विचार
पेटा इंडिया की करनी-कथनी में अंतर, वीगनवाद का प्रचार मांसाहारियों से क्यों?
Harshil Mehta - 22nd July 2020

पेटा इंडिया आजकल सोशल मीडिया पर अपने रक्षाबंधन पर चर्म मुक्त होने की सलाह देने वाले पोस्टर की वजह से चर्चा में है। बहुत सारे ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने पेटा की दोमुँही बातों को, उससे संबंधित कथित हिंसा को और जुड़े हुए रहस्यों को #PetaIndiaExposed के तहत उजागर करने के प्रयत्न किए हैं। कुछ लोगों ने पेटा के डबल स्टैंडर्ड पर गंभीर प्रश्न भी खड़े किए हैं।

पेटा अर्थात् “पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स” यानि “पशुओं के नैतिक वर्तन के पक्षधर मनुष्य”। इस संस्था की स्थापना 1980 में हुई और उसका मुख्यालय अमरीका के वर्जीनिया में स्थित है। विश्व के कई देशों में पेटा के स्वयंसेवकों तथा समर्थकों का समूह सक्रिय है जो कि वीगनवाद यानी पशुओं से जुड़े उत्पाद (जैसे की मांस, दूध, चर्म) के बहिष्कार को बढ़ावा देता है। ऐसा ही एक समूह “पेटा इंडिया” भारत में भी सक्रिय है।

कई संस्थाओं की तरह पेटा भी अपने एजेंडा को चलाने के लिए बॉलीवुड के सितारों, खिलाड़ियों तथा अन्य प्रख्यात लोगों का सहारा लेता है। पेटा उनको “हीरो टू एनिमल्स” तथा “हॉट वेज सेलेब” जैसे पुरस्कारों से सन्मानित करता है और उनको पशुओं के लिए आवाज़ उठाने के लिए प्रमाण-पत्र भी देता है।

कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति या संस्था की कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर रहता है। बातें कुछ अलग की जाती हैं जबकि व्यवहार में कुछ और लाया जाता है। शायद पेटा के मामले में भी कुछ ऐसा ही है।

पेटा ने 2015 में बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और अभिनेता आमिर खान को “हॉटेस्ट वेजिटेरिअन” का पुरस्कार दिया। “आमिर और अनुष्का स्वस्थ शाकाहारी के उत्तम उदाहरण हैं। वनस्पति आधारित खुराक के माध्यम से वो अपने लाखों चाहकों को प्रेरणा देतें हैं,” पेटा ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में ऐसा कहा।

लेकिन मिडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शाकाहार के लिए पुरस्कार जितने के बाद भी अनुष्का शर्मा शाकाहारी नहीं थीं। 2016 में एक्सप्रेस फूडी  को दिए गए साक्षात्कार में अनुष्का शर्मा ने कहा कि वे मांस, मछली और अंडों का सेवन करतीं हैं। इतना ही नहीं अपितु शर्मा ने यह तक कहा कि “अंडों के अलावा मछली उनका सबसे प्रिय भोजन है” और उन्होंने “विचित्र भोजन जैसे सांप के मांस का सेवन भी किया है।” प्रश्न उठता है कि क्या पेटा द्वारा दिया गया पुरस्कार झूठा या सिर्फ स्व-प्रसिद्धि के लिए था?

पेटा बहुत सारे लोगों को “#HottestVegCeleb” का विजेता बनने के लिए नामांकित करता है। 2015 में ही पेटा ने शिल्पा शेट्टी को उसके लिए नामांकित किया और अपने ट्विट्टर से उसका प्रचार भी किया। लेकिन शिल्पा शेट्टी के यूट्यूब चैनल पर चिकन पुलाव, जीरा चिकन, चिकन सलाद और कुंग पाओ चिकन बनाने का सिखाते हुए कई सारे वीडियो उपलब्ध हैं। 2017 में मीडिया के साथ शिल्पा शेट्टी ने ईद मनाते हुए चिकन खाया था।

ऐसा ही एक और नाम नेहा धूपिया का भी है, जिन्हें पेटा ने उसी स्पर्धा के लिए उसी वर्ष नामांकित किया था। हैरानी की बात यह है कि “शाकाहारी” नेहा धूपिया तो 2018 में द टेलीग्राफ  को इंटरव्यू देते समय भी चिकन और चावल के बारे में सोच रहीं थीं। स्वाभाविक प्रश्न है कि क्या पेटा को सच में उनके बारे में जानकारी नहीं थी या फिर यह एक पब्लिसिटी स्टंट था?

कॉकफाइटिंग यानि मुर्गों की लड़ाई रोकने के लिए पेटा सक्रिय है और उसके लिए फोटोशूट करवाता है। 2014 में टेनिस के खिलाड़ी रोहन बोपन्ना का पेटा ने ऐसा एक फोटोशूट करवाया जिसका कैप्शन दिया, “टेनिस रमत है, कोकफाइटिंग नहीं।” वहीं रोहन बोपन्ना बैंगलोर मिरर  को 2015 में बतातें हैं कि वह “मुर्गे को सामान्य तौर से सफ़ेद या भूरे चावल के साथ” खातें हैं। तो क्या ऐसा है कि बोपन्ना सिर्फ मुर्गों की लड़ाई के विरुद्ध हैं पर उनको खाने के विरुद्ध नहीं?

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पेटा के लिए फोटोशूट करवाते हुए बोपन्ना

पेटा “हीरो टू एनिमल्स” के लिए प्रमाण-पत्र भी जारी करता है। पेटा ने पशुओं के लिए काम करने का प्रमाण-पत्र रानी मुखर्जी को दिया गया है जिनका प्रिय भोजन मछेर झोल भात  (मछली की सब्जी) है; और ऐन्द्रिता रॉय को भी दिया है जो कि केकड़ों का भोजन करतीं हैं।

पेटा इंडिया एक तरफ से वीगनवाद का प्रचार करता है पर उसी प्रचार के लिए मांसाहारियों का सहारा लेता है। क्या पेटा इंडिया को समग्र भारत में से वीगन लोग मिल नहीं रहे जिनका उदाहरण वह प्रस्तुत कर सके या फिर पेटा सितारों के माध्यम से सिर्फ सुर्खियाँ बटोरना चाहता है? संस्था की तरफ से तो संपूर्ण भारत को सलाह मिलती है कि वीगन बनना चाहिए तो फिर क्यों पेटा अपने प्रचारकों को मनाने में अक्षम है?

हर्षिल महेता एक विद्युत अभियंतास्तंभ-लेखक और राजनीतिक समीक्षक हैं। वे @MehHarshil के माध्यम से ट्वीट करते हैं।