विचार
शिकायती हिंदू को एक संदेश

आशुचित्र- …क्योंकि वह कहीं से भी कुछ सीखता हुआ नहीं दिखता। उसके पास अपना कार्य है और ट्विटर भी। वह ऐसे ही आगे निकल जाता है।

नमस्कार,

आशा है कि तुम पिछले सप्ताह की तुलना में बेहतर महसूस कर रहे हो। शुरुआत में ही मेरा कथन होगा कि तुम लोग दयनीय हो तथा मेरे अंदर अब तुम्हारे लिए कोई प्यार नहीं बचा है। मेरा यह लेख सिर्फ यह बताने के लिए है कि तुम्हारे निजी तथा सार्वजनिक रूप से उदासीनता की ओर लौट जाने से मेरे अंदर रोष है तथा मैं दुखी हूँ।

तुमने अपना संतुलन खोया और अपने अन्य कमज़ोर तथा तर्कशून्य मित्रों के साथ सार्वजनिक मातम में लिप्त हो गए। इसे देख लगता है जैसे कि तुम इस अवसर का इंतज़ार ही कर रहे थे। यह सत्य है कि तुम्हारी पसंदीदा पार्टी तीन प्रमुख राज्यों में चुनाव हार गई। तो क्या? तुम ऐसे कराह रहे हो जैसे कि दुनिया का अंत हो गया। क्या तुमने कभी निजी ज़रूरतों का त्याग कर प्रचार में सहयोग दिया? मुझे ऐसा नहीं लगता। तुम्हें कुछ लेख पसंद आए, तुमने कुछ बेवकूफों से सड़कों पर नहीं ट्विटर पर लड़ना आरंभ कर दिया।

तुम्हें कोई परवाह नहीं थी कि करीबी मुकाबलों में वोटों का क्या हिस्सा रहा और उसमें कुछ बढ़ोतरी भी लोकसभा चुनावों में किस तरह से बड़ा अंतर ला सकती है। हार के लिए दुखी होना तथा यह सोचना कि कांग्रेस अपनी जीत के बाद क्या करेगी स्वाभाविक है लेकिन तुमने अपने दोस्तों के साथ ट्विटर पर शिकायतों की झड़ी लगा दी। तुम इन्हें रीट्वीट कर रहे हो और बेतुके अनुमान लगा रहे हो तथा बहिर्वेशन कर रहे हो।

तुमने इतिहास से क्या सीखा? मेरा आशय उस इतिहास से नहीं है जो किताबों में छपा है अपितु उससे जिसे तुमने कड़े परिश्रम से पार किया है। एक दूसरे का हाथ मरोड़ने से हमें क्या मिला है? किस तरह से विभाजित हिंदुओं का फायदा संगठित मुग़लों और अंग्रेजों ने उठाया था, क्या तुमने इससे कुछ नहीं सीखा? अच्छा, तो वो इतिहास था और उससे सीख लेने की कोई ज़रूरत नहीं। क्या ऐसा है?

यदि इतिहास से नहीं तो अंग्रेज़ तथा मुग़लों के बाद उदार बुद्धिजीवियों से क्या सीखा। उन्होंने हर छात्र संघ तथा उपचुनावों में विजय की खुशी मनाई और उसे एक विराट रूप दिया। छोटे दुष्टों से बने बड़े नायकों ने क्या किया। उन्होंने इंतज़ार किया, संगठित हुए, खुद को पुन: सशक्त किया और कभी कमज़ोरी प्रदर्शित नहीं की। पुन: कभी कमज़ोरी प्रदर्शित नहीं की।

यदि यह तुम्हारा रवैया है तथा वह उनका तो वे तुम पर राज करने की पात्रता रखते हैं। स्वाभाविक ही है कि तुम्हें कभी कहीं से कुछ सीखने की चाह ही नहीं है। तुम्हारे पास तुम्हारा कार्य है तथा ट्विटर और तुम ऐसे ही आगे निकलना चाहते हो।

अब तुम्हें आईटी सेल से भी नफरत हो गई है। क्या तुम्हें यह नहीं पता कि वह उसी पार्टी के ही प्रचार-प्रसार का संसाधन है। उसका अपने पार्टी अध्यक्ष को जन्मदिन की मुबारक देना स्वाभाविक है और राहुल गांधी की त्रुटियों को छिपाना उनका कार्य है। लेकिन तुमने सोचा कि वे सीता राम गोयल तथा राम स्वरूप जैसे बुद्धिजीवी हैं। एक बात कहना ठीक होगा कि यदि तुमने ऐसा सोचा तो तुम मूर्ख हो। वे अपनी पीड़ा खत्म करने के लिए कदम उठाएँगे, इसमें उनका दोष नहीं है।

तुम्हारे अपने ही नेता जानते हैं कि तुम कमज़ोर हो तथा इसी कारण तुम्हारा फायदा ले लिया जाता है। तुमने कभी नहीं सोचा कि सारे हिंदू संबंधित मुद्दे चुनावों के समीप क्यों उठाए जाते हैं। इसका सीधा सा अर्थ है कि उन्हें केवल तुम्हारे वोट की फ़िक्र है जो तुम उन्हें देकर फिर कराहना शुरू कर दोगे। क्या तुम्हें नहीं लगता कि यदि वे वास्तविक रूप से किसी विचारधारा से आगे बढ़ते तो अवश्य ही राम मंदिर मुद्दे का हल निकाला होता। तुमने खुद को मूर्ख उन्हें बनाने दिया। उन्होंने “आपातकाल के दौरान प्रजातंत्र की लड़ाई” की कहानी भी खूब रची थी। देखो कि ट्रम्प ने पिछले दो सालों में क्या किया! (इस पत्र को लिखते हुए मेरी पीड़ा भी जताई जा रही है।)

कुछ सत्य बातें कहना है लेकिन उसके पहले तुम्हें अपने दिमाग से पीड़ा का भुभ्रंग निकालना होगा। तुम्हारे समक्ष अगली लड़ाई में मोदी और राहुल हैं। यदि राहुल जीते तो औपनिवेशिक तथा दरबारी विचारधारा जीतेगी और राज करेगी। वे भारत को पुन: लूट लेंगे।

यदि मोदी जीते तो फिर से मोदी का राज होगा। न तो किसी विचारधारा का, न किसी देशभक्त का, न किसी मंत्री का, सिर्फ मोदी तथा पीएमओ के कुछ सहयोगियों का राज होगा। वह भ्रष्टाचार से दूर हैं तथा अल्प करते हैं और उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। लेकिन वह कुछ तो धर्म निरपेक्ष जन कल्याण योजनाएँ लागू करेंगे जैसे- गैस सिलेंडर, बल्ब, अच्छी सड़कें, कुछ चौंकाने वाले निर्णय इत्यादि।

यह तुम जानते हो कि दूर के गाँव में रहने वाली तुम्हारी गरीब हिंदू बहन जो पूजा करती है और उसके पास पीड़ा जताने के लिए ट्विटर जैसी सुविधा नहीं है। उसके मन में यह तसल्ली रहेगी कि किसी हिंदू का राज है। उसने, उसके पति ने तथा उस जैसे लोगों ने इतने लंबे समय से हिंदुत्व को जिंदा रखा है। तुम उसे यह तसल्ली तो दे ही सकते हो।

मेरा कहना इतना ही है कि तुम बड़ा त्याग करो। तुम्हें वायु भक्षण बंद करना चाहिए। एक तरीका है कि क्रिसमस की छुट्टियों में अवश्य ही तुम परिवार तथा दोस्तों से मिलोगे तब जीतनी पीड़ा निकालनी हो निकाल देना लेकिन नए वर्ष में पूरी नकारात्मकता छोड़ कर प्रवेश करना। तुम कोई कमज़ोरी प्रदर्शित नहीं करोगे, तुम किसी भी प्रकार के संदेह को तुम्हें नियंत्रित नहीं करने दोगे और तुम लड़ोगे। यह मेरी तुमसे विनती है।

सौ से अधिक वर्षों पहले, हमारी विचारधारा के मूलस्रोत लोकमान्य तिलक माण्डले जेल से छ: वर्ष की कैद के बाद रिहा हुए थे। उन्होंने बाहर आते ही “पुन: हरि ओम्” कहना शुरू कर दिया था। वह बहुत ही मज़बूत व्यक्ति थे। तुम उसी परंपरा से संबंध रखते हो।

अपना ध्यान रखना, अच्छे से रहना और मजबूत रहना। प्रार्थना है कि 2019 में पराशक्ति तुम्हारी तरफ हो।

एक अन्य मामाजी