विचार
नौकरियों में कोविड-19 के कारण दो ट्रेंड- वेतन ध्रुवीकरण और महिलाओं के लिए रोजगार

कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण हर तरफ नौकरियों पर प्रभाव पड़ा है, भारत में भी। लेकिन दो ट्रेंड देखे जा सकत हैं जो बड़े स्तर पर असर दिखा सकते हैं। इन दोनों ट्रेंड में कुछ बातें नकारात्मक हैं तो कुछ सकारात्मक।

नकारात्मक (आंशिक रूप से सकारात्मक) प्रभाव है वेतन ध्रुवीकरण का। इसका अर्थ हुआ कि उच्च कौशल की माँग करने वाली नौकरियों, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड प्रोग्रामर, सायबर सुरक्षा विशेषज्ञ, शीर्ष विक्रेता (सेल्समेन), उत्पाद और अन्य डिज़ाइनर, में वेतन बढ़ेगा, अगर अब तक बढ़ना शुरू नहीं हुआ है तो।

निचले छोर पर तकनीकी मंचों, रसद, भंडारण और खुदरा बाज़ार में अग्रणी मोर्चे पर ऊबर, ओला, अमेज़ॉन, फ्लिपकार्ट, स्विगी, जियो मंच आदि में नौकरियाँ बड़ी मात्रा पर होंगी। तकनीकी मंचों में कर्मचरियों में कम कौशल की ही आवश्यकता होती है और इसलिए कम वेतन वाली नौकरियों में उछाल आएगा।

एक औसत ओला चालक में वाहन चलाने और गूगल मानचित्र जैसी ऐप समझने से अधिक कोई कौशल की आवश्यकता नहीं है। स्विगी और फ्लिपकार्ट डिलीवरी करने वाला व्यक्ति अच्छी-खासी राशि कमा सकता है यदि वह दिन भर में धूप में गाड़ी चला सकता है। यह उत्कृष्ट नौकरी नहीं है लेकिन वेतन खराब भी नहीं है।

समस्या होगी मध्यम स्तर की नौकरियों में, जैसे प्रशासनिक और मानव संसाधन कर्मचारी, फैक्ट्री शॉपफ्लोर कर्मचारी, बैंक काउंटर कर्मचारी और औसत बीमा एजेंट, क्योंकि यहाँ तकनीक कर्मचारियों का स्थान ले लेगी। मोबाइल पर ही बैंक है और बीमा अधिकांशतः ऑनलाइन ही बेची जाएगी। अधिकांश फैक्ट्री नौकरियों को स्वचालित किया जा रहा है।

ये ट्रेंड पिछले कुछ समय से ही देखा जा रहा है लेकिन कोविड-19 के कारण और तीव्र होगा क्योंकि अधिक कर्मचारियों को नौकरी पर रखने को कंपनियाँ खतरे के रूप में देखेंगी। साथ ही यह उनके लिए महंगा सौदा भी होगा क्योंकि कंपनियों को कर्मचारियों के स्वास्थ की दैनिक जाँच करनी होगी व शारीरिक दूरी का भी पालन करना होगा।

कोविड-19 हल्के कामों में भी बढ़ोतरी करेगा जैसे अर्धकालिक या परियोजना अथवा आउटपुट आधारित काम और घर से काम करने का प्रचलन बढ़ेगा। स्वास्थ्य सेवा, ऑनलाइन शिक्षा आदि क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ेगा।

यहीं पर अच्छा समाचार है। भारतीय कार्यबल में महिला प्रतिनिधित्व काफी कम है। इसके कारण हैं असहयोगी कार्य परिस्थिति, कम वेतन और गर्भावस्था के समय वेतन देने में नियोक्ताओं की अनिच्छा।

हालाँकि यह असंगठित कार्यक्षेत्र पर लागू नहीं होता है क्योंकि वहाँ मातृत्व अवकाश और कार्यस्थल के निकट शिशु-गृह की आवश्यकता नहीं होती। संगठित कार्यक्षेत्र में इन प्रावधानों के कारण नियोक्ता महिला कर्मचारियों को भर्ती करने से कतराते हैं। इसके अलावा यौन उत्पीड़न और शोषण के भय के कारण महिलाएँ स्वयं कार्यालय या फैक्ट्री में काम नहीं करना चाहतीं क्योंकि मामले के निपटान सुलभ नहीं  होते।

इसलिए कार्यस्थलों में महिलाओं की सहभागिता दर कम है। भारतीय अर्थव्यवस्था मॉनिटरिंग केंद्र (सीएमआईई) के अनुसार सितंबर-दिसंबर 2019 में शहरी क्षेत्रों के कार्यबल में 68.8 प्रतिशत पुरुष सहभागिता दर रही लेकिन महिलाओं की मात्र 9.5 प्रतिशत।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह अंतर और अधिक था- पुरुषों की दर 72.5 प्रतिशत और महिलाओं की 11.6 प्रतिशत। कार्यबल सहभागिता दर निकालने के लिए कार्यरत लोगों और कार्य करने को इच्छुक लोगों की संख्या के योग को 15 वर्ष से अधिक आयु वाली कार्य योग्य जनसंख्या से भाग किया जाता है।

ये कार्यस्थल ट्रेंड कोविड-19 के दबाव में महिलाओं के लिए अवसर खोलेंगे। जानें कैसे-

पहला, महिलाएँ हल्के और अर्धकालिक कार्यों के प्रति अधिक इच्छुक होती हैं तथा घर से काम करने में भी सहज हैं। नियोक्ता उन्हें भर्ती करने के इच्छुक रहेंगे।

दूसरा, प्रायः महिलाएँ एक ही काम के लिए पुरुषों से कम वेतन पर तैयार हो जाती हैं। इसके लिए नारीवादी दाँत अवश्य पीस सकते हैं लेकिन अर्थव्यवस्था ऐसे ही काम करती है। अगर समान योग्यता वाला कोई व्यक्ति कम वेतन पर काम करने के लिए तैयार है तो नियोक्ता उसे ही चुनेंगे।

तीसरा, गर्भावस्था के समय की लागत उठाने का भय भी नियोक्ताओं में कम होगा क्योंकि महिलाएँ घर से ही काम करेंगी और अर्धकालिक नौकरियाँ होंगी। ऐसे में गर्भवती महिला को मात्र कुछ दिनों के ही अवकाश की आवश्यकता होगी। अपने खाली समय में वह काम कर सकती है और शिशु की देखभाल भी कर सकती है।

कोविड-19 के भय के कारण महिलाएँ अपने बच्चों को नौकरानियों या संदिग्ध गुणवत्ता लाले शिशु-गृहों में छोड़ना नहीं चाहेंगी।

चौथा, कोविड-19 के कारण उन नौकरियों में वृद्धि होगी जहाँ पारंपरिक रूप से महिलाओं का प्रभुत्व पहले से ही स्थापित है जैसे स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा। ऑनलाइन स्वास्थ्य परामर्श और शिक्षा में बढ़ोतरी महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर खोलेगी।

दूसरा आँकड़ा जो पुरुषों के लिए चिंताजनक और कोविड-19 से सीधा संबंधित है, वह है कि विश्वभर में भले ही पुरुषों और महिलाओं के संक्रमित होने की संभावना समान है लेकिन मृत्यु दर पुरुषों के लिए अधिक है।

ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाओं की नैसर्गिक रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और पुरुषों में संकट को न्यौता देने वाला व्यवहार अधिक होता है जो उनके स्वास्थ्य के लिए खतरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि यूरोप में कोविड-19 के कारण हुई मृत्यु में 63 प्रतिशत मृतक पुरुष हैं। अमेरिका में संक्रमण का केंद्र बने न्यूयॉर्क में प्रति लाख पुरुषों में 43 की मृत्यु हुई, वहीं महिलाओं के लिए यह संख्या 23 है।

कुल मिलाकर भारत के कार्यबल में लिंग अनुपात संतुलित करने का काम कोविड-19 करेगा। पुरुषों के लिए चिंतित होने के कारण हैं।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। वे @TheJaggi के माध्यम से ट्वीट करते हैं।