विचार
स्वस्थ बनाता इंद्रधनुष- भारत की टीकाकरण योजना विश्व के श्रेष्ठ प्रयासों में से एक
आशुचित्र- जिन बीमारियों से बचाव टीका द्वारा हो सकता है, उनसे किसी की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से इस स्वप्न को वास्तविकता के धरातल पर उतारा जा रहा है।
 
2014 में सरकार ने मिशन इन्द्रधनुष (एमआई) लॉन्च किया गया ताकि सबसे कमज़ोर और दुर्गम समुदायों तक पहुँच बनाकर भारत के टीकाकरण के क्षेत्र को बढ़ाया जाए। अप्रैल 2015 और जुलाई 2017 के बीच कार्यक्रम के तहत 2.5 करोड़ से अधिक बच्चों और लगभग 70 लाख गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया गया। परिणामस्वरूप कार्यक्रम के शुरुआती दो चरणों के बाद पूर्ण टीकाकरण क्षेत्र में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 2009 और 2013 के बीच इसमें केवल 1 प्रतिशत की वृद्धि ही हुई थी।
अधिक ध्यान देने वाले क्षेत्रों में प्रगति को और तेज़ करने और 90 प्रतिशत पूर्ण टीकाकरण क्षेत्र को हासिल करने के लिए अक्टूबर 2017 में इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुश (आईएमआई) की शुरुआत की गई। आईएमआई ने एमआई के अंतर्गत प्रगति को बनाए रखा और अतिरिक्त रणनीति को विकसित किया जैसे की स्वास्थ्य से परे क्षेत्रों को भी शामिल करना और आबादी के अंतिम छोर तक जहाँ सर्वाधिक जोखिम है वहाँ तक पहुँचना।
टीकाकरण ने देश के सर्वोच्च राजनीतिक कार्यालय का भी ध्यान आकर्षित किया और प्रधानमंत्री ने खुद सभी मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें अपने राज्यों में 90 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने पर ज़ोर देने के साथ-साथ समीक्षा बैठकों में भी भाग लेने का काम किया। महत्त्वपूर्ण रूप से सरकारी मंत्रालयों जो स्वास्थ्य से परे हैं उनकी भी भूमिकाओं और ज़िम्मेदारियाँ को तय किया गया। इनमें पंचायती राज, महिला और बाल विकास, मानव संसाधन विकास और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय शामिल थे। रक्षा और रेलवे जैसे अन्य मंत्रालयों ने आपूर्ति करने और टीकों के वितरण के लिए अलग अलग माध्यमों से विस्तार करने में मदद किया।
सात चरणों वाली एक स्पष्ट कार्यान्वयन प्रक्रिया विकसित की गई। प्रत्येक स्तर पर कर्मचारियों को मतलब भर का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। हालांकि जिलों ने कार्यक्रम के प्रबंधन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हर जिले ने एक कार्यान्वयन योजना तैयार की जो उसके स्थानीय संदर्भ के अनुकूल हो। भारत जैसे बड़े और विविध देश के लिए जिसमें अंतर और भीतरी राज्य में असमानता हो वहाँ ऐसा दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है। जिला मजिस्ट्रेट और टीकाकरण अधिकारी स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों से संसाधन जुटाने तथा सामुदायिक मांग को बढ़ाने और संचार के माध्यम से टीकाकरण को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार थे। जिला स्तर पर टास्क फोर्स ने विभिन्न क्षेत्रों में हितधारकों की भागीदारी को उत्प्रेरित करने में सहायता की। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं सहित क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को अपने क्षेत्र के सभी घरों को सूचीबद्ध करने का काम सौंपा गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लक्ष्य समूह में कोई भी बच्चा या गर्भवती महिला छूटे न हों। क्षेत्र श्रमिकों के बीच नियमित रूप से बातचीत ने कार्यान्वयन में अधिक तालमेल और दक्षता हासिल करने में मदद की।
कार्यक्रम के हर चरण में डाटा का उपयोग किया गया ताकि अधिक ध्यान देने वाले क्षेत्रों की पहचान से लेकर कार्य प्रगति तक पर निगरानी रखी जा सके। विभिन्न तरीकों के उपयोग से डाटा को मान्य किया गया। आईएमआई ने उन जिलों और शहरी क्षेत्रों को लक्षित किया जहाँ डिप्थीरिया, टेटनस, पर्टुसिस 3 (डीपीटी 3) की व्यप्ति 70 प्रतिशत से कम थी या पिछले वर्ष में कम से कम 13,000 बच्चे डीपीटी 3 से चूक गए थे। प्रत्येक गर्भवती महिला और पाँच वर्ष की आयु तक के हर बच्चे तक पहुँचने का प्रयास किया गया, वहीं यह भी सुनिश्चित किया गया कि दो वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को पूरी तरह से टीका लग गया है।
डाटा को मोबाइल फोन पर ई-डैशबोर्ड में भी फीड किया गया जिससे टीकाकरण डाटा को वास्तविक समय के आधार पर इकट्ठा किया जा सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के द्वारा घरेलू क्षेत्रों का आकलन करने के लिए जनसंख्या आधारित सर्वेक्षण किया गया। इसके अलावा लक्षित समूहों के दृष्टिकोण को जानने के लिए और कम-टीका वाले बच्चों के कुछ नमूनों पर बाहरी नज़र भी रखी गई ।
कार्यक्रम की कार्यान्वयन रणनीति का एक अन्य केंद्रीय स्तंभ स्थानीय समुदाय को टीकाकरण के महत्त्व के बारे में बताना एवं किसी भी दुष्प्रभाव के प्रबंधन के साथ-साथ प्रचलित मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने के बारे में सूचित करके उन्हें जुटाना था। क्षेत्र कार्यकर्ताओं ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक नेताओं, धार्मिक नेताओं, माताओं के समूहों, केमिस्टों और राशन डीलरों सहित सरकार के भीतर और बाहर कई हितधारकों को शामिल करके लोगों में इस स्वास्थ्य शिक्षा का प्रचार किया। जनआंदोलन के रूप में टीकाकरण करने का प्रयास एक रणनीतिक कदम है जिसे अब पोशन अभियान द्वारा भी अपनाया जा रहा है।
तो अब आगे का रास्ता क्या है?
एमआई और आईएमआई की सफलता इस तथ्य में निहित है कि उन्होंने कोई नया काम नहीं किया है बल्कि उन्होंने पोलियो के खिलाफ भारत की सफल लड़ाई से सीखे बुनियादी ढाँचे और सबक का लाभ उठाया और उसे ही आगे इस्तेमाल किया। इसी तरह आगे बढ़ते हुए हमें इन कार्यक्रमों के सबक को अपनी नियमित टीकाकरण प्रणाली में शामिल करना चाहिए और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिन्हें मजबूत करने की आवश्यकता है।
उदाहरण के लिए अक्टूबर 2017 और फरवरी 2018 के बीच किए गए साक्षात्कारों से पता चला है कि अपर्याप्त टीकाकरण वाले बच्चों की देखभाल करने वालों के साथ जागरूकता की कमी, इसके दुष्प्रभावों और टीकों के प्रतिरोध के बारे में चिंताएँ सार्वभौमिक टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्त्वपूर्ण चुनौतियाँ रहीं हैं।
इस प्रकार जहाँ एमआई और आईएमआई ने टीकाकरण ने समुदाय के बीच विश्वास को बढ़ाने में मदद मिली है वहीं गहन लामबंदी को मार्ग टीकाकरण प्रणाली के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता है। पोषण माह जैसे मंच को भी प्रभावी रूप से उसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सितंबर 2018 में पहला राष्ट्रीय पोष माह मनाया गया। यह 32 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँचा जिसमें प्रसवपूर्व की देखभाल, एनीमिया, विकास निगरानी, ​​लड़कियों की शादी में देरी की और स्वच्छता के लिए संदेश शामिल थे। माह के दौरान 33 लाख से अधिक सामुदायिक-आधारित गतिविधियाँ आयोजित की गईं जिनमें पोषण मेल, सास बहू सम्मलेन और हाथ धोने का प्रदर्शन शामिल था।
जैसा कि नीति आयोग की ‘स्ट्रैटेजी फ़ॉर न्यू इंडिया @ 75’ में सिफारिश किया गया है कि रोटा वायरस और न्यूमोकोकल जैसी खतरनाक वायरस से अधिक ध्यान वाले क्षेत्रों में उनसे प्राथमिकता से लड़ने की आवश्यकता है। जिला स्तर पर क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता है विशेष रूप से क्षेत्र श्रमिकों द्वारा घरेलू क्षेत्र की सूचीबद्ध करना, सामाजिक गतिशीलता और स्वास्थ्य क्षेत्र से परे हितधारकों को शामिल करना। टीकाकरण स्थलों के विस्तार और लाभार्थियों की उपस्थिति के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए शौचालयों जैसे पर्याप्त बुनियादी ढांचे को सुनिश्चित करने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
एमआई और आईएमआई के तहत हासिल की गई प्रगति शानदार रही है। यह महत्वपूर्ण है कि इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान के अत्यधिक सफल कार्यान्वयन से सीखे गए पाठों को नियमित टीकाकरण प्रणाली में शामिल किया गया है। डेटा-चालित जोखिम की मैपिंग, सूक्ष्मस्तरीय योजना, हर स्तर पर क्षमता का विकास, व्यवस्थित बहु-क्षेत्रीय जुड़ाव और सामाजिक गतिशीलता पर निरंतर ध्यान देने के साथ हम निश्चित रूप से अभूतपूर्व उपलब्धि को दोहराने में सक्षम होंगे जैसा कि हमने पोलियो के साथ किया था।टीका निरोधसक बिमारियों से एक भी ज़िन्दगी को जान से हाथ न धोना पड़े । मिशन इन्द्रधनुष की शुरूआत के साथ हम एक ऐसे रास्ते पर खड़े हो गए हैं जहां यह सपना अंततः एक वास्तविकता बन सकता है।
अस्वीकरण: व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं।
उर्वशी नीति आयोग में वाइस चेयरमैन के पद पर काम करती हैं।