विचार
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कौशल विकास की उड़ान पर “युवा उत्तर प्रदेश”

उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश को ऐसे दिशा दी जैसे कोई एमडी या सीईओ विरासत में मिली एक ‘बीमार’ कंपनी को कुशल प्रबंधन से धीरे-धीरे एक लाभ कमाने वाली कंपनी बनाने के लिए क्रियाशील है। सही नीयत और उत्कृष्ट नीति से मुख्यमंत्री योगी उस राज्य को भी बेहतर तरीके से प्रबंधित कर रहे हैं जिसकी जनसंख्या शायद कई यूरोपीय और पड़ोसी देशों से भी अधिक है।

क्योंकि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उनके सामने उस समय की तमाम चुनौतियों में से सबसे प्रमुख यह थी कि प्रदेश का युवा या तो बेरोजगार है या फिर रोजगार की खोज में पलायन के लिए मजबूर है। योगी ने इस समस्या को एक दूरदर्शी मुख्य कार्यकारी अधिकारी की तरह पहचाना। इसीलिए उनकी रणनीति के केंद्र में है उत्तर प्रदेश का युवा और देश के सबसे युवा प्रदेश की व्यापक मानव संपदा को संवारना।

इस विज़न को ज़मीन पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री योगी ने ‘कौशल विकास’ और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) सेक्टर पर ज़ोर दिया जिसके परिणाम आज सबके सामने हैं। उत्तर प्रदेश अब इस सेक्‍टर के जरिये सबसे ज्‍यादा रोजगार देने वाला देश का पाँचवा सबसे सफल राज्‍य बन गया है। रिज़र्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा तैयार की गई रैंकिंग में कई राज्‍यों को पीछे छोड़कर उत्तर प्रदेश ने शीर्ष पाँच में जगह बनाई है।

नीति आयोग द्वारा प्रदेश के आठ जनपदों को ही आकांक्षात्मक जनपदों में सम्मिलित किया गया है। यह जनपद- बलरामपुर, बहराइच, चित्रकूट, चंदैली, फतेहपुर, श्रावस्ती, सिद्वार्थनगर व सोनभद्र हैं। नीति आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध नवीनतम रैंकिंग (नवंबर, 2020) के आधार पर श्रावस्ती का स्थान देश में प्रथम है। इसके अतिरिक्त जनपद चित्रकूट व चंदौली की रैंकिंग क्रमशः तीन व पाँच है। इस प्रकार प्रदेश के तीन जनपद देश के प्रथम पाँच जनपदों में सम्मिलित है।

विगत चार वर्षों के कार्यकाल में कौशल विकास योजनाओं के अंतर्गत युवाओं के इनरोलमेंट और प्रशिक्षण प्रदान करने की संख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। वहीं प्रशिक्षित युवाओं के संदर्भ में प्रदेश का द्वितीय स्थान है।

05/03/2019

पिछली सरकारों की तुलना में योगी सरकार ने दो गुना से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित तथा सेवायोजित किया है। सपा सरकार के पाँच वर्ष के कार्यकाल में जहाँ मात्र 3.4 लाख युवा प्रशिक्षित तथा 1.36 लाख युवा सेवायोजित हो पाए थे, वहीं 2017 में योगी सरकार के आने के बाद 7 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने के साथ ही लगभग 3.5 लाख युवाओं को सेवायोजित किया जा चुका है। इसके साथ ही युवाओं के कौशल विकास की यात्रा निरंतर गतिमान है।

मुख्यमंत्री योगी ने युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए स्वयं इस कार्यक्रम का नेतृत्व किया। इसके परिणामस्वरूप विगत चार वर्षों में 26 वृहद् ‘रोजगार मेलों’ के माध्यम से 26,000 से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ने में सफलता प्राप्त हुई।

‘मिशन रोजगार’ हो रहा साकार

मुख्यमंत्री योगी ने ‘मिशन रोजगार’ को प्रमुखता से आगे बढ़ाने का यह विज़न दिया है कि उनका लक्ष्य न सिर्फ युवाओं को प्रशिक्षित करना है बल्कि उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना भी है। इसके साथ ही योगी सरकार का लक्ष्य युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर अपने उद्यमों की स्थापना हेतु भी अग्रसर करना है।

अपना उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय, तकनीकी व अन्य सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही उद्यमिता की बारीकियाँ सिखाने के लिए योगी सरकार प्रत्येक जिले में कार्यशालाएँ आयोजित करने की ओर बढ़ रही है। इन कार्यशालाओं के माध्यम से एक जिला, एक उत्पाद के बारे में आए अभिनव विचारों के अनुसार इच्छुक युवाओं को प्रशिक्षण और आर्थिक मदद के साथ ही पैकेजिंग और मार्केटिंग के विषय में भी अवगत कराया जाएगा।

कोरोना काल में भी नहीं थमी योगी सरकार की ‘कौशल विकास’ की यात्रा

जहाँ एक ओर वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ् इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने की जद्दोजहद थी, वहीं अन्य राज्यों से आए प्रवासी श्रमिकों/कामगारों को रोजगार से जोड़ने की चुनौती भी।

ऐसे में मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों के अनुरूप प्रवासी श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए बनाए गए केंद्रों पर ही स्किल मैपिंग की व्यवस्था की गई और इसी के दृष्टिगत लगभग 37 लाख श्रमिकों की स्किल मैपिंग संपन्न हुई जिसके आधार पर 17,25,892 कुशल तथा 19,74,108 अकुशल श्रमिक चिह्नित किए गए।

इसी क्रम में योगी सरकार ने प्रदेश में श्रमिक और कामगार (सेवायोजन और रोजगार) आयोग के गठन को मंजूरी दी जिससे प्रवासी मजदूरों एवं कामगारों को रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है। बात कोरोना महामारी के दौरान युवाओं को दिए जाने वाले प्रशिक्षण की करी जाए, तो सितंबर माह से विधिवत प्रशिक्षण कार्य पुनः प्रारंभ किए गए।

चूँकि कोरोना संक्रमण के कारण लगभग छह माह तक प्रशिक्षण के कार्य स्थगित रहे, अतः इसकी प्रतिपूर्ति करने के साथ ही प्रवासी श्रमिकों को रोजगार प्राप्त करने हेतु कुशल बनाने में इस वर्ष 6 लाख प्रशिक्षणार्थियों को आरपीएल के अंतर्गत प्रशिक्षित किया जाएगा। अतः पिछले कई वर्षों की तुलना में इस वर्ष रिकॉर्ड युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, इस माह वृहद रोजगार मेलों के माध्यम से सेवायोजन के कार्य को गति दी जाएगी।

बुंदेलखंड क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में कौशल विकास विभाग द्वारा किए गए अनेक अभिनव प्रयास

विगत चार वर्षों में सर्वाधिक युवाओं को प्रशिक्षित तथा उन्हें सेवायोजित करने का कार्य मुख्यमंत्री योगी के कुशल नेतृत्व में संभव हुआ है। युवाओं के भविष्य को उज्जवल बनाने के साथ ही वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक प्रशिक्षण प्रदाताओं की संख्या में वृद्धि तथा फ्लैक्सी प्रशिक्षण प्रदाताओं व प्लेसमेंट एजेंसियों के अनुबंधन किए गए।

ऑनलाइन अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई। इसी क्रम में जिला कौशल विकास योजना के माध्यम से जनपद स्तरीय नियोजन को प्राथमिकता देने के साथ ही कौशल प्रशिक्षण की आवश्यकताओं तथा रोजगार की संभावनाओं को चिह्नित भी किया गया।

उक्त के अतिरिक्त विगत चार वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा अनेक अभिनव प्रयास भी किए गए, जैसे-दिव्यांगजनों के प्रशिक्षण हेतु विशिष्ट संस्थाओं का चयन, आरपीएल के माध्यम से परंपरागत शिल्पकारों का कौशल उन्नयन व प्रमाणीकरण, विश्व बैंक पोषित संकल्प योजना का क्रियान्वयन, ‘कौशल सतरंग’ का शुभारंभ, मुख्यमंत्री युवा योजना का क्रियान्वयन तथा क्षेत्रीय कौशल प्रतियोगिता का आयोजन, आदि।

मुख्यमंत्री योगी के मिशन ‘कौशल विकास’ को राष्ट्रीय स्तर पर मिली ख्याति

रोजगार प्रदान करने के साथ ही आमजन को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार से जोड़ने में भी उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। एसोचैम द्वारा उत्तर प्रदेश को वर्ष 2018-19 में ‘बेस्ट स्टेट इन स्किलिंग’ की गोल्डन ट्राफी से सम्मानित गया। इसके साथ ही वर्ष 2020-21 में ईएलईटीएस द्वारा 17वीं वर्ल्ड एजुकेशन समिट 2020 में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को कोर्सेरा, अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के 50,000 छात्रों को निःशुल्क प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप इन वोकेशनल ट्रेनिंग कैटेगरी में सर्टिफिकेट ऑफ़ रिकग्निशन प्रदान किया गया।

रोजगार प्रदान करने की धुरी बन रहे ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र’

भारत सरकार द्वारा प्रदेश में कुल 78 प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र अनुमोदित किए गए हैं। प्रति केंद्र 15 प्रशिक्षकों एवं सहायक कर्मियों के अनुसार कुल 1,170 युवाओं को सेवायोजित माना जा सकता है। उप्र कौशल विकास मिशन में अनुबंधित निजी/राजकीय/फ्लैक्सी प्रशिक्षण प्रदाता को लगभग 2,900 प्रशिक्षण केंद्र अनुमोदित हैं, इस आधार पर लगभग 23,000 व्यक्तियों को सेवायोजित माना जा सकता है।

शैलजा श्रीवास्तव वरिष्ठ पत्रकार हैं। महेंद्र कुमार सिंह राजनीतिक विश्लेषक और स्तंभकार हैं।