुर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

कूड़े के ढेर के बीच गायें

कूड़े के ढेर के बीच गायें (स्वराज्य)

इस घातक रिपोर्ट के कई हफ़्तों बाद स्वराज्य  गाजीपुर पहुंचा और वहां नागरिक सेवाओं को धराशायी पाया। केंदीय भंडारण निगम का भंडार गृह, जो बड़ी मात्र में माल को संभालता है, के साथ-साथ यहाँ औद्योगिक केंद्र होने के बावजूद गाजीपुर में बुनियादी सुविधाओं की कमी है जैसे, सार्वजनिक कूड़ेदान और पानी, दोनों ही  सार्वजानिक स्वास्थ्य के किये महत्वपूर्ण हैं। यहाँ के निवासी कहते हैं कि वहां रहने वाला हर व्यक्ति कोई न कोई बीमारी से ग्रसित है।

लोग यहाँ बीमार पड़ रहे हैं। परिक्षण करने पर पता चलता है कि एक व्यक्ति कम से कम छ: बीमारियों से ग्रसित है जिसमें मुख्यतः अस्थमा जैसी साँस की बीमारी शामिल है। गौरव त्यागी गाजीपुर में पिछले 21 साल से रह रहे हैं और एक कोचिंग  सेण्टर चलते हैं, कहते हैं कि खराब हवा की वजह से मुझे भी सांस लेने में दिक्कत होती है। जब हम घर में होते हैं तो बदबू की वजह से छत पर जाने का मन नहीं करता। ­

गौरव त्यागी (स्वराज्य)

गौरव त्यागी (स्वराज्य)

कोचिंग सेंटर की एक महिला ने अपना नाम छिपाते हुए कहा कि वह गाजियाबाद से 2 किलोमीटर दूर प्रांतीय शाश्क्त पुलिस (पीएसी) कैंप के पास रहती है, और वहां भी बदबू की भरमार है।

गाजीपुर के सार्वजानिक स्वास्थ्य की जाँच करने के लिए स्वराज्य  दिल्ली विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान और गुरु तेग बहादुर अस्पताल द्वारा चलाए जा रहे शहरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। वह खाली और खस्ताहाल हालत में था। वहां खेल रहे बच्चों ने बताया कि उन्हें याद नहीं कि उन्होंने इसे पहले कभी चलता हुआ देखा है।

ऐसे हालात पर अपने निर्वाचित प्रतिनिधि के बारे में लोगों का कहना था कि विश्वास नगर के पार्षद ओम प्रकाश शर्मा, दिल्ली विधान सभा में बीजेपी के सिर्फ तीन निर्वाचित नेताओं में से एक हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी इस क्षेत्र का दौरा नहीं किया। अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर एक निवासी ने बताया कि वह यहाँ नहीं आते हैं और न ही हमारी परवाह करते हैं क्योंकि यहाँ से उनको वोट नहीं मिलते हैं।

डॉ आरएस कुशवाह गाजीपुर, घरोली और कोंडली में अपनी सेवाएं देते हैं, ने कहा कि 100 में से कम से कम 8 लोग टीबी से ग्रसित हैं। उन्होंने बताया की वह उन्हें सरकारी अस्पतालों में भेज देते हैं क्योंकि ज़्यादातर लोग निजी इलाज वहन नहीं  कर सकते। अस्थमा जैसे साँस के रोग भी आम हैं। हालाँकि यहाँ त्वचा के रोग सबसे ज्यादा होते हैं।

स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड (बाएँ में), और खाली पड़ा स्वास्थ्य केंद्र (दाएं में)

स्वास्थ्य केंद्र का बोर्ड (बाएँ में), और खाली पड़ा स्वास्थ्य केंद्र (दाएं में)

लगभग हर व्यक्ति फफूंदी संक्रमण से ग्रसित है, कुशवाह ने कहा। यह बहुत ही मलिन और भीड़ वाला क्षेत्र है जहाँ कम शिक्षित और कम आय कमाने वाले लोग रहते हैं। एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) यहाँ अनुपस्थित है और सफाई बिलकुल नहीं है। कट्टीखाने के साथ मछली और मीट के बाज़ार कचरे के पहाड़ से होने वाली  परेशानी को और बढ़ा रहे हैं, उन्होंने कहा।

निवासी कहते हैं कि उन्हें बारिश से डर लगता है। जब बारिश आती है तब बदबू भयंकर हो जाती है और गला हुआ कचरा हवा के साथ मिलकर उसे और भी प्रदूषित कर देता है। डॉ कुशवाहा कहते हैं कि मौसम के बदलाव के साथ ही बच्चों को जुकाम और निमोनिया जैसे रोग जकड़ लेते हैं। उन्होंने जेनेरिक दवाओं के असरदार नहीं होने की भी शिकायत की, जो लोग बताई गयी असली दवाओं की तुलना में सस्ती होने की वजह से ले लेते हैं।

सडक के किनारे नाले में बहता हुआ खत्ताघर का गीला कचरा

सडक के किनारे नाले में बहता हुआ खत्ताघर का गीला कचरा

स्वराज्य  एक स्थानीय अस्पताल पर पहुँचता है जहाँ डॉक्टर फफूंदी संक्रमण से ग्रसित एक रोगी को देख रहे होते हैं। डॉक्टर ने बताया कि दूषित पानी और सफाई की कमी की वजह से यहाँ त्वचा रोग जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने अपने साथ अस्पताल लाई गयी मिनरल वाटर की बोतल की तरफ इशारा करते हुआ कहा कि यहाँ का पानी पीने योग्य नहीं है।

खत्ताघर का दूषित पानी सड़क किनारे के नाले में सीधे छोड़ा जा रहा है जो नहर के किनारे बह रहा है।

निवासी कहते हैं कि खत्ताघर के सड़क के पार बना हुआ कट्टीखाना भी खत्ताघर और मीट बाज़ार के साथ मिलकर प्रदुषण का मुख्य कारण है। पानी और भूमि को दूषित करने के साथ कट्टीखाना बदबू को भी बढ़ा रहा है। इन बाजारों और कट्टीखाने की वजह से चौबीसों घंटे यहाँ अनगिनत चील और कौवे मंडराते रहते हैं जो अब इस क्षेत्र की पहचान बन गए हैं।

क्षेत्र में मंडराते चील और कौवे

क्षेत्र में मंडराते चील और कौवे

यहाँ के निवासी कहते हैं कि गाजीपुर खत्ताघर ने यहाँ के पारितंत्र को नष्ट कर दिया  है और लोगों को दयनीय जिंदगी जीने पर मजबूर कर दिया है। इतने सालों के बाद राज्य बस समाधानों से जूझ रहा है। ज्यादा कचरा नहीं डालने की कई बार चेतावनी देने पर भी नागरिक निकाय ऐसा किये जा रहा है क्योंकि उसके पास दूसरा विकल्प नहीं है।

दिल्ली नगर निगम (पूर्व) के मुख्य अभियंता पी के खंडेलवाल ने हाल ही में मीडिया को बताया कि दो वैकल्पिक साईट तैयार की जा रहीं हैं और गाजीपुर में कूड़ा डालना कम कर दिया गया है। हालाँकि यह बेहतर भविष्य की और कदम लग रहा है, लेकिन यह मुद्दा उस तत्परता के साथ नहीं संभाला जा रहा है जितने की ज़रुरत है।

फिलहाल यहाँ के निवासी इस प्रहार को झेलने पर मजबूर हैं।

 मधुर शर्मा दिल्ली विश्विद्यालय में इतिहास की स्नातक की पढाई कर रहे हैं। वह@madhur_mrt पर ट्वीट करते हैं।