विचार
बलात्कार कानूनों पर एक नज़र- दिल्ली में झूठे आरोप में फसाने का एक मामला

प्रसंग
  • दिल्ली गुदामैथुन मामले से यह बात पता चलती है कि यौन हिंसा से पीड़ित नाबालिग या वयस्क पुरुषों को उनके अपराधियों के द्वारा बलात्कार के झूठे मामलों में फंसाया जाता है।

नई दिल्ली में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसमें एक 19 वर्षीय छात्र का एक पुरुष द्वारा कई महीनों से यौन उत्पीड़न किया जा रहा था। आखिरकार जब पीड़ित छात्र ने इसके खिलाफ अपनी आवाज उठाई तो, कथित तौर पर, अपराधी ने उसे एक झूठे बलात्कार के मामले में फंसा दिया।

पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट के तहत नामित छात्र फिलहाल जमानत पर रिहा है। छात्र के 58 वर्षीय यौन उत्पीड़नकर्ता पर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। अप्राकृतिक अपराधों से संबंधित इस कानून को हाल ही में सहमत वयस्कों के लिए अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया था।

पीड़ित अनुपम (काल्पनिक नाम) पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार का रहने वाला है। 9 नवंबर 2018 को दर्ज की गई प्राथमिकी (जिसकी एक प्रति स्वराज्य के पास है) में उसका विस्तृत बयान तब से उसके कठोर उत्पीड़न की कहानी बयां करता है जब वह इस साल मार्च में उत्पीड़नकर्ता से पहली बार मिला था।

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उस समय अनुपम 12वीं कक्षा का छात्र था। उसके घर के पास में ही सड़क पर दोनों की मुलाकात हुई थी। अनुपम ने “फादर” (पादरी) से उसका नाम पूछा, जिसके लिए उसने जवाब दिया जॉन (कुछ अखबारों ने हिंदी से अनुवाद करके उसका नाम ‘Jon‘ लिखा है)। अनुपम ने उससे पूछा कि वह किस चर्च में जाता है, जिसके लिए उसने जवाब दिया कि वह एक ‘फादर’ (पादरी) नहीं है लेकिन वह एक गैर-सरकारी संगठन चलाता है जो मानव तस्करी के क्षेत्र में काम करता है। जब अनुपम ने बताया कि वह एक चर्च में पियानो बजाता था, तो जॉन ने उससे कहा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो उसके तीन बच्चों को पियानो सिखा दे और उसने अनुपम को अपना फोन नंबर और घर का पता दे दिया।

अनुपम अपने बयान में आगे कहता है कि कुछ दिनों के बाद वह जॉन के घर गया और वहाँ देखा कि जॉन अपने दो नौकरों, उनकी पत्नियों और बच्चों के साथ रहता था। अनुपम ने कुछ दिनों तक बच्चों को पियानो बजाना सिखाया लेकिन 12वीं की परीक्षा शुरू हो जाने के कारण सिखाना बंद कर दिया। जुलाई में अनुपम का कॉलेज फिर से शुरू हो गया और उसने जॉन के घर जाना फिर से शुरू कर दिया।

जॉन तस्करी के अपने मामलों के बारे में अनुपम को बताता था और 3 अगस्त को जॉन उसको एनजीओ में शामिल कर लिया (प्राथमिकी में उसके एनजीओ का नाम ‘For the WCAR’ बताया गया है लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे ‘For the We‘ बताया है)। जल्द ही, जॉन ने उसको फेसबुक और व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने से रोक दिया और उसको गैर-शाकाहारी भोजन करने से भी मना कर दिया तथा एक “आध्यात्मिक दस्तावेज” पर उसके हस्ताक्षर ले लिए।

उसके बाद जॉन ने अनुपम से कहा कि अब से वह उसको ओला से आने के लिए प्रतिदिन पैसे देगा और वह उससे बहुत प्यार करता है। अनुपम ने उससे कहा कि वह भी उससे प्यार करता है लेकिन उसी तरह से जिस तरह से वह अपने माता-पिता से करता है। उसके बाद जॉन उसको प्यार भरे संदेश भेजने लगा और अगर वह उसके संदेशों का जवाब न देता तो जॉन उसको डांटता था।

उसने अनुपम से कह दिया कि वह अपने किसी दोस्त से बात न करे और जबरदस्ती करके उसका दूसरा फोन नंबर ले लिया और बताया कि यह सब उसकी “भलाई” के लिए है।

जॉन ने उसको धमकाना शुरू कर दिया कि उसके पास अनुपम के खिलाफ “सबूत” हैं और वह सीबीआई और दिल्ली पुलिस के लिए काम करता था। उसने अनुपम को गालियाँ दीं और उसको धमकी दी कि वह पॉक्सो अधिनियम के तहत उसके दोस्तों को जेल करवाएगा।

एफआईआर में आगे कहा गया है कि जॉन ने जबरन उससे एक बयान पर हस्ताक्षर करवा लिए जिसमें कहा गया था कि उसने एक पुरूष मित्र के साथ यौन संबंध बनाए थे और उसके साथ अश्लील सामग्री साझा की थी। उसने अनुपम को यह धमकी भी दी कि अगर वह उसके पास नहीं आता है तो वह एक साथी छात्रा के साथ यौन संबंध रखने के आरोप में पॉक्सो अधिनियम के तहत उसको जेल भिजवा देगा। इसलिए न चाहते हुए भी अनुपम ने जॉन के पास जाना जारी रखा।

एक दिन जॉन ने “उसे चिपटा लिया और नीचे गिरा दिया” और उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। जब अनुपम ने विरोधी लहजे से उससे कहा कि वह इस तरह का इंसान नहीं है और उसे जाने दिया जाए तो जॉन ने कथित तौर पर उसकी जिंदगी बर्बाद करने की धमकी दी।

एक अन्य मौके पर, जॉन ने उससे कहा कि अगर कोई किसी से बहुत ज्यादा प्यार करता है तो यौन इच्छा होना स्वाभाविक है। जब अनुपम ने उससे उसे छोड़ने की विनती कि तो जॉन ने उसे फिर से नीचे कर दिया और गलत तरीके से उसको छुआ तथा उसके साथ यौन संबंध बनाने की इच्छा जताई।

जब अनुपम ने उससे कहा कि वह अपने माता-पिता को सब कुछ बताने जा रहा है तो जॉन ने उसे मुक्का मारा, गाली दी और बंधक बनाकर पिटाई की। उसने अनुपम को यह भी धमकी दी कि अगर उसने किसी को कुछ भी बताया तो वह उसको कॉलेज से निकलवा देगा।

अनुपम ने अपने बयान में आगे कहा कि जॉन जल्द ही उसके घर आया और उसको बिस्तर पर धक्का दिया फिर उसके साथ यौन सम्बन्ध बनाये।

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आखिरकार, अनुपम ने अपनी माँ को पिछले दो महीनों में हुई हर घटना के बारे में बताया, जिसके बाद जॉन ने न केवल माँ और बेटे दोनों को जेल पहुँचाने की धमकी दी बल्कि उसका विरोध करने उसके कॉलेज भी पहुँच गया।

उसी समय अनुपम के परिवार से अपरिचित, एक पांच वर्षीय लड़की के माता-पिता ने कमला मार्केट पुलिस स्टेशन (अनुपम के घर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित दिल्ली का एक इलाका) में अनुपम के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया। 5 नवंबर को पुलिस ने अनुपम को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया।

अनुपम की गिरफ्तारी के बाद उसके माता-पिता कल्याणपुरी पुलिस थाने में यह बताने के लिए गए कि उनके बेटे को झूठे मामले में फंसाया गया है। प्रोडक्शन वारंट पर जेल से बाहर लाने के बाद अनुपम का बयान दर्ज किया गया। कल्याणपुरी पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी ने स्वराज्य को बताया कि अनुपम को सेमेस्टर परीक्षा देने के लिए जमानत दी गई थी।

अनुपम की एफआईआर के बाद, जॉन को पिछले हफ्ते 22 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। धारा 377 के अलावा, धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

अनुपम के पड़ोसियों ने स्वराज्य को बताया कि परिवार कुछ समय के लिए अपने किराए के मकान को छोड़कर दिल्ली में कहीं और रहने लगा है। एक महिला पड़ोसी ने कहा, “हमने उसे (अनुपम को) आखिरी बार तब देखा था जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने आई थी, यही कोई दिवाली के आसपास। हमने सुना कि उसे जमानत मिल गई है, लेकिन वह गिरफ्तारी के बाद वापस नहीं आया है।” उन्होंने कहा कि उन्होंने “फादर जॉन, जो हमेशा एक सफेद कुर्ता पायजामा पहनते हैं”, को कई बार घर पर आते-जाते देखा था लेकिन इसके अलावा उन्हें कोई अन्य जानकारी नहीं थी। पड़ोसियों ने कहा कि परिवार “बेहद विनम्र” था और उनसे कभी कोई परेशानी उत्पन्न नहीं हुई।

जहाँ जॉन रहता था उस फ्लैट के मकान मालिक विजेंदर कुमार ने स्वराज्य को बताया कि वह खुश हैं और मामले के लिए धन्यवाद, उन्हें उनके किराएदार से छुटकारा मिल गया। उन्होंने बताया कि चार-पाँच साल पहले उन्होंने दो लोगों – गंगाराम और राजेश कुमार – को मकान किराए पर दिया था जो खुद को भाई-भाई बताते थे।

उन्होंने बताया, “पुरुष अपने परिवारों के साथ रहते थे। लगभग एक साल पहले यह फादर जॉन उनके साथ रहने के लिए आया था। सच्चाई यह है कि पिछले छः महीनों से जॉन मुझे चेक के माध्यम से किराया दे रहा था ।”

कुमार ने बताया कि उनके कई चेक बाउंस हुए लेकिन जब उन्होंने जॉन से इस मामले पर बात की तो उसने पुलिस और जेल की धमकी दी। विजेंदर कुमार ने यह भी बताया कि उन्होंने प्रायः जॉन द्वारा बच्चों को फ्लैट में लाते हुए देखा था जिस पर जॉन का कहना था कि इन बच्चों को बचाया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें कभी भी कुछ भी संदिग्ध महसूस हुआ है, विजेंदर ने बताया कि उन्होंने ऐसा कुछ अनुभव नहीं किया और उन्हें केवल किराए की ही चिंता थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस जांच-पड़ताल कर रही है कि जॉन और भी यौन अपराधों में शामिल है या नहीं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अनुपम पर बलात्कार के मामले की जाँच से पता चला है कि उसे फंसाया गया था और पुलिस अधिकारी झूठी एफआईआर रद्द करने पर विचाराधीन हैं। बलात्कार का मामला दर्ज कराने वाले नाबालिग लड़की के माता-पिता जॉन के एनजीओ के सदस्य हैं।

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जबकि ऐसा लगता है कि पीड़ित को बलात्कार के मामले में राहत मिलेगी, वहीं ऐसी घटनाएं, जहाँ यौन उत्पीड़न से पीड़ित नाबालिग या वयस्क व्यक्तियों को अपराधियों द्वारा झूठे बलात्कार के मामलों में फंसा दिया जाता है, नियमित रूप से मीडिया की सुर्ख़ियों में बनी रहती हैं।

दीपिका नारायण भारद्वाज, जो एक डाक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता हैं और पुरुषों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती हैं, ने स्वराज्य को बताया कि यूपी में एक ऐसा मामला है जिसमें एक बुजुर्ग महिला ने एक नाबालिग लड़के के साथ बलात्कार किया और उसका यौन शोषण किया। उस लड़के ने आत्महत्या कर ली क्योंकि महिला ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने किसी से कहा तो वह उसे बलात्कार के मामले में फंसा देगी।

उन्होंने बताया, “यह मामला (अनुपम का) इसका एक विचित्र उदाहरण है कि कैसे पीड़ितों पर ही कलंक लगा दिया जाता है और उन्हें अपराधियों के रूप में दंडित किया जाता है। पुरुषों को न्याय दिलाने के लिए हमें लिंग-निष्पक्ष बलात्कार कानूनों की जरूरत है।”

हालाँकि यह चर्चा का विषय है लेकिन यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय कानून पुरुषों के यौन उत्पीड़न या बलात्कार को पहचान नहीं देते हैं। जबकि नाबालिग लड़कों को पाक्सो एक्ट के तहत कवर किया जाता है, वहीं वयस्क पुरुषों को गुदामैथुन का मामला दर्ज करने के लिए केवल धारा 377 का ही सहारा होता है और मामला पूरी तरह से सहमति के सिद्धांत पर आधारित होता है।

कानून ने पुरुषों को अपनी बेगुनाही और उन पर किये गए हमले को साबित करने के लिए उन पर बोझ डाला है। अनुपम जैसे मामलों में ये दोनों ही बोझ सामने आते हैं।

स्वाती गोयल शर्मा स्वराज्य की एक वरिष्ठ संपादक हैं। वह @swati_gs पर ट्वीट करती हैं।

मधुर शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। वह @madhur_mrt पर ट्वीट करते हैं।

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