विचार
अनियंत्रित क्रोध या धार्मिक कट्टरता? जानिए गुरूग्राम के गोलीकांड का मकसद
महिपाल सिंह यादव

प्रसंग
  • गुरूग्राम में एक अतिरिक्त सत्र न्यायालय की पत्नी और बेटे की दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले से हरियाणा में पैर पसारते ईसाई प्रचारक और कट्टरता का पर्दाफाश हुआ है।

शनिवार को दोपहर में रितु (45) और उसके बेटे ध्रुव (18) पर कम दूरी से ही पाँच राउंड फायर करने के बाद कॉन्स्टेबल महिपाल सिंह यादव ने चिल्ला कर कहा कि “ये शैतान की माँ और ये शैतान।”

इसके बाद महिपाल (32) ने रितु को कई बार लातें मारी थीं। घटना को अंजाम देने के बाद महिपाल ने ध्रुव को कार में डालने की कोशिश की लेकिन वह नाकाम रहा। यह सफेद होंडा सिटी कार उसके मालिक की थी और इसी में बैठकर तीनों आर्केडिया बाजार आए थे।

दोनों लहूलुहान पीड़ितों को सड़क पर ही छोड़कर वह फरार हो गया। इस पूरे कांड का वीडियो कैप्चर कर लिया गया है – जिसमें इसका बेरहमी से गोली मारना, महिपाल का चिल्लाना, शरीर को खींचकर गाड़ी में चढ़ाने की कोशिश करना और उसका भागना शामिल है। इस वीडियो में महिपाल निडर और बेरहम दिखता है तथा घटना स्थल के चारों ओर सैकड़ों लोगों का जमावाड़ा भी दिखता है।

गुरूग्राम के गोलीकांड का मकसद

इस बात का खुलासा हुआ है कि महिपाल ने फरार होने के बाद दो लोगों को फोन किया था। पुलिस के मुताबिक, एक कॉल उसने अतिरिक्त जिला जज कृष्ण कांत शर्मा को यह बताने के लिए की थी कि उसने उनके बेटे और पत्नी की हत्या कर दी है। महिपाल सन् 2016 से शर्मा के निजी सुरक्षा अधिकारी के रूप में अपनी सेवा दे रहा था।

दूसरी कॉल उसने अपने चचेरे भाई मनोज सिंह (23) को की थी, जो गुरूग्राम से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित रेवाड़ी जिले के कोसली कस्बे में रहता है। महिपाल ने उससे अपनी माँ, तिरूपति देवी, को गुरूग्राम की पुलिस लाइन में अपने आवास से बाहर लाने को कहा, जहाँ वह मौजूदा समय में रहती थीं। मनोज के पिता और महिपाल के चाचा दान सिंह ने पायनियर अखबार को बताया कि मनोज उसी दिन रात में करीब 7 बजे तिरूपति देवी को लेकर कोसली वापस लौट गया था। हालांकि, एक पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए गुरूग्राम ले गई। सिंह ने बताया कि पुलिस इन दोनों को किसी अनजान जगह पर ले गई थी।

फरार होने के कुछ ही समय बाद महिपाल को गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर गिरफ्तार कर लिया गया था। उसी रात करीब 11:30 बजे घायल रितु की तो मौत हो गई जबकि उनका बेटा लाइफ सपोर्ट पर है।

इस मामले ने मीडिया का काफी ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है और लोगों में हंगामा पैदा किया है और उन्हें झटका दिया है। इस भयानक अपराध के मकसद ने पुलिस और जनता को उलझाव में डाल दिया है।

कार्य पर उत्पीड़न?

इस मामले में पुलिय यह भी जाँच कर रही है कि कहीं महिपाल ने अपने मालिक द्वारा किये जाने वाले संभावित दुर्व्यवहार से परेशान होकर तो ऐसा नहीं किया था।

यह मुद्दा दान सिंह ने उठाया है, जिन्होंने मीडिया को बताया कि महिपाल जज से गुस्सा और परेशान था, क्योंकि महिपाल की बेटी बीमार थी जिसका इलाज करवाने के लिए वह छुट्टी लेना चाहता था लेकिन जज ने छुट्टी देने से इंकार कर दिया था। सिंह के मुताबिक, महिपाल ने छुट्टी लेने के लिए बार-बार अनुरोध किया था लेकिन उसको छुट्टी नहीं दी गई थी।

कोसली में रहने वाले सिंह ने मीडिया को बताया कि “मेरे भतीजे महिपाल की ग्यारह साल की बेटी गंभीर रूप से बीमार थी और उसे तुरंत इलाज की जरूरत थी। घटना वाले दिन, महिपाल की पत्नी उसको बार-बार फोन करके अपनी बेटी को किसी डॉक्टर को दिखाने के लिए घर आने के लिए कह रही थी। उससे बार-बार जल्दी छुट्टी लेने के लिए कहा जा रहा था।” दि ट्रिब्यून (एक समाचार एजेंसी) ने सिंह के बयान को उद्धृत किया है कि महिपाल दवाब में था – खासकर जज की पत्नी द्वारा –  परिवार द्वारा उसको परेशान किया जाता था तथा उसके साथ खराब बर्ताव किया जाता था।

सिंह की इस बात को महिपाल के एक दोस्त कैलाश सिंह ने समर्थन दिया है, जिन्होंने न्यूज18 को बताया कि, “वह (महिपाल) एक सुरक्षाकर्मी था न कि उनका घरेलू नौकर। वह अपने काम को लेकर बिल्कुल भी खुश नहीं था। यह सीधे तौर पर सुरक्षाकर्मियों का दोहन है।”

दूसरी तरफ, शर्मा के एक सहकर्मी और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि महिपाल के साथ गरिमामय व्यवहार किया जाता था और जैसे सभी अन्य निजी सुरक्षा अधिकारियों से चौबीस घंटे सुरक्षा की उम्मीद की जाती है, लेकिन इसके विपरीत महिपाल को केवल न्यायालय के घंटों के दौरान सुरक्षा के लिए काम पर रखा जाता था।

हालांकि, जाँच करने वाले पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे अभी इस निष्कर्ष पर नहीं पहुँचे हैं कि ऐसा उत्पीड़न की वजह से किया गया था, क्योंकि अपराधी ने उन्हें कोई ठोस बयान नहीं दिया है। इस मामले की जाँच करने के लिए गठित किए गए विशेष जाँच दल (एसआईटी) की अगुवाई कर रहे पुलिस उपायुक्त (पूर्व) सुलोचना गजराज ने मीडिया को बताया कि महिपाल ने अपनी मौजूदा नौकरी को लेकर अपने विभाग से यह शिकायत कभी नहीं की थी कि उसका उत्पीड़न किया जाता है या उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

धार्मिक कट्टरता?

अपराध के एक दिन बाद, प्रारंभिक रिपोर्टों में जाँच अधिकारियों ने यह बताया है कि हिरासत के दौरान महिपाल ईसाई धर्म में अपने हालिया धर्मान्तरण और बाइबिल के उद्धरण के बारे में बात कर रहा था। उसने यह भी कहा था कि शैतानों को खत्म करना हर ईसाई का कर्तव्य है।

जब यह देखा जाता है कि गोली मारने के बाद महिपाल ने भीड़ के सामने यह कहा था – “ये शैतान की माँ और ये शैतान” – इससे यह संदेह होता है कि महिपाल रितु और ध्रुव को मारे जाने लायक शैतान मानता था। यहाँ पर शैतान शब्द का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है क्योंकि ईसाई मिशन हिन्दुत्व को “शैतानिक” विश्वास कहते हैं और धर्मपरिवर्तन के दौरान, लोगों को बताते हैं कि गैर-ईसाई “शैतान” हैं।

कई सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि महिपाल को हरियाणा के अपने मूल जिले महेन्द्रगढ़ में भी ईसाई धर्मपरिवर्तन से संबंधित गतिविधियों मे लिप्त पाया गया था। जाँच दल ने मीडिया को बताया कि महिपाल ने दो दर्जन से अधिक लोगों का धर्मपरिवर्तन करवाया था और इसीलिए हो सकता है कि वह रितु और ध्रुव पर भी धर्मपरिवर्तन करने के लिए दबाव डाल रहा हो। इसी बात को लेकर महिपाल का इन दोनों के साथ अक्सर विवाद हुआ करता था। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि महिपाल ईसाई धर्म के बारे में लगातार बात किया करता था और इसके लिए जज की पत्नी उसको डांटती थी।

घटना को अंजाम देने से पहले रात में महिपाल द्वारा की गई एक गुप्त फेसबुक पोस्ट इस बात की ओर इशारा करती है और सुझाव देती है कि यह हत्या तत्काल ऑन-द-स्पॉट गुस्से का नतीजा न होकर पूर्व-नियोजित हो सकती। इस पोस्ट में डायरी के एक पन्ने को पोस्ट किया गया था जिसपर लिखा था, – “Pastor Robin do not push this 2150 Rs please” । इस पंक्ति के बाद R और D से शुरू होने वाले दो शब्द लिखे हुए थे जिनको काट दिया गया था। यहाँ पर जिक्र किए गए 2150 रूपये महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह वही सटीक धनराशि है जो महेन्द्रगढ़ जिले में ईसाई धर्म में परिवर्तन करवाने वाले लोगों (ईसाई धर्म के प्रचारकों) को दी जाती है।

जाँच दल ने मीडिया को बताया कि हाल ही में अगस्त 2018 में एक धर्मपरिवर्तन के मामले में महिपाल की भूमिका सामने आई थी जब उसने पुलिस द्वारा पकड़े गए धर्म परिवर्तन करवाने वाले एक समूह की मदद की थी। यह घटना नरनौल के एक होटल में हुई थी, जो कि महिपाल के पैतृक गाँव भुंगारका (गुरूग्राम से 120 किलोमीटर दूर स्थित) से कुछ किलोमीटर दूर थी। इस अवैध धर्म परिवर्तन करवाने वाले 8-10 लोगों के समूह में पुलिस और केन्द्रीय रिजर्व बल (सीआरपीएफ) के जवान भी शामिल पाए गए थे। जाँच अधिकारियों का कहना है कि जब पुलिस ने छापा मारकर इस समूह को पकड़ा था तो महिपाल ने ही अपने हस्तक्षेप से उनको रिहा करवा दिया था।

होटल के मालिक ने स्वराज्य को बताया, “किसी अन्य आगंतुक की तरह ही लगभग 40 लोगों का एक समूह हमारे भोजनालय में पहुंचा और हमें बताया कि हम आपके मेहमान हैं। उन्होंने बैठक आयोजित करने के लिए हमारे कांफ्रेंस रूम का उपयोग करने का भी अनुरोध किया। हमें कुछ भी संदेहजनक नहीं लगा। लेकिन जब वे जाने वाले थे तो एक पुलिस टीम आई और उन्हें पकड़ लिया। लेकिन बाद में मैंने देखा कि पुलिस ने उनके पास से कुछ ऐसी चीजें बरामद कीं जिनका उपयोग वे धर्मपरिवर्तन के लिए लुभाने के लिए करते थे।” उन्होंने बताया कि वह उनमें से किसी को भी पहचान नहीं सके।

यह जानकारी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईसाई धर्म के प्रचारकों में से एक ऐसी महिला थी जिसे महिपाल अपनी गुरु मां मानता है और जिससे वह बहुत अधिक प्रभावित है। पुलिस अपराध के संभावित कारण जानने के लिए महिला की तलाश कर रही है। पुलिस इंद्रराज नामक एक आदमी की भी तलाश कर रही है, जिसे महिपाल अपना “गुरू” कहता है। खबर के मुताबिक, महिपाल ने हिरासत में अपने ‘गुरु’ और ‘गुरु मां’ के बारे में बताया है।

स्वराज्य की टीम महिपाल के पैतृक गांव भुंगरका पहुंची। वहां ग्रामीणों ने बताया कि महिपाल के पिता होशियार यादव एक शराबी थे और इसी कारण से महिपाल की मां ने काफी पहले गांव छोड़ दिया था। उन्होंने भुंगरका से लगभग 70 किलोमीटर दूर कोसली गांव में अपने भाई के घर पर अपने बेटे का पालन पोषण किया। लेकिन 2008 में अपने पिता की मौत के बाद महिपाल अपने पैतृक पक्ष के संबंधियों से मिलने जुलने के लिए गांव आने लगा और वहीं एक नया घर भी बनवाया।

गुरूग्राम के गोलीकांड का मकसद

भुंगरका में किराने की दुकान चलाने वाले महिपाल के चाचा रामानंद यादव ने स्वराज को बताया कि महिपाल एक शान्तचित्त तथा अच्छा इंसान है और उसने जो किया है वह विश्वास योग्य नहीं है।

धर्म परिवर्तन पर महिपाल द्वारा अपने मालिकों की हत्या से संबंधित रिपोर्टों का जिक्र करने पर, रामानंद ने पूरे प्रकरण के लिए “ईशू मसीह का चक्कर” को दोषी ठहराया। उन्होंने स्वराज्य को बताया, “रिपोर्टों में बताया गया है कि उसने आठ महीने पहले अपना धर्म बदल दिया था लेकिन सच्चाई यह है कि जब से वह यहां रहने लगा था तब से उसने धूप-बत्ती (हिंदू पूजा पद्धति) करना बंद कर दिया था। जब भी मैं उससे पूछता कि ऐसा करना क्यों बंद कर दिया तो वह नाराज हो जाता और मुझे अपने काम से काम रखने को कहता। लेकिन कोई भी ग्रामीण इस तरह की चीजों को पसंद नहीं करता है।”

हालांकि, रामानंद ने कहा कि महिपाल लगभग तीन साल पहले गुरुग्राम चला गया था तब से वह उसके संपर्क में नहीं थे और वह उसकी हालिया मनोस्थिति पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। अन्य ग्रामीण महिपाल को एक धार्मिक कट्टरपंथी के रूप में नहीं मानते हैं। महिपाल के एक पड़ोसी, धर्मपाल ने स्वराज्य को बताया कि कुछ महीने पहले महिपाल कुछ समय के लिए गांव आया था और उससे परंपरागत रूप में ‘राम राम’ कहकर नमस्कार किया था।

भुंगरका में उसके कुछ दिन ठहरने के दौरान माना जाता है कि वह अपने ‘गुरू’ इंद्रराज से मिला और ईसाई धर्म की ओर आकर्षित हो गया। इसी गांव में इंद्रराज को 2015 में अवैध धर्म-परिवर्तन के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद ने स्वराज्य को बताया कि उस समय महिपाल को धर्मान्तरण कार्यक्रम से कोई लेना देना नहीं था, बाद में यह पता चला कि उसके संबंध इंद्रराज से घनिष्ठ हो गए और उसने धर्म-परिवर्तन कर लिया और उसी तरह की गतिविधियों में शामिल हो गया। 2015 के मामले का वर्णन करते हुए प्रसाद, जो कि एक शिकायतकर्ताओं में से एक हैं, ने बताया, “काफी दिनों पहले गांव में यह घोषणा कर दी गई थी कि डॉक्टरों की एक टीम आएगी और ग्रामीणों की सभी बीमारियों का इलाज करेगी, इसलिए सभी को सेवाराम धर्मशाला में आयोजित शिविर में पहुंचना चाहिए। लेकिन शिविर के दिन ग्रामीणों को पता चला कि टीम वास्तव में ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए आई थी। वे ग्रामीणों को बता रहे थे कि उनका धर्म गलत है और अगर वे धर्म-परिवर्तन कर लेते हैं तो वे स्वस्थ हो जाएंगे।”

एक अन्य शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह ने कहा, “उन्होंने हिंदू धर्म की बहुत बुराई की। हमने घटना की रिकॉर्डिंग और आपत्तिजनक पुस्तिकाएं पुलिस को सौंप दीं जिन्होंने मुख्य आरोपी इंद्रराज सहित कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। लेकिन वह अदालत की सुनवाई के लिए कभी नहीं आया। उसके वकील ने बताया कि उसकी मौत हो गई।”

चूंकि पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है, महिपाल स्वयं जांच करने वाली टीम को भ्रमित कर रहा है। जबकि शुरुआत में उसने कहा था कि शैतानों को खत्म करना हर ईसाई का कर्तव्य है, लेकिन अब वह कथित तौर पर कह रहा है कि “शैतान” का अर्थ है बस “एक बुरा और गंदा व्यक्ति”।

कथित तौर पर अपने नवीनतम बयान में महिपाल ने कहा है कि वह न तो मानसिक रूप से परेशान था और न ही किसी भी धर्म या धार्मिक ग्रंथ से प्रभावित था और हत्या आवेश और गुस्से में हुई थी। जांच अधिकारी ने उसके वक्तव्य को उद्धृत करते हुए बताया, “मैं एक पार्किंग स्थल पर फंस गया था क्योंकि एक और वाहन रास्ता बंद कर रहा था। वे (जज की पत्नी और पुत्र) उस पर नाराज होने लगे। मुझे पता था कि मुझे डांटा जाएगा और इसलिए मैंने कोई प्रतिक्रिया न देने का फैसला किया। जब मैं लौटा, तो वे नाराज थे। जज के बेटे ने मुझे वहां से भगाते हुए मुझसे कार की चाबियां छीन लीं। मैं केवल 18 वर्ष के लड़के से चाबियां न ले सका।”

महिपाल की पत्नी मीनू, जिनसे उसने आठ साल पहले शादी की थी और तब से पत्नी के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण थे, इस मामले में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान कर सकती है। उनको भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। स्वराज्य ने रेवाड़ी के रोजका गांव में उनके परिवार से संपर्क किया लेकिन परिवार ने बात करने से इनकार कर दिया। घटना के बाद से मीनू ने मीडिया से बात नहीं की है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि मीनू ने जांचकर्ताओं को बताया है कि ईसाई धर्म के बारे में लगातार बात करने को लेकर जब भी रितु और ध्रुव द्वारा महिपाल की निंदा की जाती तो बाद में महिपाल उनको बुरा-भला कहता और उन्हें (रितु और ध्रुव को) ‘शैतान’ की संज्ञा देता। मीनू ने कुछ समय पहले महिपाल को छोड़ दिया था और अपने मायके रोजका चली गई थी क्योंकि वह अपने पति के रितु और ध्रुव के धर्मपरिवर्तन के प्रयास से तंग आ गई थीं। रिपोर्ट के अनुसार दंपत्ति में लगातार झगड़ा होता रहता था। कथित तौर पर मीनू परेशान थी क्योंकि महिपाल के कई रिश्तेदारों ने महिपाल द्वारा धर्म-परिवर्तन करने के बाद दंपत्ति से दूरियां बढ़ा ली थीं।

यह सब होने के दौरान उसके मालिक शर्मा ने मीडिया से बात नहीं की है। पुलिस आरोपी के लिए लाई-डिटेक्टर टेस्ट पर विचार कर रही है।

स्वाती गोयल शर्मा स्वराज की एक वरिष्ठ संपादक हैं। इनका ट्विटर हैंडल @swati_gs है।