विचार
योगी आदित्यनाथ-मोदी विकास कार्यों के बावजूद क्यों नहीं जँचते लुटियंस सिंडीकेट को

हिंदुस्‍तान और उत्तर प्रदेश की बदलती तस्‍वीर उन चेहरों को बुरी तरह परेशान कर रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से हद दर्जे की घृणा करते रहे हैं। मोदी-योगी की कार्यशैली लुटियंस ज़ोन के उस ताकतवर सिंडिकेट को कभी रास नहीं आई, जो दूसरी सरकारों के दौर में समानांतर सत्ता का संचालन करते थे।

केंद्र और राज्‍यों में मंत्री बनवाने से लेकर मंत्रालय दिलवाने तक में उनका सीधा दखल होता था। हालाँकि, पिछले छह वर्षों में मोदी ने लुटियंस की यह ताकत छीन ली है। अब मंत्री बनवाने की कौन कहे, इस लुटियंस को यह तक पता नहीं चलता कि मंत्री बन कौन रहा है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ भी मोदी के पदचिह्नों पर चल रहे हैं, तो ज़ाहिर है कि नरेंद्र मोदी के लिये हत्‍यारा समेत हर बुरे शब्‍द का प्रयोग करने वाले लोगों के निशाने पर अब योगी और उत्तर प्रदेश है, क्‍योंकि अगले वर्ष यहाँ चुनाव होने वाले हैं। लुटियंस के लिहाज से यही सही समय है, जब योगी और उत्तर प्रदेश पर सीधा हमला बोलकर अपने चहेतों को बढ़त दिलवाने के सपने पाले जा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में वह दौर अब बहुत पीछे जा चुका है, जब खनन में मनमानी करने वाले आईएएस अधिकारी बख्‍श दिए जाते थे और भ्रष्टाचार करने वाले आईपीएस छोड़ दिए जाते थे। अब मनमानी-भ्रष्‍टाचार करने पर आईपीएस अधिकारियों को भी फरारी काटनी पड़ती है और आईएएस अधिकारियों को निलंबित होना पड़ता है।

भला ऐसा भेदभाव-विहीन दौर, उन ताकतवर लोगों को कैसे रास आएगा, जो अधिकारियों की सारी गलतियों का ‘प्रबंधन’ करा देने की ताकत रखते थे! बदले में अधिकारी उनके प्रति कर्तव्य-निष्ठ होते थे। राज्‍य में होने वाले निर्माण कार्यों में अपनी चहेती कंपनियों और व्‍यक्तियों को लाभ दिलवाते थे। इन निर्माणों से लाभ केवल मुट्ठीभर लोगों को होता था और संसाधन प्रदेश के नागरिकों के हिस्‍से का खत्‍म होता था।

योगी सरकार ने इस परिपाटी को बदलकर उन कामों पर ध्यान दिया, जिससे मुट्ठी भर अमीर लोगों की सुविधा बढ़ने की बजाय मध्‍यम वर्ग, गरीब, मजदूर और किसानों के बड़े तबके को लाभ पहुँचे, साथ ही स्‍थानीय स्‍तर पर रोजगार भी पैदा हो सके।

योगी ने लखनऊ, नोएडा जैसे महानगरों में चंद लोगों के लिए कुछ इमारतें बनाने एवं सुविधाएँ जुटाने की बजाय पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे उन पिछड़े एवं गरीब क्षेत्रों पर ध्यान दिया, जिनकी नियति ही पलायन और प्रवासी बनना रह गया था और यह क्षेत्र किसी भी दूसरी सरकार के प्राथमिक एजेंडे में नहीं था।

योगी ने सबसे पहले गोरखपुर एवं आसपास के जिलों में महामारी का रूप लेने वाले जापानी इंसेफलाइटिस को जड़ से उखाड़ फेंकने में संसाधन एवं ऊर्जा झोंक दी, जो प्रत्‍येक साल सहस्रों परिवारों की खुशियाँ छीनने के साथ राज्‍य के भविष्‍य को भी तहस-नहस कर रहा था। इस बीमारी से निजात मिलने की खुशी पूर्वांचल के वे लाखों परिवार समझ सकते हैं, जिनके बच्‍चों को इस महामारी ने असमय निगल लिया है।

यह सुख और प्रसन्नता उन लुटियंस को कतई समझ नहीं आएगी, जो मानव संपदा से ज्‍यादा भवनों और सड़कों को ही विकास का असली पैमाना मानते हैं। इस बीमारी से निजात दिलाने के बाद उप्र सरकार ने इंफ्राट्रक्‍चर पर ध्यान दिया। गोरखपुर में एम्‍स प्रारंभ कराने के बाद पूर्वांचल के सभी जिलों को सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों का उपहार मिला, जो स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का विस्‍तार करने के साथ ढाँचागत विकास को रफ्तार देगा।

योगी ने चीनी मिलों को बेचने, पार्क और बिल्डिंग में संसाधन झोंकने की बजाय मुंडेरवा तथा पिपचाराइच जैसी चीनी मिलों का पुनर्रुद्धार कराना अधिक आवश्यक समझा, जिसका सीधा साभ सहस्रों किसानों एवं आसपास के तमाम लोगों को हुआ। प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से लोगों को रोजगार मिला।

पूर्वांचल एक्‍सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्‍सप्रेसवे, आजमगढ़-बनारस राजमार्ग, सुल्‍तानपुर-बनारस राजमार्ग, गंगा एक्‍सप्रेसवे, बनारस रिंग रोड जैसी विकसित हो रही बड़ी आधारभूत परियोजनाएँ पूर्वांचल के विकास को और समृद्धि प्रदान करेंगी।

पूर्वांचल एक्‍सप्रेसवे पर प्रगति कार्य

योगी ने धार्मिक एवं प्राकृतिक रूप से समृद्ध पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड को विकसित करने के साथ ही रोजगार की भी बड़ी संभावनाओं को पैदा किया है। पूर्वांचल को पर्यटन, धर्म एवं उद्योग से जोड़कर समृद्ध बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है, जिसपर इससे पहले कभी गंभीरता से ध्‍यान ही नहीं दिया गया।

पूरब को समृद्ध बनाने की क्षमता रखने वाले कुशीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को शुरू कराया गया, जो दो दशक से नीति और नीयत के अभाव में लटका हुआ था। इस हवाईपट्टी के शुरू होने के बाद जापान-चीन समेत तमाम देशों के बौद्ध अनुयायियों एवं पर्यटकों की संख्‍या में लृद्धि होने की संभावना बढ़ी है। इस कदम से स्‍थानीय स्‍तर पर रोजगार एवं निवेश की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

बनारस, गोरखपुर, प्रयागराज, देवरिया, सोनभद्र जैसे जिलों में भी संयोजकता बढ़ाने के लिए हवाईपट्टी का विस्‍तार हो रहा है। हवाई संयोजकता बेहतर होने से बनारस, गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, सारनाथ, मिर्जापुर, प्रयागराज, सोनभद्र आदि जगहों पर आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की संख्‍या में इजाफा होगा। होटल एवं अन्‍य सुविधाओं को विकसित करने में निवेश को प्रोत्‍साहन मिलेगा।

काशी विश्‍वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार, विंध्‍याचल का सुदृढ़ीकरण, गोरखपुर के रामगढ़ ताल का विकास इसी कड़ी का एक हिस्‍सा है। योगी सरकार पूर्वांचल में आधारभूत संरचना मजबूत करने के साथ सोनभद्र, चंदौली और मिर्जापुर में मौजूद राजदरी, देवदरी, सिद्धनाथ दरी, लखनिया दरी, विंढमफॉल, मुकखाफॉल, सिरसी जैसे प्राकृतिक वॉटरफाल पर सुविधाएँ बढ़ाकर पर्यटकों को आकर्षित करने में जुटी है।

सारनाथ, ज्‍वाला देवी, काशी विश्‍वानाथ, कीनाराम आश्रम, रामनगर का किला, चुनारगढ़, विजयगढ़, नौगढ़, अघोरीगढ़, सिंगरौली दुर्ग, सलखन फासिल्‍स पार्क, चंद्रप्रभा वन्‍य विहार, कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य, हाथीनाला इको प्‍वाइंट, रिहंद जैसे तमाम धार्मिक, प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक स्‍थल के आसपास सुविधाएँ विकसित कर इसे पर्यटन उद्योग से जोड़ रही है।

कैमूर वन्यजीव अभ्यारण्य जाने का मार्ग

इस क्षेत्र में इतनी संभावना है कि पर्यटन ही यहाँ की आय का बड़ा साधन बन सकता है, लेकिन योगी के पहले की सरकारों के एजेंडे में पर्यटन को उद्योग से जोड़ना था ही नहीं। उन सरकारों की प्राथमिकता आम लोगों की आमदनी बढ़ाने की बजाय चंद लोगों की सुविधाएँ और बैंक बैलेंस बढ़ाने की थी।

सुविधा एवं जानकारी के अभाव के चलते बनारस आने वाले तमाम सैलानी आसपास के जिलों के सुरम्‍य स्‍थलों का रुख नहीं करते। योगी सरकार ने पहाड़ी जिलों में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के लिए रोपवे, पुल इत्‍यादि का निर्माण कराकर देश-विदेश के पर्यटकों को भी आकर्षित करने की तैयारी में है। योगी सरकार के प्रयास से ही विंध्‍याचल में रोपवे का निर्माण हुआ है, जो पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। अन्‍य पर्यटक स्‍थलों पर विकास कार्य लगातार जारी है।

बुंदेलखंड में भी इसी लक्ष्‍य के साथ काम हो रहा है। चित्रकूट का संपूर्ण विकास, कालिंजर एवं झाँसी के किले समेत तमाम ऐतिहासिक स्‍थलों के आसपास सुविधाओं की बेहतरी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। वाल्‍मीकि आश्रम जाकर योगी आदित्‍यनाथ ने अपनी मंशा भी जताई थी। ऐसा करने वाले वे पहले और एकमात्र मुख्‍यमंत्री हैं।

बुंदलेखंड में पेयजल एवं सिंचाईजल की समस्‍या के समाधान के लिए योगी सरकार बड़ी परियोजनाएँ चला रही है। योगी सरकार ने बुंदेलखंड में 10,000 से ज्‍यादा खेत तालाब का निर्माण कराकर सिंचाई जल की उपलब्‍धता एवं भूगर्भ जल की वृद्धि पर काम किया है ताकि पलायन में कमी आए।

योगी सरकार महानगर में दो बिल्डिंग बनाकर विकास का ढिंढोरा पीटने की बजाय लाखों किसानों और बुंदेलों की जिंदगी में फर्क लाने वाले बाण सागर, पहुज बांध, पथरई बांध, पहाड़ी बांध, मौदहां बांध और जमरौर बांध जैसी लंबित पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने में जुटी हुई है।

चंद लुटियंस के लिए यह परियोजनाएँ भले ही विकास की श्रेणी में ना आती हों, लेकिन उन लाखों लोगों के लिये इन योजनाओं का पूरा होना किसी वरदान से कम नहीं हैं, जिनका सब कुछ दो बूंद सिंचाई जल पर टिका हुआ है, यहाँ तक कि जीवव भी। मानवीय मूल्‍यों के साथ सामरिक विकास की ये योजनाएँ उन सभी को परेशान कर रही हैं, जिन्‍हें पता है कि इसका असर क्‍या होने वाला है?