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श्रीलंका को भारत ने 100 टन नैनो नाइट्रोजन उर्वरक पहुँचाई, चीनी उर्वरक में मिले कीटाणु

श्रीलंका के अनुरोध के उपरांत भारत ने लगभग 100 टन नैनो नाइट्रोजन उर्वरकों को द्वीप राष्ट्र में पहुँचाया है।

कोलंबो में भारतीय दूतावास के बयान के अनुसार, “दो आईएएफ सी-17 ग्लोबमास्टर विमान 100 टन नैनो नाइट्रोजन के साथ बंदरानाइक अंतर-राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचे। यह कदम जैविक खेती की दिशा में श्रीलंकाई सरकार की पहल का समर्थन करने और वहाँ के किसानों को नैनो नाइट्रोजन उर्वरक की उपलब्धता में तेज़ी लाने के लिए था।”

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबो द्वारा चीन से प्राप्त जैविक उर्वरक को दूषित पाए जाने के बाद यह दूसरी बार है, जब भारत हाल के दिनों में उर्वरक की आपूर्ति के लिए श्रीलंका के बचाव में आया है। भारत ने उर्वरक की गत खेप अक्टूबर में श्रीलंका भेजी थी।

श्रीलंका ने पहले हानिकारक कीटाणु का पता लगाने के पश्चात चीन के किंगदाओ सीविन बायोटेक ग्रुप कंपनी लिमिटेड से 6.3 करोड़ डॉलर के मूल्य वाली 99,000 मीट्रिक टन जैविक उर्वरक आयात करने की योजना को रद्द कर दिया था।

श्रीलंका के कृषि मंत्री महिंदानंद अलुथगामगे ने संसद में कहा था कि भारत से भेजे गए जैविक उर्वरक के नमूनों पर किए गए प्रयोगशाला परीक्षणों ने पुष्टि की कि वे श्रीलंका में उपयोग के लिए उपयुक्त थे।

भारतीय उच्चायोग के बयान में कहा गया, “भारत सरकार ने अपनी पड़ोसी पहले नीति के तहत महत्वपूर्ण आवश्यकता के समय में श्रीलंका का समर्थन करना जारी रखा है और इस क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में अपनी क्षमता और भूमिका का बार-बार प्रदर्शन किया है।”

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलंबो स्थित लंकाई कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, बीजिंग की छवि कृषक समुदाय के मध्य धूमिल हुई है।

राजनयिक सूत्रों के हवाले से कहा गया कि कोलंबो ने चीनी उर्वरक की एक खेप को यह कहते हुए खारिज किया कि यह दूषित है और यह गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करती है।