विचार
आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पसंद करें या नापसंद, पर उनकी इन 15 प्रबंधन शिक्षाओं को अनदेखा नहीं कर सकते
आप प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पसंद करें या नापसंद

प्रसंग
  • यदि एक प्रधानमंत्री आपको प्रेरित और आपके जीवन को नियंत्रित कर सकते हैं तो यह लेख आपके लिए ही है

प्रत्येक सफल व्यक्ति के पास हमारे लिए एक जीवन का सबक/शिक्षा होती है, आप उन्हें प्रेम करें या नफरत, प्रधान मंत्री मोदी का जीवन कई शिक्षाएं प्रदान करता है जिनका हम अपने दैनिक जीवन में अनुसरण कर सकते हैं। उनका जन्मदिन होने के नाते आज, उनमें से कुछ पर प्रकाश डालने का एक उपयुक्त समय है:

  1. कार्य नैतिकता

यदि कोई आसाधारण विशेषता है जिसे हम अपने जीवन में अपना सकते हैं तो वह प्रधानमंत्री मोदी की अविश्वसनीय कार्य नैतिकता होनी चाहिए जो वर्ष के 365 दिन, 16-18 घंटे प्रतिदिन चलती रहती है। कोई छुटिटयां नहीं। वह अपनी लंबी विदेश यात्राओं की योजना इस प्रकार बनाते हैं कि ईंधन भरने के लिए रुकने के दौरान भी उस विशेष देश में बैठक कर लेते हैं। यदि हम इस जुनून और कर्मशक्ति के साथ काम करते हैं, तो कभी न कभी किस्मत को भी हम पर मुस्कान बिखेरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

  1. वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करना

प्रधानमंत्री मोदी आधे दिल से काम नहीं करते हैं। उनके द्वारा दिया गया 10 मिनट का समय पूरी तरह आपका है। वह विचलित नहीं होते हैं। हम में से कई लोग मल्टी-टास्किंग के नाम पर आधा- अधूरा कार्य करते हैं। जब हम सहकर्मियों और परिवार के सदस्यों के साथ हों तो उन पलों में मौजूद होकर एवं उनके साथ शामिल होकर अपना “बहुमूल्य समय” खर्च करना सीख सकते हैं।

  1. नियंत्रणयोग्य पर नियंत्रण

प्रधानमंत्री पूरी तरह से नियंत्रण में रहने की एक छवि प्रदान करते हैं। वह एक अनुशासित जहाज चलाते हैं। राजनीति जैसे क्षेत्र में जो बहुत सारी बेकाबू “प्राकृतिक कृतियों” की दया पर निर्भर है, आपके द्वारा चुने गए कर्मचारियों और आपकी टीम की गतिविधियों पर लगाम कसना उचित है। भारत के राष्ट्रपति बनने की उम्मीदवार की पसंद से लेकर एवं सतर्कता रखने और अपने मंत्रियों के प्रदर्शन की निगरानी करने तक, वह अनावश्यक समस्याओं से बचते हैं।

  1. विस्तार पर ध्यान दें

यह “विकिपीडिया जनरलिस्ट” का युग है। सामान्य ज्ञान केवल एक निश्चित बिंदु पर काम में आ सकता है। वास्तव में क्या मदद करता है जमीन की वास्तविकताओं की एक मजबूत भावना है। पीएम मोदी ने अपने सार्वजनिक जीवन के लंबे जीवनकाल में जमीनी स्तर पर काम करके सामाजिक समस्याओं को देखा है। उनके भाषणों से यह स्पष्ट है। नीम-लेपित यूरिया या उज्ज्वल योजना की अवधारणा का विचार चीजों को बारीकी से समझने का नतीजा है।

  1. ऊपर से नीचे की ओर प्रबंधन

इन दिनों प्रबंधन किताबें टीमों को सशक्त बनाने और जिम्मेदारियों के विकेन्द्रीकरण के बारे में बात करती हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने अवधारणा को उल्टा कर दिया है। उनका मंत्र एक मजबूत प्रधानमंत्री कार्यालय है जहां जिम्मेदारी स्वीकारनी होगी। उनके निरंतर कार्य नैतिकता इस तरह के दृष्टिकोण के जोखिम को कम करती है। यह संगठन में अधीनस्थों से गलतियां होने को भी रोकता है।

  1. व्यक्तिगत विकास

प्रधानमंत्री मोदी के योग दिवस की वीडियो ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। यह उल्लेखनीय है कि उनके जैसे एक व्यस्त व्यक्ति प्रतिदिन योग सहित विभिन्न शारीरिक गतिविधियों को करने में कामयाब रहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा प्रतिदिन सुबह 6 बजे जिम करते है। तो अब हमारा क्या बहाना है? एक कार्यकर्ता के रूप में आरएसएस में अपने उस समय में बनी हुई उनकी अनुशासित व्यक्तिगत आदतों ने उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति में ग्रहण किया है जो उनकी निरंतर ऊर्जा और मानसिक दृढ़ता का आधार है।

  1. प्रस्तुति

“प्रस्तुति कुंजी है इसमें निपुण हों”। पीएम मोदी की नवीनतम पुस्तक “एग्जाम वॉरियर” में एक अध्याय है। प्रधानमंत्री मोदी यह महसूस करते हैं कि प्रस्तुति दिखावटीपन नहीं है, लेकिन इसमें बदलाव लाने की शक्ति है। यह गहरे मनोविज्ञान में आधार है कि मनुष्यों को सुंदर और विचारशील प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाता है। उनका खुद का पहनावा एक आधुनिक नेता की छाप छोड़ता है। ब्रैंड के जानकार वरिष्ठ नौकरशाह अमिताभ कांत को एक नई संस्था का नेतृत्व करने और “मेक इन इंडिया” जैसे ब्रांडिंग के अभ्यास के विकल्प,   प्रस्तुति पर उनकी निपुणता के उदाहरण हैं।

  1. निरंतरता

“स्वच्छ भारत” अभियान निरंतरता का एक ज्वलंत उदाहरण है। भारत जैसे विशाल देश में जहाँ व्यक्तिगत और सामाजिक स्वच्छता मामूली बात समझी जाती है, प्रधान मंत्री मोदी ने 2014 में इस अभियान की शुरुआत की। वह जानते थे कि व्यवहारिक परिवर्तन बनाने के लिए इसे बहु-वर्षीय और बहु-हितधारक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। नासमझ आलोचक चाहते थे कि कुछ ही महीनों में भारत सिंगापुर जैसा हो जाए। लेकिन मोदी मशहूर हस्तियों का समर्थन प्राप्त करके जनसाधारण के काम की सराहना करते हुए सरकार को करोड़ों शौचालय बनाने का काम देकर अपने लक्ष्य पर अडिग रहे।

  1. प्रौद्योगिकी के साथ अद्यतित

प्रधानमंत्री मोदी अब 68 वर्ष के हो गए हैं। आपने अपने व्यक्तिगत जीवन में 60 वर्ष से ऊपर के कितने व्यक्तियों को देखा है जो इंटरनेट या स्मार्टफोन के साथ सुविधापूर्ण हों? मैं समझता हूँ कि ऐसे लोग बहुत कम ही होंगे। साधारण जनसमुदाय से ताल्तुक रखने वाले हमारे अधिकांश राजनेताओं द्वारा इस तरह की आसानीपूर्ण प्रौद्योगिकी को अपनाने की मानसिकता शायद ही रही है। प्रधानमंत्री मोदी इसमें अग्रणी रहे हैं जिन्होंने अन्य राजनेताओं में अपना अनुकरण करने की इच्छा जगाई है। 2014 का लोकसभा अभियान भारत के इतिहास में सबसे अच्छा राजनीतिक अभियान था जो मुख्यतः प्रौद्योगिकी के साथ व्यापक सांमजस्य के कारण था। आगामी अभियान केवल नई विचारधारा स्थापित करेगा।

  1. एक उदाहरण स्थापित करना

जैसा कि एक कहावत है, “कथनी से करनी भली।” साथी नेताओं से अधिक से अधिक रैलियाँ करने के लिए कहने के बजाय, प्रधानमंत्री मोदी चुनाव के दौरान एक दिन में कम से कम पाँच रैलियों को संबोधित करने का प्रखर कदम उठाते हैं। उनकी दृढ़ मानसिक शक्ति के कारण ही वह थका देने वाले दिनभर के कार्यक्रम के बाद भी शाम को  सुस्त नजर नहीं आते।

यह कुछ खास बात लगती है कि वह नवरात्र के दौरान अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाते हैं और तब भी वह अपना उपवास कायम रखते हैं।

  1. संचार

प्रधानमंत्री मोदी भारत में जन्मे सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं में से एक होंगे। उच्च विचार, सुंदर कल्पना, उद्घोषणा से लेकर कार्यवाही तक और देशभक्ति से परिपूर्ण उनकी विशेषताएं (हालमार्क) हैं। लेकिन लोग मुश्किल से ही जानते हैं कि उनकी मातृभाषा गुजराती है। और अगर किसी ने उनके प्रारंभिक भाषणों को सुना है तो वह समझ सकता है कि उन्होंने शानदार भाषण देने के लिए कितना सफर तय किया  है। अभ्यास और दृढ़ता जादू की छड़ी के समान हैं। नेताओं के लिए प्रेरणादायक और प्रभावी संवाददाता होने की आवश्यकता सार्वजनिक या कॉर्पोरेट करियर में अनिवार्य हो गई है।

  1. सूचना और प्रतिक्रिया

सरकार और पार्टी की औपचारिक संरचनाओं के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने जमीनी स्तर की हकीकत जानने के लिए कई चैनलों से संपर्क साधा है। इसमें भरोसेमंद दोस्त, पत्रकार, कारोबारी, आध्यात्मिक गुरू, आरएसएस कार्यकर्ता, मशहूर हस्तियाँ, सोशल मीडिया और सार्वजनिक रूप से होने वाली बातचीत शामिल हैं। वह इन सतही स्तर की जानकारियों के आधार पर ही नीतियों और यहाँ तक कि अपने भाषणों को शक्ल देने में योग्य हैं। सोशल मीडिया पर खिल्ली उड़ जाने के बाद उन्होंने अपने भाषणों में “मित्रों” कहना बंद कर दिया है। एक बार मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि किस प्रकार प्रतिक्रिया के आधार पर ही उन्होंने अपने भाषणों की लंबाई कम कर दी थी।

  1. आत्मविश्वास

कई नेता अक्सर उच्च पदों पर पहुंचने के बाद नौकरशाहों और सलाहकारों की सुनना बंद कर देते हैं।  लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को इन मुद्दों की गहरी समझ है और वे जमीनी स्तर के अपने कई वर्षों के लंबे अनुभव और दृढ़ विश्वास के बलबूते इसका समर्थन करते हैं। सरकार की कई प्रमुख योजनाएं जैसे – जन धन योजना, उज्जवला योजना, नोटबंदी, आयुष्मान भारत और ऐसी ही कई योजनाएं उनकी इसी समझ का नतीजा हैं कि जनता को किस चीज की जरूरत है।

  1. फ्रंट फुट पर खेलना

राजनीति में, कई बार लोग आलोचना हो जाने पर अपना आत्मविश्वास खो देते हैं और रक्षात्मक रूप से रहना शुरू कर देते हैं। एक दरिंदे की तरह, विपक्ष जैसे ही आपको भीतर डर की बू महसूस करता है तभी आप पर हमला कर देता है। 2014 के बाद से सभी चुनाव प्रचार अभियानों में, भाजपा केवल जीतने का ही नहीं बल्कि दो तिहाई बहुमत हासिल करने का इरादा रखती है। कुछ साल पहले विपक्षी नेताओं ने वैश्विक तेल की कम कीमतों के कारण आर्थिक पलटाव को एक “सौभाग्य” मानने से इंकार कर दिया था। अन्य सभी लोग तो चुप रहे थे लेकिन प्रधानमंत्री ने मुँहतोड़ जवाब मांगा था कि  “आप मेरे सौभाग्य से जल क्यों रहे हैं? क्या आप एक अभागा प्रधानमंत्री चाहते हैं?” आगे आकर खेलने से शक्ति प्रदर्शन होता है यह एक महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धा का लाभ है ।

  1. सकारात्मक बने रहना

प्रधानमंत्री मोदी राजनीति में अपने शुरूआती दिनों को याद किया करते थे जब पार्टी बड़ी मुश्लिक से ही जीत पाती थी लेकिन फिर भी इनको छोटा मील का पत्थर मानती थी। मुश्किल समय में सकारात्मक बने रहना सिर्फ कहने में आसान है करना आसान नहीं है। यह दूर की बात लग सकती है, लेकिन जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब मीडिया और कांग्रेसियों द्वारा लगातार उनका अपमान करना उनकी सकारात्मकता को आघात पहुँचाता होगा। अतुलनीय आत्मविश्वास, एक सकारात्मक रवैया अपनाना और जिंदगी की विचलित कर देने वाली परेशानियों में भी अटल बने रहना दीर्घकालिक सफलता के लिए काफी मायने रखता है। उनके समर्थक सकारात्मक बने रहकर और मतभेदों का सामना न करके आगामी चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करेगें।

आपने प्रधानमंत्री मोदी से जो सीखा और उसको अपनी निजी जिंदगी में शामिल किया उसके बारे में हम जानने के इच्छुक हैं। कृपया कमेंट करके हमें जरूर बताइये।