विचार
अक्षय पात्र ने सेवा कार्य के लिए कॉर्पोरेट पद्धति अपनाकर कोविड काल में भूख को दी मात

अक्षय पात्र एक ऐसी संस्था है जो दो दशकों से अधिक से सहस्रों विद्यालयों में लाखों बच्चों को मिड-डे मील (भोजन) पहुँचा रही है लेकिन वर्ष 2020 में आई कोविड वैश्विक महामारी ने स्कूलों को ही बंद करवा दिया। ऐसे में अक्षय पात्र के पास एक सरल विकल्प था कि कुछ समय के लिए अपना काम रोक दिया जाए लेकिन उन्होंने दूसरे कठिन विकल्प को चुना।

समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को समझते हुए अक्षय पात्र ने नेपाल भूकंप समेत कई प्राकृतिक आपदाओं के समय भी खाद्य सहायता पहुँचाई है और ऐसा ही संस्था ने कोविड काल में किया। “हमें लगा कि अक्षय पात्र के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग खाद्य राहत पहुँचाने के लिए करना चाहिए और इसलिए हमने ‘फूड फॉर एजुकेशन’ के बजाय ‘फूड फॉर रिलीफ’ को अपनी रणनीति बनाया।”, संस्था के सीईओ श्रीधर वेंकट ने बताया।

श्रीधर के अनुसार पिछले 11 महीनों में अक्षय पात्र ने अपनी सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर 14 करोड़ थालियों से लोगों का पेट भरा है। इसमें उनका उद्देश्य दिहाड़ी पर काम करने वाले श्रमिकों, औद्योगिक कर्मचारियों, बेरोजगार लोगों जैसे कमज़ोर वर्गों तक पहुँचना था। सरकार की सहायता से वे अपने प्रयासों को 18 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में पहुँचा सके।

कोविड में भोजन पहुँचाने के साथ-साथ संक्रमण के प्रसार को रोकना भी अति आवश्यक था लेकिन सुरक्षा और स्वच्छता को प्राथमिकता देने वाले अक्षय पात्र ने यह भी कर दिखाया। स्वराज्य से कॉल पर बातचीत में श्रीधर बताते हैं कि वर्चुअल माध्यम से और ज़मीनी स्तर पर स्वयंसेवकों को कोविड सुरक्षा अपनाने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

कुछ नियमों का पालन भी अनिवार्य था जैसे सुरक्षा गार्ड को दायित्व दिया गया कि वे परिसर में आने वाले लोगों को प्रवेश से पहले सैनिटाइज़ेशन, थर्मल स्कैनिंग, आदि प्रक्रियाओं से गुज़ारें। सभी को ग्लव्स एवं फेस मास्क पहनने के सख्त निर्देश दिए गए थे। कोविड महामारी के दौरान माइक्रोसॉफ्ट एवं एक्सेंच्यर की सहायता से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक का भी उपयोग किया गया।

सुरक्षा का ध्यान रखकर भोजन पकाता अक्षय पात्र का कर्मचारी

विशेषकर जिगनी किचन चलाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस उपयोग में लाई गई जिससे सुरक्षा सुनिश्चित हुई। दोनों निजी कंपनियों के साथ अक्षय पात्र की यह पायलट परियोजना थी। वेंकट का मानना है कि निजी कंपनियाँ भी देश के प्रति अपने दायित्व को समझती हैं और इसलिए कई कंपनियों ने आगे से अक्षय पात्र से संपर्क करके सामाजिक कार्य करने की इच्छा व्यक्त की, उन्होंने बताया।

अक्षय पात्र निजी-सार्वजनिक साझेदारी (पीपीपी) मॉडल पर विश्वास करता है और वेंकट कहते हैं कि यह निजी व सामाजिक संगठनों की स्वेच्छा के बिना संभव नहीं हो पाता। वे बताते हैं कि पिछले दो दशकों के सेवा कार्य के कारण निजी कंपनियों के बीच भी संस्था की पहचान बनी है जिससे ये कंपनियाँ अक्षय पात्र से जुड़ने की लालसा रखती हैं।

कोविड महामारी की ओर रुख करने पर अक्षय पात्र ने उन बच्चों का साथ भी नहीं छोड़ा जिन्हें वे विद्यालय में भोजन प्रदान करते थे। लेकिन बच्चे घर पर ही रह रहे थे इसलिए पका हुआ भोजन पहुँचाने की बजाय संस्था ‘हैप्पीनेस किट’ का विचार लेकर आई। इसके अंदर लगभग 20 दिनों का राशन और स्वच्छता संबंधित कुछ उत्पाद होते हैं।

लाभार्थियों तक पहुँचने और सामान की लेन-देन में लीकेज से बचने के लिए ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) जैसी तकनीक का उपयोग किया गया। वेंकट बताते हैं कि जो व्यक्ति ओटीपी दिखाता, उसे हैप्पीनेस किट दी जाती और ऐसा करके लाखों लोगों तक 18 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों में पहुँचा जा सका।

मार्च के महीने से उत्तर प्रदेश, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, आदि राज्यों में विद्यालय खुलने लगे हैं तो संस्था पुनः विद्यार्थियों को भोजन पहुँचाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है लेकिन कोविड-पूर्व समय की तुलना में अभी 10 प्रतिशत भोजन की ही माँग है। धीरे-धीरे माँग पुनः बढ़ने की अपेक्षा के साथ अक्षय पात्र विद्यालय के कर्मचारियों को भी सुरक्षा नियम अपनाने के लिए प्रशिक्षित कर रहा है।

अक्षय पात्र में इस्कॉन से संबंधित भी कुछ लोग हैं लेकिन अपने सेवा कार्य को पंथ निरपेक्ष रखते हुए संस्था अपनी धार्मिक प्रेरणा से भी नहीं डिगी है। “अन्नदान को श्रेष्ठ दान कहा गया है।”, अपने धार्मिक आधार को बताते हुए वेंकट कहते हैं कि इस्कॉन के लगभग 200 मिशनरी संस्था से जुड़े हैं जो वित्त जुटाने, रसोई प्रबंधन जैसे कार्य करके अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

खाद्य राहत के लिए बेंगलुरु में काम करते अक्षय पात्र के कर्मचारी

कुल 8,000 कर्मचारियों वाली संस्था को वेंकट मिशनरी भाव और व्यावसायिक प्रवृत्ति का सटीक मिश्रण बताते हैं। 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में अक्षय पात्र की 53 रसोइयाँ हैं। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अक्षय पात्र ने केंद्रीकृत रसोइयों के विचार को आगे बढ़ाया था जिनकी क्षमता प्रतिदिन 1 लाख थालियों में भोजन परोसने की होती है।

हालाँकि, अब संस्था मोबाइल किचन का प्रयोग भी कर रही है जिसे ‘किचन ऑन व्हील्स’ का नाम दिया गया है। इस वाहन को सेना में काम कर चुके एक व्यक्ति ने डिज़ाइन किया है जिसपर दो घंटों की अवधि में 5,000 थालियों के लिए भोजन बन सकता है। केंद्रीकृत रसोइयों के आधार के साथ अक्षय पात्र सामुदायिक रसोइयों के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।

ओडिशा के नयागढ़ और राजस्थान के बारां जिले में विकेंद्रीकृत रसोई के मॉडल को अपनाया गया है। अक्षय पात्र के 2.0 संस्करण को तैयार करते हुए वेंकट समुदायों के बीच जाने का विचार कर रहे हैं। इसमें केंद्रीकृत रसोई व्यवस्था का लाभ उठाकर सामुदायिक रसोइयों को बढ़ावा दिया जाएगा।

जब संवाददाता ने अक्षय पात्र में वेंकट का अनुभव जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि देश के बच्चों केलिए काम करके जो सुख की उन्हें अनुभूति होती है, उसे वे शब्दों में नहीं व्यक्त कर पाएँगे। 15 वर्षों तक कॉर्पोरेट में काम करने के बाद अक्षय पात्र को 15 वर्षों से सेवा देने वाले वेंकट को अब संतुष्टि होती है।

“मैं प्रतिदिन काम पर आने के लिए उत्साही रहता हूँ। जब आप प्रसन्न बच्चों, प्रसन्न लाभार्थियों को देखते हैं तो आपको लगता है कि आपके जीवन का कोई उद्देश्य है। इस संस्था से जुड़ने के कारण व्यक्तिगत स्तर पर मुझमें काफी परिवर्तन आया है, मुझमें सहानुभूति की भावना बढ़ी है। मैं सकारात्मक महसूस करता हूँ और अगले कई वर्षों तक इसे सेवा देना चाहूँगा।”, वेंकट अपना अनुभव साझा करते हैं।

अक्षय पात्र के सीईओ श्रीधर वेंकट

वे कहते हैं यदि अक्षय पात्र को संस्था की बजाय एक व्यक्ति की तरह देखा जाए तो उसका मस्तिष्क कॉर्पोरेट और हृदय सहानुभूति से भरा होगा। सीईओ संस्था के दानदाताओं, मिशनरियों, सहयोग करने वाली निजी कंपनियों, व्यक्तिगत सहयोग करने वाले लोगों, कर्मचारियों और मीडिया के प्रति भी आभार व्यक्त करते हैं।

अक्षय पात्र ने विस्तार के लिए सरलता का मूलमंत्र अपनाया। वेंकट ने बताया कि यदि आप जटिल सरंचना और प्रक्रिया बनाएँगे तो विस्तार बाधित होगा। दूसरी बात जो उन्होंने सीखी वह थी ध्यान केंद्रित करना, “अक्षय पात्र के 8,000 कार्यालय भूख से लड़ने के एक ही विचार पर केंद्रित हैं।” तीसरी सीख है नवाचारों को स्वीकार करना।

वे अक्षय पात्र की प्रसिद्ध रोटी बनाने वाली मशीन का उदाहरण देकर कहते हैं कि प्रति घंटे 1,000 रोटी बनाने की क्षमता को हम नवाचार की सहायता से बढ़ाकर 40,000 कर पाए हैं। अगले कुछ वर्षों में वे रसोइयों का आकार छोटा करने का प्रयोग, विद्यालय आधारित रसोई के लिए क्या किया जा सकता है, सरकार की अधिक सहायता करने जैसे विषयों पर विचार करेंगे।

अक्षय पात्र की थाली पर विवाद खड़े करने के कुछ प्रयास पहले हो चुके हैं जिनपर वेंकट कहते हैं, “हमारा अंतर्मन साफ है। जब भी इस प्रकार का विवाद खड़ा होता है तो हम कहते हैं कि वैकल्पिक समाधानों और मंचों का हम स्वागत करते हैं। आप अक्षय पात्र के साथ या अलग संस्था के रूप में भूख से लड़ने के लिए काम करना चाहते हैं तो आइए, हम अपने अनुभव से आपकी सहायता करेंगे।”

“विद्यालयी बच्चों के लिए भोजना का उद्देश्य उन तक पोषण पहुँचाना होना चाहिए और हमें विश्वास है कि हम इसे पूरा कर पा रहे हैं। मैं अपने आलोचकों का भी सम्मान करता हूँ क्योंकि वह उनका दृष्टिकोण है। हमारे कुछ नैतिक मूल्य हैं जिनका हम पालन करते हैं और करते रहेंगे।”, वे आगे कहते हैं।

निष्ठा अनुश्री स्वराज्य में वरिष्ठ उप-संपादक हैं। वे @nishthaanushree के माध्यम से ट्वीट करती हैं।