विचार
बिटकॉइन क्यों नहीं खरीदना चाहिए भारत को

“बिटकॉइन चूहे मारने वाला विष है”, निवेश गुरु चार्ली मंगर कहते हैं। उनके मित्र वॉरेन बफे भी इसे पसंद नहीं करते। वे इसे “चूहे मारने वाले विष से भी अधिक घताक” कहते हैं। बिल गेट्स इसे “उन्मादपूर्ण काल्पनिक चीज़ों में से एक” मानते हैं।

देश में देखें तो राकेश झुनझुनवाला भी इसका समर्थन नहीं करते हैं। ये लोग गलत नहीं हैं। भविष्य कोई नहीं देख सकता लेकिन अपेक्षा है कि यह लेख खुदरा निवेशकों को सोचने पर मजबूर करेगा जो अपनी बचत को बिटकॉइन में “निवेश” करना चाहते हैं।

ब्लॉकचेन क्या है?

बिटकॉइन की आधार संरचना, ब्लॉकचेन को बिना शब्दजाल के समझते हैं। विश्व के विभिन्न भागों में दो लोगों के बीच इसके माध्यम से बेनामी लेन-देन हो सकता है। ब्लॉकचेन एक वितरित अडिग खाता है। खाता यानी लेन-देन को ट्रैक करने वाला। वितरित मतलब कि लेन-देन एक सर्वर में संचित नहीं रखे जाते बल्कि विभिन्न डाटाबेस के रूप में रखे जाते हैं।

हर लेन-देन नेटवर्क की कई मशीनों से होकर गुज़रने के बाद सत्यापित होता है इसलिए हैकर के पास हमला करने के लिए कोई एक बिंदु नहीं है। अडिग का अर्थ यह कि अ और ब के बीच कोई लेन-देन एक ब्लॉक की तरह होता है जो चेन की पहली कड़ी बनता है। ब से स का लेन-देन उस चेन की दूसरी कड़ी बनेगा। इस प्रकार रिकॉर्ड रहेगा कि लेन-देन के बीच मूल्य कैसे बदला।

गैर-तकनीकी पाठकों को सरल रूप से मुख्य फीचर्स समझाने का प्रयास है। इन फीचर्स के कारण हैकर डाटाबेस में लेन-देन का रिकॉर्ड परिवर्तित नहीं कर सकता है। यदि वह ब्लॉकचेन नेटवर्क की सभी मशीनों तक पहुँच भी बना ले तो भी उसके द्वारा किया गया लेन-देन उस चेन में एक नए ब्लॉक की तरह ही जुड़ेगा और इसलिए उसे वापस किया जा सकता है।

प्रतीकात्मक चित्र

बिटकॉइन क्या है?

ब्लॉकचेन संरचना का उपयोग करते हुए एक बेनामी व्यक्ति या समूह (कोई नहीं जानता) ने बिटकॉइन नामक एक समाधान बनाया है। प्रतीत होता है कि प्राप्त करने के लिए मात्र 2.1 करोड़ बिटकॉइन उपलब्ध हैं जिनमें से 1.85 करोड़ खरीदे जा चुके हैं। प्रत्यक्ष रूप से हम आखिर चरण में हैं।

अनुत्तरित प्रश्न- उपरोक्त जानकारी के बाद कुछ प्रश्न मन में आते हैं।

  1. कौन बिटकॉइन का मालिक है? क्यों वे हर कॉइन को 40,000 डॉलर के आसपास के मूल्य पर बेचते हैं? क्यों मैं स्वयं एक नई मुद्र बनाकर खरबपति न बन जाऊँ?
  2. मैं कैसे विश्वास कर लूँ कि जिन लोगों के पास अधिकांश कॉइन (1,000 लोगों के पास 40 प्रतिशत कॉइन हैं) हैं, वे उच्च मूल्य पर इसे बेचकर मुझे कम मूल्य वाले बिटकॉइन पर नहीं छोड़ देंगे?
  3. यदि बेनामी लेन-देन हो रहा है तो मैं इस बात को लेकर कैसे निश्चित होऊँ कि मैं जिससे बिटकॉइन खरीद रहा हूँ, वह गलत व्यक्ति यानी आतंकवादी या प्रतिबंधित देश, आदि नहीं है?
  4. मुझे कैसे पता चलेगा कि यह गेमस्टोप का ही दूसरा रूप न हो? शुरू में इसे खरीदने वाले इस बेचकर, बाज़ार गिराकर मेरा निवेश डुबा सकते हैं।
  5. मूल्य ऊपर-नीचे होता रहता है तो लोगों या देशों के बीच व्यापार संभव है?
  6. यदि बिटकॉइन भविष्य की डिजिटल मुद्रा है तो इतनी कम विश्वसनीय संस्थाएँ (जैसे टेसला) क्यों बिटकॉइन को स्वीकार रही हैं?

बिटकॉइन के समर्थन में कुछ तर्कों को मेरा उत्तर-

1. क्रिप्टो अब खरब डॉलर का उद्योग है

तर्क दिया जा रहा है कि क्रिप्टो अब खरब डॉलर का उपयोग है और यह “बड़ी बात है”। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), वर्ल्ड बैंक और लैरी समर्स के कुछ आधिकारिक आँकड़ों के सहारे से वे “गुणात्मक टिप्पणी” करते हैं। क्रिप्टो मुद्रा के लाभ बताकर भी बिटकॉइन खरीदने की वकालत की जा रही है।

लेकिन प्रश्न यह है कि बेनामी गैर-संप्रभु लोगों द्वारा बनाई गई मुद्रा में निवेश किए बिना क्या हम क्रिप्टो मुद्रा तकनीक का लाभ नहीं उठा सकते? साथ ही आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक के जिन कथनों को समर्थन के लिए उपयोग किया जा रहा है, वे क्रिप्टो मुद्रा की बात करते हैं। बिटकॉइन खरीदने के लिए कोई समर्थन नहीं है।

2. राष्ट्रीय सुरक्षा- क्रिप्टो का अर्थ कि भारत को मंच से नहीं हटाया जा सकता

कहा जा रहा है कि बिटकॉइन डिजिटल सोने की तरह है जिसे कोई राज्य जमा या जब्त नहीं कर सकता। यदि सरकार कश्मीर घाटी के अलगाववादियों या स्लीपर सेल्स जो दूसरा 26/11 हमला करना चाहते हैं, उन तक पैसा जाने से नहीं रोक सकती है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लाभकारी कैसे है? अवश्य ही कुछ सुरक्षा होनी चाहिए कि सरकार अपनी शक्तियों का दुरुपयोग न कर सके लेकिन एक छोटे बच्चे को नहाने के पानी में अकेले छोड़ देना मूर्खता है।

दूसरा तर्क है कि 2008 कि आर्थिक मंदी या 2020 में कोविड के कारण गिरावट जैसी परिस्थितियों को झेलने के लिए भारत को वित्तीय रेल की तरह डिजिटल सोने को प्राथमिकता देनी चाहिए। कोविड मंदी से पहले बिटकॉइन का मूल्य लगभग 10,000 डॉलर प्रति कॉइन था। मार्च 16 तक यह 5,000 डॉलर पर गिर गया था। यदि यह हमारा वैकल्पिक सहारा होता, तो भगवान ही बचाए।

मंच से हटाया जाना बुरा लग सकता है और चुनाव जीतने में समस्या हो सकती है लेकिन यह “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिए हानिकारक तो नहीं ही है।

3. विदेशी निवेश- क्रिप्टो भारत में पूँजी लेकर आएगा

समर्थक कहते हैं कि क्रिप्टो मुद्रा पर प्रतिबंध लगाने से भारत में पूँजी नहीं आएगी। फिर से वही बात, भारत सरकार बिटकॉइन पर प्रतिबंध लगाना चाहती है, न कि ब्लॉकचेन पर। आप सोचिए कि यदि कोई दागी नौकरशाह या राजनेता रिश्वत लेना चाहता है तो क्या यह उसके लिए सरल नहीं होगा कि बिटकॉइन में रिश्वत लेकर विदेश में इसे सुरक्षित रूप से जमा कर दे?

क्या यह भारत के वित्तीय तंत्र से पूँजी बाहर लेकर नहीं जाएगा? इसके अलावा यदि कोई निवेशक सच में निवेश करना चाहता है तो उसके पास विकल्प है कि वह यूएस डॉलर या यूएस फेडरल रिज़र्व द्वारा बनाई क्रिप्टो मुद्रा में निवेश कर सकता है। सरकार को किसी भी नीति के लाभ और हानि दोनों पर विचार करना चाहिए।

“अरबों डॉलर क्रिप्टो मुद्रा के रूप में भारत आएँ” यह कल्पना तब रुचिकर नहीं लगती जब हम यह सोचें कि इनमें से कुछ पैसे असामाजिक तत्वों द्वारा कुटिल उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाए जाएँगे और तब देश में बुरी कानून व्यवस्था के कारण पूँजी भारत से बाहर जाएगी।

4. प्रेषण और दूरस्थ- क्रिप्टो से दूरस्थ अर्थव्यवस्था को बल मिलता है

समर्थक मानते हैं कि दूरस्थ क्षेत्रों से प्रेषण क्रिप्टो मुद्रा के कारण तेज़ होगा। मैं उनसे सहमत हूँ।

वैश्विक लेन-देन के लिए संप्रभु द्वारा जारी क्रिप्टो मुद्रा सहायक होगी। वर्तमान में विदेश से भारत पैसे भेजने में कम से कम तीन से चार दिन लगते हैं। डिजिटल मुद्रा के कारण तेज़ लेन-देन अवश्य ही इस प्रक्रिया को गति देंगे।

5. सशक्त मुद्रा नीति- डिजिटल रुपये जिसे डिजिटल सोने का सहयोग हो

समर्थकों का कहना है कि डिजिटल रुपये को डिजिटल सोने का सहयोग होना चाहिए क्योंकि “राष्ट्रीय मुद्राओं के डिजिटलीकरण के साथ मूल्यवान धातु समकक्ष का भी डिजिटलीकरण होगा।” ऐसे में निम्न बिंदुओं पर ध्यान दें-

  • आज के बाज़ार में पहले से डिजिटल सोने का व्यापार हो रहा है। प्रायः इसके पीछे वास्तविक सोना होता है।
  • भावी बाज़ारों में भी मूल्यवान धातुओं का व्यापार डिजिटल रूप से होता है जिनके पीछ वास्तविक धातु होते हैं।
  • बिटकॉइन जैसी तेज़ी से परिवर्तनशील (वाष्पशील) मुद्रा किसी भी देश के लिए “रणनीतिक रिज़र्व” नहीं हो सकती।
  • बिटकॉइन की कमी है, यह मात्र एक फैलाई गई बात है। हमें क्या पता कि जिन लोगों ने बिटकॉइन बनाया है, वे लालची नहीं होंगे और भविष्य में और कॉइन जारी नहीं करेंगे?

6. वित्तीय धोखाधड़ी पर रोक- क्रिप्टो अर्थात् गणित आधारित गणना

समर्थक यह सही कहते हैं कि ब्लॉकचेन आधारित गणना लाभदायक है और भारत को इसका समर्थन करना चाहिए। मैं मानता हूँ कि ब्लॉकचेन की तकनीक ऑडिट, गणना, सुरक्षा और अनुपालन के लिए बहुत आवश्यक है। ब्लॉकचेन नेटवर्क पर आधारित एक डिजिटल मुद्रा जिसके एपीआई खुले हों, वह भी ये सारी विशेष सहायताएँ प्रदान कर सकती है।

7. तकनीकी विकास- क्रिप्टो वित्तीय इंटरनेट है

समर्थक दावा करते हैं कि यदि भारतीय बिटकॉइन नहीं खरीद सकेंगे तो वे तकनीक की अगली पीढ़ी में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ जाएँगे। बिटकॉइन मात्र ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित एक मुद्रा है, यह स्वयं में ब्लॉकचेन नहीं है। इसलिए बिटकॉइन पर प्रतिबंध का अर्थ ब्लॉकचेन के नवाचार पर प्रतिबंध नहीं है।

स्मार्ट अनुबंध, मूल्य हस्तांतरण, विकेंद्रित क्राउडफंडिंग आदि क्षेत्रों में नवाचार बिटकॉइन के बिना भी हो सकता है। इसके अलावा यह आवश्यक है कि विश्लेषक जिस संपत्ति में निवेश का सुझाव देते हैं, वह यह भी सार्वजनिक करें कि उनका इसमें कितना निवेश है।

कुल मिलाकर मेरा मानना है कि बिटकॉन के प्रति आकर्षण उन लोगों में है जो इसे आंशिक रूप से ही समझते हैं। वहीं, दूसरी ओर व्यवसायिक व्यापारी इस उत्साह को देख रहे हैं लेकिन परिवर्तनशीलता का लाभ उठाकर पैसा बनाना चाहते हैं। हालाँकि, मंगर का मानना है कि बिटकॉइन का अंत अच्छा नहीं होगा।

लेखक न्यू जर्सी, यूएस में रहने वाले तकनीकी व्यवसायी हैं जो वितरित गणना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में काम करते हैं। वे वित्तीय सलाहकार नहीं हैं और उपरोक्त विचारों के आधार पर आप निवेश योजनाएँ न बनाएँ।