विचार
टीकाकरण क्यों न चुनावी मोड पर किया जाए! बाल रोग चिकित्सक का यह सुझाव व्यवहार्य

अपोलो हॉस्पिटल्स के मुख्य बाल रोग चिकित्सक अनुपम सिब्बल ने एक बेहतरीन सुझाव दिया है— चुनावी मोड पर टीकाकरण किया जाए! टीवी18 पर एक पैनल परिचर्चा के दौरान उन्होंने यह सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि हम चुनावों को बहुत अच्छी तरह से आयोजित करते हैं, जो देश के किसी-न-किसी भाग में हर समय होते ही रहते हैं। ऐसे में इस चुनावी प्रक्रिया के फलस्वरूप हमने जो तंत्र और आधारभूत संरचना तैयार कर ली है उसका उपयोग पूरे देश में युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाने के लिए करना चाहिए।

कल (19 जुलाई को) ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मानसून सत्र के आरंभ होने से पूर्व संसद भवन के बाहर कहा था कि 40 करोड़ भारतीय बाहुबली हो गए हैं, उनका संकेत उन 40 करोड़ लोगों की ओर था जिन्हें टीके की कम-से-कम एक खुराक तो लग गई है।

टीका उपलब्धता, टीकाकरण के प्रति संकोच, आवश्यक आपूर्ति शृंखला और भारत जैसे विविध एवं विस्तृत देश जैसी कई सारी चुनौतियों का सामना करने के बाद 40 करोड़ का आँकड़ा कोई छोटा नहीं है।

135 करोड़ की भारत की जनसंख्या में से मात्र 5 प्रतिशत लोगों को ही टीका की दोनों खुराकें लगी हैं, इस तथ्य के माध्यम से आलोचक सरकार पर निशाना साध रहे हैं लेकिन शायद वे भूल जाते हैं कि एक खुराक से भी लगभग 70 प्रतिशत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है।

लॉस एंजलिस, जहाँ महामारी फिर बढ़ रही है, वहाँ प्रयास हो रहा है कि लोगों के मन से टीका के प्रति संकोच हटाया जाए। यह एक ऐसी मानसिकता है जो अमेरिकियों में देखी गई है। लगभग 50 प्रतिशत अमेरिकी हमेशा से टीका के प्रति संदेहवादी रहे हैं।

परेशान होकर अब वहाँ लोगों से घरों के भीतर भी मास्क पहनने को कहा जा रहा है। भारत में, एक बाल रोग चिकित्सक होने के नाते सिब्बल विशेष रूप से चिंतित होंगे क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि तीसरी लहर बच्चों पर अधिक प्रभाव डालेगी।

एक ऑनलाइन परिचर्चा में सिब्बल (मध्य में)

समस्या यह है कि बच्चों को पृथकवास में भी नहीं रखा जा सकता क्योंकि उन्हें उनके माता-पिता की आवश्यकता होती है। इस स्थिति से बचने के लिए, जब देश में पर्याप्त टीका खुराकों का उत्पादन होने लगे, तब उन्हीं मतदान केंद्रों का उपयोग होने चाहिए जहाँ लोग पहले मतदान के लिए जाते थे, अब टीका के लिए जाएँगे।

कठिन परिस्थितियों में भी चुनाव करा लेने वाले चुनाव आयोग पर विश्वास किया जा सकता है और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर इसे दायित्व सौंपना चाहिए। पूरे देश में आम चुनाव लगभग एक साथ होते हैं लेकिन टीकाकरण के लिए प्रशासन को आवश्यकतानुसार योजना बनानी चाहिए।

उदाहरण स्वरूप, एक दिन के लिए किसी एक शहर या कस्बे को चुन लिया जाए। इन मतदान केंद्रों पर शिशु और बच्चे नवागंतुक होंगे जब उनके लिए भारी मात्रा में टीके उपलब्ध हो जाएँगे। स्वदेशी कोवैक्सीन बच्चों के लिए उपयुक्त है, यह समाचार सुखदायक है।

हालाँकि, ईवीएम और स्याही ले जाने से अधिक कठिन होगा शीत आपूर्ति शृंखला में टीकों को ले जाना। एक और बात का ध्यान रखना होगा— मतदान में सामाजिक दूरी का पालन करने की आवश्यकता नहीं होती लेकिन टीकाकरण में इन नियमों का पालन करना होगा।

मास्क लगाने और सामाजिक दूरी के नियम को लागू करने का अनुभव चुनाव आयोग को मिल चुका है, जब महामारी के दौरान कुछ राज्यों के चुनाव हुए। हालाँकि, चुनाव आयोग मतदान केंद्र में किसी भी बाहरी वस्तु को ले जाने नहीं देता लेकिन बच्चों के लिए इसे चॉकलेट-बिस्किट जैसी सामग्रियों के लिए छूट देनी चाहिए।

पश्चिम बंगाल में कोविड के दौरान मतदान (चित्र साभार-@ECISVEEP)

यदि यूएस के कुछ राज्य बीयर के प्रलोभन से टीका संकोच मिटाना चाहते हैं तो भारत में क्यों न टी-शर्ट का प्रलोभन दिया जाए जिसपर टीका लगाने पर गौरवान्वित होने जैसा कुछ संदेश छपा हो।

1975-77 में आपातकाल के दौरान संजय गांधी द्वारा करवाई जा रही जबरन नसबंदी के हम विरुद्ध हैं लेकिन टीकाकरण अभियान के दौरान थोड़ा बलप्रयोग किया जा सकता है जो आपत्तिजनक न हो।

ऐसा इसलिए क्योंकि हम सब जानते हैं कि सामूहिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए सभी का टीकाकृत होना आवश्यक है। साथ ही गैर-टीकाकृत लोगों में वायरस कोई ऐसा रूप ले सकता है जिससे पुनः उसका प्रसार शुरू हो जाए।

लेकिन कड़ाई बरतने से पहले प्रोत्साहन के विकल्प देखें। चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची है। यहाँ से शुरुआत की जा सकती है। स्थानीय निकाय उन लोगों को टीकाकरण केंद्रों पर लाएँगे जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है।

मतादाता पहचान-पत्र की बजाय आधार कार्ड होगा तथा मोबाइल नंबर पर आधारित कोविन वेबसाइट को और दुरुस्त करना होगा। कुछ कम-ज़्यादा हो सकता है लेकिन मिशन मोड पर टीकाकरण, जो कि चुनावी मोड की तरह होगा, का सिब्बल का विचार व्यवहार्य है।

टीकाकरण ही इस बात को सुनिश्चित करेगा कि महामारी की लहर बार-बार न आए। तब तक के लिए मास्क पहने और दो गज की दूरी बनाकर सार्वजनुक स्थलों में जाएँ। जय हिंद, जय भारत।