विचार
भारत के साझे इतिहास-संस्कृति से बंधे हम स्वतंत्रता दिवस पर इसकी रक्षा का प्रण लें

उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्ष तद्भारतं नाम भारती यत्र संतति॥
विष्णु पुराण, 1100 ईसा पूर्व

(जो समुद्र के उत्तर में है, और हिमालय के दक्षिण में, उसी राष्ट्र का नाम भारत है एवं उसकी संतानों का नाम भारतीय है।)

भारत क्या है? एक भू-भाग, धरती का एक हिस्सा? व्यक्तियों का एक समूह? एक राष्ट्र होता क्या है?

अंग्रेज़ी फ़िल्म ग्लेडिएटर में रोमन सम्राट अपने पुत्र को बताते हैं कि रोम क्या है? वे कहते हैं- “रोम एक विचार है, एक अत्यंत ही नाज़ुक विचार, हम जिसे सिर्फ़ साँसों मे पुकार सकते हैं, एक नाज़ुक विचार जो तेज़ आवाज़ से भी तड़क सकता है।”

यह परिभाषा भारत के लिए भी सत्य है, हर उस राष्ट्र के लिए सत्य है, जो एक वैचारिक ऐक्य पर आधारित है। इस वैचारिक साम्यता को हम धर्म भी कहते हैं, या अंग्रेज़ी मे इंडियन इथोस भी। यही वैचारिक धागा भारतीयों को, सागर के उत्तर से हिमालय के दक्षिण तक बसने वाले व्यक्तियों को जोड़ता है। इसीसे प्रेरित शंकर केरल से हिमालय जाकर केदारनाथ की स्थापना करते हैं, और ऋषि अगस्त्य दक्षिण जा कर तमिल व्याकरण की रचना करते हैं।

वर्तमान राजनीति हमें बाँटने का प्रयास करती है, क्षेत्र और भाषा में। क्योंकि कुछ नेता विचारों मे विस्तृत नहीं होते। भारत के एक होने का कारण ही इसका एक विचार पर आधारित होना था। इसी कारण जब भारत विभिन्न राजाओं की सत्ता मे बँटा था, धर्म समान था और वशिष्ठ एवं विश्वामित्र एक शासक से दूसरे शासक तक सम्मानित थे। यह भारतीय धर्म मानवीय मूल्यों पर आधारित है। भारत सत्य पर आधारित है। क्योंकि सत्य सार्वभौमिक है, यह हमें जोड़े रखता है।

यह उत्तर के बिस्मिल का शीष महाराष्ट्र के तिलक के चरणों पर झुका देता है। यह धर्म एवं संप्रदाय से इतर है। यह अशफ़ाक़ के होंठों पर वंदे मातरम् रखता है जिसे लेकर वे मृत्यु की वेदी पर चढ़ जाते हैं। भारत एक सर्वत्र-समरूप विस्तृत विचार है। परंतु यह भी रोम की भाँति एक अत्यंत ही सुकुमार सोच है, शीघ्र-भंगुर है।

प्रत्येक कुटिल विचार जो इसे काटता और बाँटता है, इसका शत्रु है। आज धारा 370 के जाने के बाद, विष्णु पुराण की परिकल्पना पुनर्जीवित होकर दोबारा हिमालय से सागर तट तक भारत को एक सूत्र मे बांधती है। एक साझे इतिहास, एक साझी संस्कृति से बंधे हम आज इसकी रक्षा का प्रण लें, यही हमारा कर्तव्य है। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ। वंदे मातरम्।