विचार
भोपाल स्टार्ट-अप कॉन्क्लेव: नवीनीकरण के लिए सही राह बनता हुआ
भोपाल स्टार्ट-अप कॉन्क्लेव

प्रसंग
  • ­द फ्यूचर ऑफ़ एमपी:स्टार्टअप कॉन्क्लेव,मध्य प्रदेश के युवा उधमियों और संभावनाशील निवेशकों के विचारों, उत्पादों और योजनाओं के आदान प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच साबित हुआ। 

असाधारण सपनों वाले साधारण लोगों ने भोपाल में आयोजित हुए द फ्यूचर ऑफ़ एमपी:स्टार्टअप कॉन्क्लेव में सफलता का स्वाद चखा।

देश के शीर्ष स्टार्ट-उप संस्थापकों ने असाधारण सपने, साधारण लोग विषय के अंतर्गत उद्यमशील उद्यम के लिए अपनी सफलता के विचार 29 सितम्बर को भोपाल में हुए ‘द फ्यूचर ऑफ़ एमपी:स्टार्टअप कॉन्क्लेव’ में साझा किये।

भोपाल के इन्क्यूबेशन सेण्टर ऑफ़ स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट के बी-नेस्ट में आयोजित हुआ यह कॉन्क्लेव मध्य प्रदेश के युवा उधमियों और संभावनाशील निवेशकों के विचारों, उत्पादों और योजनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी मंच साबित हुआ।

भोपाल के बहार से भी आये विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया । आईआईएम इंदोरे, आईआईएम-ग्वालियर , उजजैन इंजीनियरिंग कॉलेज, एसजीएसआई-इंदौर, ज्ञान गंगा इंस्टीटूट ऑफ़ साइंस एंडटेक्नोलॉजी-जबलपुर और सागर यूनिवर्सिटी के विद्यार्थीयों ने पनेल्लिस्ट से विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत की। इस कॉन्क्लेव को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के स्टार्ट-अप के समकक्ष कहा जा सकता है। इसमें 4 शिक्षाप्रद सत्र हुए , जिसमें पेनाल्लिस्ट्स के साथ-साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कान्त द्वारा साझा अंतर्दृष्टि शामिल थी।

पहले सत्र की थीम “सीक्रेट सॉस ऑफ सक्सेस” थी, इसमें सफल उद्यमियों और स्टार्ट-अप संस्थापकों ने छात्रों और महत्वाकांक्षी उद्यमियों के साथ अपने विचार साझा किए। नेटलिंक के संस्थापक और सीईओ अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना किसी भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होता है। प्रताप स्नैक्स के संस्थापक अमित कुमार कामथ और कारवाले एंड चलो के संस्थापक मोहित दुबे ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि अच्छे विचार हमेशा आपकी कंपनी को आगे ले जाएंगे और अच्छे विचारों के लिए धन भी आसानी से उपलब्ध होगा। फ्लाईरोब की संस्थापक श्रेया मिश्रा ने कहा कि किसी भी उद्यमी को अपने विचारों को जाहिर करने में अधिक ध्यान देना चाहिए और इस बात को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए कि उनके विचारों को कोई चुरा लेगा।

दूसरा सत्र नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के साथ बातचीत से शुरू हुआ जिन्होंने मध्य प्रदेश में 500 नए इनक्यूबेन सेंटर खोलने की नीति आयोग की घोषणा की। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी, स्टार्ट-अप और युवा उद्यमियों का योगदान बहुत ही महत्नपूर्ण है। उन्होंने इस तथ्य की सराहना की कि मध्य प्रदेश उद्यमिता विकास केन्द्र स्थापित करने वाला पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा तथा कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अधिकतम स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए भी राज्य की प्रशंसा की।

कांत ने जोर देते हुए कहा कि युवाओं को उद्यमिता और नवाचार के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए और नीति आयोग का यही मकसद भी है। उन्होंने दर्शकों से कहा कि असफलताएं हर स्टार्ट-अप का एक हिस्सा होती हैं जो ज्यादा दिनों तक नहीं रहतीं । कांत ने इस बात पर खुशी जाहिर की कि कई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के बजाय अपना स्टार्ट-अप शुरू करने के इच्छुक हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि 1,100 बहुराष्ट्रीय केन्द्रों ने भारत में अपने शोध एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित किए हैं जिससे देश के करीब 80,000 लोगों को रोजगार मिला है। उनके शब्दों में, “यह सभी बदलाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि दुनिया हमारी युवा प्रतिभा को पहचान रही है।”

दूसरे सत्र में मुख्यमंत्री ने एक भाषण भी दिया, जिसमें उन्होंने याद दिलाया कि लगभग एक दशक पहले, शब्द स्टार्ट-अप राज्य में कहीं भी नहीं बोला जाता था जो ‘बिमारू’ शब्द का पर्याय बन गया था। चौहान ने समझाया कि कैसे उनकी पहली जिम्मेदारी राज्य सरकार को साथ लेते हुए राज्य के प्रमुख कृषि क्षेत्र की समृद्धि सुनिश्चित करना था क्योंकि राज्य का 65 प्रतिशत हिस्सा इस पर निर्भर था। इसलिए, उनकी सरकार ने राज्य के विकास को बढ़ावा देने के लिए कृषि को एक लाभदायक व्यवसाय बनाने का फैसला किया। ऐसा करने के लिए, मुख्यमंत्री ने खेती और सिंचाई दोनों के तरीकों में संशोधन लाने का फैसला किया। उन्होंने यह बताया कि उन दिनों में राज्य की दो प्रमुख नदियों, नर्मदा और शिप्रा को जोड़ने का एक विचार परिवर्तनात्‍मक था। इस विचार ने मलावा को बंजर रेगिस्तान बनने से बचाया।

कृषि के बारे में बात करने के अलावा मुख्यमंत्री ने इस बारे में बताया कि राज्य के कितने छात्रों के पास लैपटॉप हैं जबकि एक दशक पहले राज्य में उन्हें चार्ज करने के लिए पर्याप्त बिजली भी नहीं थी। आज, राज्य 18,800 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है जिसने दोनों, किसानों के साथ-साथ राज्य के निवासियों, की मदद की है। कृषि अर्थव्यवस्था की मूलभूत बातें तय करने के बाद, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने कैसे सुनिश्चित किया कि युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। इसे सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में कक्षा 12वीं कक्षा की परीक्षा में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की और राज्य शिक्षा बोर्डों के लिए 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की उच्च शिक्षा शुल्क का भुगतान करने का फैसला किया।

स्टार्ट-अप संस्कृति की उछाल पर पूंजीकरण के लिए मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में उद्यमशीलता गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये की स्टार्ट-अप निधि की घोषणा की है। चौहान ने बी-नेस्ट इनक्यूबेशन सेंटर द्वारा की गई प्रगति की सराहना की, जो वर्तमान मे भोपाल से 30 स्टार्ट-अप्स की मेजबानी करता है। उन्होंने घोषणा की कि स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए इसी तरह के केंद्र सभी अन्य स्मार्ट शहरों- इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और सतना में खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री ने दर्शकों को बिना पूर्व ट्रैक रिकॉर्ड के नए स्टार्ट-अप्स,जो सरकार के साथ काम करने में रूचि रखते हैं, की मदद करने का अपना फैसला याद दिलाया।उन स्टार्ट-अप्स के लिए निविदा की प्रक्रिया के बिना 30 लाख रुपये तक की खरीद को सक्षम करने के लिए संशोधन किए जाएंगे।

चौहान ने बिना ब्याज के अन्वेषक ऋण देकर स्टार्ट-अप्स की मदद करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश को निवेश के लिए देश में नंबर एक राज्य बनाने के लिए विचारों और नवाचारों के साथ युवाओं से इसमें शामिल होने का आग्रह किया।

उसी सत्र में, इम्पीटस टेक्नोलॉजीज़ के संस्थापक और सीईओ प्रवीण कंकारीया ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि स्टार्ट-अप में रुचि रखने वालों लोगों को अपना लक्ष्य ऊंचा और सोच व्यापक रखनी चाहिए। आरटी ग्लोबल इन्फोसॉल्यूसन के संस्थापक और सीईओ राहुल गुप्ता ने कहा कि स्टार्ट-अप में तीन M – मनी, मेनोटरिंग और मार्केट (धन, सलाह  और बाजार) बहुत अहम हैं, इसमें से ध्यान और बाजार तो बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

‘ईज ऑफ स्टार्टिंग अप’ के सत्र में डेलॉइट डिजिटल के हिस्सेदार नीरज अरोड़ा ने जोर देते हुए कहा कि आने वाले युवाओं को नवीनतम तकनीकि के सहयोग से बाजार तक पहुँच हासिल करनी चाहिए। अंतिम सत्र में, महत्वाकांक्षी उद्यमियों ने कॉन्क्लेव में निवेशकों के सामने सात मिनट की पिच प्रस्तुत की। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कॉन्क्लेव  ने राज्य को भविष्य की स्टार्ट-अप गतिविधियों के लिए एक केन्द्र बिन्दु बनाने के लिए प्रक्रिया शुरू की है। इस सम्मेलन की सफलता निश्चित रूप से उभरते उद्यमियों के लिए अपने अभिनय के विचारों को निष्पादित करने के लिए मध्य प्रदेश को एक उपयुक्त स्थान बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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