विचार
शाहरुख खान की अशोका की समीक्षा- यह फिल्म स्टार नहीं ब्लैक होल पाने के लायक
अमित - 26th November 2018

27 नवंबर को हॉकी विश्वकप का उद्घाटन हो रहा है। यह उद्घाटन समारोह भुवनेश्वर के कलिंग स्टेडियम में होगा जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री के अलावा शाहरुख खान भी शामिल होंगे। इस पर कलिंग सेना ने चेतावनी दी है कि शाहरुख 17 साल पहले बनी इस फिल्म के लिए माफी माँगे क्योंकि इस फिल्म से ओडीशा के लोगों की भावनाएँ आहत हुई थीं। अगर वे माफी नहीं माँगेगे तो सेना उन पर स्याही फेंकेगी, काले झंडे दिखाएगी और उनका विरोध करेगी।

एक शासक के तौर पर अशोक का शासन आज से 2286 साल पहले शुरू हुआ था। इतिहास की भाषा में इसे 268 ईसा पूर्व कहते हैं। इतने समय पहले सम्राट रहे अशोक के जीवन पर 17 साल पहले बनी फिल्म की समीक्षा आज की जाए तो क्या यह अप्रासंगिक मानी जाएगी? लेकिन संदर्भ उपरोक्त है।

अगर आप इतिहास से प्रेम करते हैं तो महान मौर्य सम्राट अशोक, उसके कार्यों और काल के बारे में पढ़ते हुए आपका ध्यान किताब से हट जाता है और सामने की दीवार या किसी चीज को देखते हुए आपके चेहरे पर एक मुस्कान आती है और (अशोक के कारण) आप मन ही मन इतराते हैं… “कुछ भी हो, कल भी हम औरों से अलग थे, आज भी हम अलग हैं!”

जिस समय अशोक ने मगध की गद्दी संभाली, उस समय तक मैसीडोनिया का शासक सिकंदर (अलेक्जेंडर) तलवार के दम पर साम्राज्य विस्तार कर महानता की परिभाषा तय कर चुका था। उसने तलवार के बल पर राजाओं को हराया और तलवार के बल पर ही शासन किया। लेकिन उसके लगभग 50-60 साल बाद अशोक ने यह नीति बदल दी। इसीलिए उसकी विजय इतिहास में महानता की उस परंपरा में नहीं आती, जिसमें सिकंदर, चंगेज़ खान या बाद में यूरोपीय शक्तियों के साम्राज्य आते हैं। उसने ‘धम्म विजय’ की नीति अपनाई जिसने हमें ‘चंड’ अशोक से ‘धम्म’ अशोक के रूप में ऐसा शासक दिया, जो संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप पर शासक बना। अशोक के काल में बौद्ध धर्म प्रेम-सहिष्णुता का संदेश लिए एशिया महाद्वीप के अन्य देशों में पहुँचा।

लेकिन यह फ़िल्म एकदम हटकर है। तीन घण्टे की इस फ़िल्म में फर्स्ट हाफ सिर्फ और सिर्फ अशोक (शाहरुख़ खान) की वह ‘अप्रासंगिक’ प्रेम कहानी कहता है, जिसका आम-प्रचलित इतिहास में कहीं वर्णन नहीं मिलता। इतिहास के एक विषय पर बनी इस फिल्म में यह प्रेम कहानी देखकर शायद दर्शक ऊब जाएँ और उम्मीद करें कि मध्यांतर के बाद फ़िल्म ‘धम्म’ अशोक के बारे में कहानी कहेगी तभी फ़िल्म में एक आइटम नंबर आ जाता है (कोई प्रणय गीत भी कह सकता है)। जी हाँ, सही पढ़ा आपने, आइटम नंबर! फिल्मों में गानों के प्रति दीवानगी ऐसी कि इसमें 30 मिनट गानों में ही निकल जाते हैं। जबर्दस्ती 5-6 प्रेम-गीतों को ‘ठूँसा’ गया है।

फिल्म को देखना समय काटने जैसा है। एक दर्शक प्रतीक्षा करता है कि अशोक का यह ‘इश्क़’ कब खत्म हो और कब इतिहास शुरू हो। लेकिन फिल्म की पटकथा प्रतीक्षा ख़त्म करने के लिए नहीं लिखी गई है। एक प्रेम कहानी शुरू हुई तो दूसरी शुरू हो गई! जब एक घंटा बचता है तो फिर एक प्रेम गीत!

यह ठीक है कि ‘चंड’ अशोक, यानी अशोक की क्रूरता दिखाने के लिए फिल्म में कोशिश की गई है लेकिन वह भी कामचलाऊ से ज्यादा कुछ नहीं है। बौद्ध ग्रंथों में जिक्र है कि वह अपने 99 भाइयों की हत्या करके मगध का राजा बना था।  36 वर्ष के अपने शासन काल मे अशोक ने 8वें वर्ष कलिंग (आज का ओडीशा) पर चढ़ाई की थी। इस लड़ाई में हुई मार-काट को देखकर वह द्रवित हो उठा और फिर हमेशा के लिए बदल गया। लेकिन जिस हृदय परिवर्तन के बाद अशोक ने हमें इतराने का मौका दिया, वह हृदय परिवर्तन फ़िल्म में तब आया, जब फ़िल्म ख़त्म होने में महज़ 10-11 मिनट्स बचे थे। और उसके इस हृदय परिवर्तन का मुख्य कारण था, कलिंग की लड़ाई में उसकी बिछड़ी हुई प्रेमिका (जो फिल्म में पहली पत्नी भी थी) ‘कौरुकी’ (करीना कपूर) का मिलना… उफ़्फ़! हाय रे इतिहास! तेरे अंजाम पर रोना आया!

राजा को पिता और प्रजा को पुत्र की तरह मानने का आदेश देने वाले ‘देवनामपिय’ (देवताओं का प्रिय) अशोक के जीवन पर बनी यह फिल्म इतिहास न दिखा पाने के कारण उबाऊ कही जा सकती है।

‘कलिंग सेना’ इस फ़िल्म को लेकर 17 साल बाद शाहरुख़ खान का विरोध कर रही है। कलिंग सेना का कहना है कि फ़िल्म में कलिंग  और उसके लोगों को जिस तरह से दिखाया गया है, उससे उनकी भावनाएँ आहत हुई हैं। इतिहास पसंद करने वाले और उसी को इसमें खोजने वाले एक दर्शक के तौर पर भावनाएँ तो मेरी भी आहत हुई हैं।

इस फ़िल्म को तारे-सितारे (स्टार) नहीं दिए जा सकते। इतिहास के एक बेहतरीन विषय से खिलवाड़ करने के लिए यह फ़िल्म ‘ब्लैक होल’ पाने की हक़दार है, जिसमें समय के साथ इतिहास को भी दफनाया गया है। इस ब्लैक होल से न तो अशोक के ‘धम्म’ का संदेश मिलता है और न ही यह उम्मीद कि आने वाले समय में बॉलीवुड इतिहास से न्याय कर पाएगा।

यह लेख लेखक के व्यक्तिग विचारों पर आधारित है।