विचार
अंकल सैम, धन्यवाद। अब हमें एक नहीं, पाँच इस्लामवादी खलीफाओं से निपटना है

विश्व के सबसे अधिक लागत वाले थिंक-टैंक (चिंतन मंच) होने के बावजूद भी यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के स्पर्श में किसी भी देश से अधिक निश्चितता होती है कि वह जिसे छू ले, उसे भस्म कर देगा। अंकल सैम जिसे भी छू लें, वह आज नहीं तो कल राख बन ही जाता है। और शत्रुओं से अधिक जल्दी मित्रों का नाश होता है।

पिछले एक महीने में, जब से अमेरिकी अफगानिस्तान से पीछे हटे हैं, जो बाइडन प्रशासन ने विदेश नीति की सबसे बड़ी विपत्ति खड़ी की है। और यह तब हुआ है जब तालिबान के लड़ाकों से तीन गुनी संख्या वाली अफगान सेना को प्रशिक्षित किया गया था।

रात के अंधेरे में चुपके से ओझल हो जाने के बाद अमेरिकी सैन्य बलों को बचे हुए नागरिकों और “परिसंपत्तियों” को तालिबान से बचाने के लिए अस्थाई रूप से लौटना पड़ा था। सब जानते थे कि अफगानिस्तान में युद्ध में अमेरिका के पास अधिक कुछ बचा नहीं था लेकिन आपको थोड़ा प्रयास करना होगा यह समझने के लिए कि सेना वापसी में गौरव का कोई अंश नहीं है।

यूँ ही नहीं रिचर्ड निक्सन प्रशासन नें राज्य सचिव हेनरी किस्सिन्गर ने कहा था, “अमेरिका का शत्रु होना खतरनाक हो सकता है, लेकिन मित्र होना घातक है।” सच्चाई यह है कि इस्लामी क्षेत्रों में पश्चिमी हस्तक्षेप ने पहले की स्थिति को और बदतर ही किया है।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब ब्रिटिश ने तुर्की के खलीफा का विघटन किया था तो सऊदी अरब में एक वहाबी शासन का जन्म हुआ। जब अमेरिका ने ईरान के शाह को अचानक छोड़ दिया था तो मजहबी गुरु वामपंथियों की सहायता से सत्ता में आया था और सत्ता में आने के बाद वामपंथियों को त्याग दिया।

इसमें आज के उन वामपंथी उदारवादियों के लिए संदेश निहित है जो यह सोचते हैं कि इस्लामोफोबिया के नाम पर इस्लामवादी ताकतों के सामने धिम्मी बनकर रहना सही है। अपनी उद्देश्य की पूर्ति के बाद इस्लाम वामपंथ का सर्वनाश कर देगा, जैसा कि यह अपने शत्रुओं के साथ करता आ रहा है।

एशिया और यूरोप के मध्य स्थित रणनीतिक क्षेत्र में पश्चिम की सर्वश्रेष्ठ सहयोगी- तुर्की की पंथनिरपेक्ष सेना को चुपके से पश्चिमी मीडिया ने अवैध घोषित कर दिया तो उसके बाद रजब तैय्यब एर्दोगन के नेतृत्व में इस्लामवाद उभरा। तुर्की के राष्ट्रपति को पश्चिम ने पहले ‘मॉडरेट मुस्लिम’ कहा था लेकिन बाद में पता चला कि वे तो वैश्विक इस्लामवादी नेता बनना चाहते हैं।

अब तालिबान के शासन वाले अफगानिस्तान में पूरी संभावना है कि वहाँ एक छोटा खलीफा उभरे जो अल कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों को आश्रय दे। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकी समूहों के साथ तालिबान लड़ रहा था जो अब भारत को लक्ष्य करने के लिए मुक्त हो जाएँगे क्योंकि अंकल सैम काबुल छोड़कर भाग चुके हैं।

अबु बक्र अल बगदादी के अधीन वाला इस्लामी खलीफा भले ही चला गया हो लेकिन अब हमारे पास पाँच छोटे खलीफे हैं, भले ही उन्हें ऐसा संबोधित नहीं किया जाता है। खलीफा नाम से ही संबोधित करना आवश्यक नहीं है, इसकी पहचान ऐसे की जा सकती है कि जिसके पास अपने नेतृत्व में इस्लामवादियों को रखने की क्षमता हो।

पाकिस्तान में सेना प्रमुख खलीफा हैं जो निर्वाचित सरकार के पीछे होते हैं। ईरान में अयतोल्लाह छोटा खलीफा है जिसकी इराक और सीरिया जैसे कुछ शिया क्षेत्रों पर शक्ति है। उसके साथ हिज़बोल्ला भी है जो पश्चिमी व सुन्नी राज्यों से छद्म युद्धों में लिप्त है।

सऊदी अरब में मोहम्मद बिन सलमान के आधुनिकीकरण के प्रयासों के बावजूद मजहबी गुरु मजबूत हैं और इसकी संभावना को नकारा नहीं जा सकता कि सऊदी राजसी परिवार का तख्ता पलट करने के लिए ओसामा बिन लादेन जैसी कोई ताकत जन्म लेकर गल्फ राज्यों का एक छोटा खलीफा बन जाए।

इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थल इसी क्षेत्र में है और इसलिए सऊदी खलीफा की संभावना प्रबल है। अफगानिस्तान में एक और लघु खलीफा या अमीरात होगा क्योंकि अमेरिकी लौट गए हैं। तुर्की में एर्दोगन ने स्वयं को फिलिस्तीन समेत हर जगह पर इस्लामी हितों का रक्षक बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। निस्संदेह वे स्वयं को खलीफा सामग्री मानते हैं।

तुर्की में उन्होंने स्वयं को सभी शक्तियों से लैस कर लिया है जैसे न्यायपालिका समेत शीर्ष सार्वजनिक अधिकारियों की नियुक्ति। एर्दोगन के पूर्व मुख्य सलाहकार, सेवानिवृत्त जनरल अदन तानरिवर्दी एक इस्लामी स्वप्न देख रहे हैं जहाँ 61 इस्लामी देश एक शरिया-आधारित महासंघ बनाएँ जिसकी राजधानी इस्तानबुल हो।

विचार है कि इस्लाम को एक सुपरपावर बनाया जाए जो किसी पश्चिमी या किसी भी शक्ति के आगे न झुके। विश्व को अब पाँच छोटे खलीफाओं से निपटना है, हर एक का अपना एजेंडा, अपने शत्रु हैं लेकिन जो उन्हें बांधे रखता है, वह है काफिर-शासित राष्ट्रों से घृणा। भारत के पास चिंता करने के लिए काफी कुछ है।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। वे @TheJaggi के माध्यम से ट्वीट करते हैं। अंग्रेज़ी से हिंदी अनुवाद निष्ठा अनुश्री द्वारा।