विचार
दिशा रवि और रिंकु शर्मा के लिए लिबरल गैंग की प्रतिक्रियाओं में अंतर बहुत कुछ कहता है

ग्रेटा थनबर्ग टूलकिट मामले में बेंगलुरु से गिरफ़्तार की गई दिशा रवि, जिसे जमानत मिल गई है, के लिए आवाज़ उठाने वाले लिबरल उस रिंकु शर्मा की हत्या पर चुप्पी साधे हुए हैं जिसे उसी के घर में घुसकर मारा गया और दिशा रवि के अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य की चिंता जिन्हें सता रही थी, वे रिंकु शर्मा के परिवार द्वारा अभिव्यक्त हत्या के कारणों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

दिल्ली के मंगोलपुरी क्षेत्र में रहने वाला रिंकु शर्मा 25 वर्ष का स्वास्थ्य कर्मचारी और बजरंग दल सदस्य था। वह एक राम भक्त था और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चलाए जा रहे देशव्यापी निधि समर्पण अभियान के तहत चंदा जुटा रहा था जिसके दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों से कुछ विवाद हो गया था।

मंगोलपुरी के स्थानीय लोगों और रिंकू के छोटे भाई मन्नू शर्मा की बात मानें तो पिछले साल अगस्त में राम मंदिर निर्माण के लिए हुई एक रैली के दौरान क्षेत्र के ही मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने रिंकु से कहा-सुनी कर रिंकु को जान से मारने की धमकी दी थी। और अंततः 10 फरवरी की रात दर्जनों लोगों की उपस्थिति में रिंकु के पूरे परिवार पर हमला हुआ और रिंकु को चाकू से गोदकर मौत के घाट उतार दिया गया।

दिशा रवि की गिरफ्तारी और यह हत्या मात्र 72 घंटों के भीतर घटित हुई लेकिन देश के तथाकथित लिबरल गैंग के मुँह से रिंकु शर्मा की हत्या पर एक शब्द नहीं निकला और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई दिशा रवि की गिरफ़्तारी से सभी के पेट में मरोड़ पड़ने लगे थे।

किसान आंदोलन की आड़ में विश्व मंच पर भारत की छवि ख़राब करने के लिए चलाए जा रहे षड्यंत्र एवं दुष्प्रचार में ख़ालिस्तानी समूह पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीजेएफ) की भूमिका सबके सामने है। पीजेएफ के संस्थापक धालीवाल, सह-संस्थापक अनिता लाल, निकिता जेकब, शांतनु मुलुक व लगभग 70 अन्य लोगों के साथ ज़ूम मीटिंग में टूलकिट का ख़ाका तैयार किया गया था जिसके संपादन का आरोप दिशा रवि पर है।

इस टूलकिट को बाद में वाट्सैप, टेलिग्राम व अन्य माध्यमों से ‘आंदोलनजीवीयों’ तक फैलाया गया। टूलकिट का मुख्य उद्देश्य ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को जोड़कर गणतंत्र दिवस पर आराजकता फैला दिल्ली पुलिस को गोली चलाने के लिए उकसाना था। इसमें विदेशों में रह रहे लोगों से भी भारतीय दूतावास के बाहर जाकर प्रदर्शन करने की अपील की गई थी ताकि भारत की सरकार व छवि को नुक़सान पहुँचे।

गणतंत्र दिवस पर लाल किले व दिल्ली के अन्य हिस्सों में हुई हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस की सूझबूझ भरी कार्यवाही देखने के बाद जब इन्हें आंदोलन कमज़ोर पड़ने का डर लगने लगा तब इन्होंने कुछ अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों से ट्वीट्स करवाने की योजना बनाई। कहा जा रहा है कि पीजेएफ ने कनाडा में जस्टीन ट्रूडू सरकार में सहयोगी जगमीत सिंह की सहायता से पॉप सिंगर रिहाना से किसान आंदोलन का एक न्यूज़ लिंक ट्वीट करवा दिया।

इसी क्रम में दिशा रवि ने टूलकिट को ग्रेटा थनबर्ग के साथ साझा किया और ग्रेटा ने वह टूलकिट ग़लती से ट्वीट कर दिया। ग़लती से इसलिए क्योंकि कुछ समय बाद ही ग्रेटा ने वह ट्वीट डिलीट कर एक नई व संपादित टूलकिट ट्वीट की लेकिन तब तक देर हो गई थी और इस वैश्विक षड्यंत्र का पर्दाफ़ाश हो चुका था।

सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार कर लोगों के दिमाग में ये घुसाने की कोशिश की जा रही है कि दिशा रवि मात्र एक 22 साल की भोली-भाली मासूम शाकाहारी लड़की है जो पर्यावरण ऐक्टिविस्ट होने के साथ-साथ पशु प्रेमी है और अपने परिवार की एकमात्र कमाई करने वाली सदस्या है।

जो लोग सालों से चीख रहे हैं की आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता वो आज अपराधी की उम्र को बहाना बना के अपना एजेंडा चलाने की कोशिश कर रहे हैं। फर्क साफ दिख रहा है, एक तरफ जहाँ घोर सन्नाटा है तो दूसरी तरफ गला फाड़-फाड़कर दिल्ली पुलिस की कार्यवाही का विरोध किया जा रहा है ताकि देश की वर्तमान सरकार के खिलाफ एक गलत नैरेटिव स्थापित किया जा सके।