विचार
डिजिटल मीडिया पर नए नियम मुख्यधारा मीडिया के लिए कैसे लाभकारी होंगे

डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और ओटीटी मंचों के लिए सरकार के नए नियमों की अधिकांश मीडिया घरानों और डिजिटल समाचार प्रकाशकों द्वारा आलोचना होना सही ही है।

शीर्षक में दावा किया जाता है कि मीडिया नैतिकता को बनाए रखने और मिथ्या समाचार, बाल अश्लील सामग्री, आदि को रोकने के लिए इसे लाया गया है लेकिन एक आलोचना जो होनी चाहिए, वह यह कि समाचार विविधता पर ये नियम लगाम कसते हैं।

ये उन आवाज़ों को दबाएँगे जिनकी चिंता मुख्यधारा की मीडिया में नहीं की जाती और इसके फल स्वरूप मीडिया की शक्ति पुनः पुराने संभ्रांत वर्ग की ओर चली जाएगी।

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थता दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 के अंतर्गत नियमों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के खंड 87 (2) के आधार पर बनाया गया।

यह बात अकेली ही चिंता का विषय है क्योंकि यह मंचों और प्रकाशकों पर भी वही नियम लागू करता है जो मध्यस्थों के लिए हैं। कंप्यूटर (या इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों) द्वारा जारी की गई सामग्री को प्रतिबंधित करने और जन सामान्य में प्रसार के लिए हानिकारक मानने का अधिकार इसी अधिनियम का खंड 69(ए) देता है।

इसकी सबसे बड़ी आलोचना यह है कि डिजिटल समाचार प्रकाशक ट्विटर या फेसबुक की तरह मात्र मध्यस्थ नहीं हैं, वे सामग्री निर्माता हैं। इस लेख में हम यह बात नहीं करेंगे कि सोशल मीडिया मंचों के लिए ये नियम क्या मायने रखते हैं।

हम बात करेंगे कि स्वराज्य जैसे स्वतंत्र मंचों पर इन नियमों का क्या प्रभाव होगा। प्रिंट व टेलीविज़न के मुख्यधारा और पारंपरिक मीडिया कथानकों (नैरेटिव) को चुनौती देने वाले डिजिटल मंचों के कारण मुख्यधारा मीडिया को भी नैरेटिव पर अपनी शक्ति बनाए रखने के लिए डिजिटल मैदान में उतरना पड़ा है।

नए नियम मुख्यतः कहते हैं-
डिजिटल और ऑनलाइन मीडिया प्रकाशकों को भारतीय प्रेस परिषद द्वारा सुझाए गए पत्रकारिता नियमों तथा केबल टेलीविज़न नेटवर्क नियमन अधिनियम के तहत प्रोग्राम कोड का अनुसरण करना होगा ताकि ऑफलाइन (प्रिंट व टीवी) और डिजिटल मीडिया का समान स्तर रहे। (इटैलिक्स लेखक द्वारा)

यह ऐसा है जैसे कहा जाए कि समृद्ध और शक्तिशाली अमेज़ॉन को निर्धन और विनम्र किराना स्टोर के बराबर स्तर दिया जाए। मुख्यधारा मीडिया नैरेटिव को चुनौती देने वाले डिजिटल मीडिया, विशेषकर छोटे और स्वतंत्र स्टार्ट-अपों को अति-विनियमन से स्वतंत्रता की आवश्यकता है।

यह स्वतंत्रता ही उन्हें उन अतिरिक्त लागतों से बचाएगी जिसका भार सिर्फ बड़े मीडिया संस्थान ही उठा सकते हैं। इस प्रकार समान स्तर का अर्थ हुआ कि समाचार और विचारों के क्षेत्र में अति आवश्यक विविधता को लाने वाली छोटी और स्वतंत्र डिजिटल आवाज़ों का पलड़ा हल्का कर दिया जाए।

समस्या यह आवश्यकता नहीं है कि डिजिटल मीडिया को मीडिया नैतिकताओं का पालन करना होगा, समस्या यह है कि उन्हें उन दुर्वह स्व-विनियमन और शिकायत तंत्रों का अनुपालन करना होगा जो छोटी व हल्की डिजिटल मीडिया कंपनियों पर भारी लागत का बोझ डालते हैं।

(इसके अतिरिक्त प्रश्न यह भी उठता है कि क्या मुख्यधारा मीडिया किसी स्वीकार्य नैतिक मानकों का पालन करती है। हमने तो यह भी देखा है कि प्रथम पृष्ठ में बड़े-बड़े शीर्षकों का दावा गलत निकल जाने पर उसे वापस लेने/खंडन करने की बात को पिछले पन्नों में छोटे अक्षरों में लिख दिया जाता है।)

(वहीं टीवी पर वाद-विवाद/परिचर्चा के नाम पर होने वाले हो-हल्ले का स्तर किसी से छुपा नहीं है। प्राइम टाइम पर पत्रकार और अतिथि, दोनों ही हर प्रकार की आपत्तिजनक व अपमानजनक टिप्पणियाँ करते हैं लेकिन हमने कभी नहीं देखा कि किसीको कानूनी कार्रवाई में घसीटा जाए या जेल भेजा जाए।)

टीवी परिचर्चा का प्रतीकात्मक चित्रण

स्वतंत्र डिजिटल प्रकाशकों पर बुरा प्रभाव डालने वाला मुख्य नियम वह है जो तीन स्तर के विनियामक तंत्र का सुझाव देता है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ये तीन स्तर निम्नलिखित होंगे-

1. प्रकाशक द्वारा स्व-विनियमन- प्रकाशक को भारत में आधारित एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा जिसका दायित्व होगा प्राप्त शिकायतों का निवारण करना। हर प्राप्त शिकायत पर इस अधिकारी को 15 दिनों के भीतर निर्णय लेना होगा।

2. स्व-विनियामक निकाय- प्रकाशकों के एक या एक से अधिक स्व-विनियामक निकाय हो सकते हैं। इस प्रकार के निकाय की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के सेवनिवृत्त न्यायाधीश या स्वतंत्र प्रख्यात व्यक्ति करेगा और इसके छह से अधिक सदस्य नहीं होंगे।

इस प्रकार के निकाय को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत होना होगा। यह निकाय देखेगा कि प्रकाशक आचार संहिता का पालन करें और उन शिकायतों का निवारण करेगा जिसे प्रकाशक ने 15 दिनों के भीतर नहीं किया है।

3. निरीक्षण तंत्र- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय एक निरीक्षण तंत्र बनाएगा। स्व-विनियामक निकायों के लिए यह एक चार्टर प्रकाशित करेगा जिसमें आचार संहिता भी होगी। शिकायत सुननेके लिए यह एक अंतर्विभागीय समिति स्थापित करेगा।

समस्या पहले स्तर पर ही है। हर डिजिटल प्रकाशक अपनी आचार संहिता का पालन कर सकता है और अपने सामर्थ्य के अनुसार इसे लागू कर सकता है लेकिन शिकायत निवारण अधिकारी की नियुक्ति की बात हो जिसे 15 दिन में शिकायत का निवारण करना है तो उस स्थिति में क्या होगा जब किसी विवादास्पद लेख पर सैकड़ों शिकायतें आएँ और अकेला व्यक्ति सभी शिकायतों का निवारण न कर सके।

इससे छोटे प्रकाशक वामपंथ (या दक्षिणपंथ) के कैन्सल कल्चर विशेषज्ञों की दया पर आश्रित हो जाएँगे। हमले करने वाले लोग एकजुट होकर योजनाबद्ध ढंग से किसी प्रकाशक को निशाना बना सकते हैं जिससे प्रकाशक को चुप कराया जा सके या उसकी आवाज़ को सीमित कर दिया जाए।

यदि एक मध्यस्थ ट्विटर अपनी इच्छानुसार दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपित पद पर बैठे व्यक्ति को मंच से हटा सकता है तो समस्या खड़े करने वालों का गिरोह प्रभावी रूप से छोटे डिजिटल प्रकाशकों को चुप करा या प्रकाशक जिसे महत्त्वपूर्ण समझता हो, उन मुद्दों पर उसे मुखर रूप से न बोलने के लिए धमका सकता है।

रोचक बात यह है कि मुख्यधारा मीडिया के डिजिटल प्रकाशक जिन्होंने डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स असोसिएशन नामक एक संघ बनाया है, उस संघ ने भी इन नियमों से छूट की माँग उठाई है। उनका दावा है कि प्रेस परिषद के नियमों का वे पहले से ही अनुपालन कर रहे हैं इसलिए नए नियम की आवस्यकता नहीं है।

यह एक बड़ी बात है। जिन लोगों के पास उच्च लागत वाली अनुपालन संरचनाओं का भार उटाने का सामर्थ्य है, जब वे भी इस तरह की छूट की माँग कर रहे हैं तो किस नैतिक आधार पर ऐसी लागत का भारत स्वतंत्र डिजिटल प्रकाशकों पर थोपा जाएगा जिनके पास पहले से ही कम संसाधन हैं और अपने अस्तित्व के लिए वे संघर्ष कर रहे हैं।

अवश्य ही इन नियमों का उद्देश्य बुरा नहीं है लेकिन ये नियम सीधे कहा जाए तो अस्वीकार्य हैं। यदि विचार यह है कि मुख्यधारा मीडिया के आधिपत्य के विरुद्ध समाचार प्रसार में शक्तिशाली डिजिटल आवाज़ें उभरें तो ये नियम स्वीकार नहीं किए जा सकते।

समान स्तर देने के नाम पर डेविड और गोलिएथ (एक कमज़ोर और शक्तिशाली व्यक्ति) का मुकाबला नहीं कराया जा सकता।

जगन्नाथन स्वराज्य के संपादकीय निदेशक हैं। वे @TheJaggi के माध्यम से ट्वीट करते हैं।