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मंगोलिया से भगवान् बुद्ध के चार पवित्र अवशेष 12 दिनों बाद भारत वापस लौटे

भगवान् बुद्ध के चार पवित्र अवशेष 12 दिनों के लिए मंगोलिया के बत्सागान मंदिर में प्रदर्शित होने के बाद भारत वापस आ गए। ये अवशेष मंगोलियाई बुद्ध पूर्णिमा के उत्सव के लिए मंगोलिया के गंदन मठ परिसर में स्थित बत्सागान मंदिर ले जाए गए थे।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने इन पवित्र अवशेषों को गाज़ियाबाद में प्राप्त किया। मंगोलियाई लोगों की मांग पर पवित्र अवशेषों के प्रदर्शन की अवधि कुछ दिनों के लिए बढ़ा दी गई थी।

मंगोलियाई राष्ट्रपति, वहाँ की संसद के अध्यक्ष, मंगोलिया के विदेश मंत्री, संस्कृति मंत्री, पर्यटन मंत्री, ऊर्जा मंत्री, 20 से अधिक सांसद, मंगोलिया के 100 से अधिक मठों के उच्च मठाधीश उन हजारों लोगों में सम्मिलित थे, जिन्होंने गंडन मठ में हुई 12 दिवसीय प्रदर्शनी में पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि दी थी।

उत्सव के अंतिम दिन मंगोलिया के आंतरिक संस्कृति मंत्री भी अनुष्ठानों के लिए उपस्थित रहे। प्रदर्शनी के पहले दिन (14 जून) 18 से 20 हजार श्रद्धालुओं ने बुद्ध अवशेषों को श्रद्धांजलि दी। कार्य दिवसों पर औसतन पाँच से छह हजार श्रद्धालु गंदन मठ जाते थे, जबकि अवकाश के दिनों में लगभग नौ से 10 हजार श्रद्धालु पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए जाते थे।

समारोह के अंतिम दिन लगभग 18 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गंडन का दौरा किया था।

बता दें कि इन पवित्र बुद्ध अवशेषों को कपिलवस्तु अवशेषों के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि वे बिहार में पहली बार 1898 में खोजे गए थे। इसे कपिलवस्तु का प्राचीन शहर माना जाता है।

मंगोलिया ने इन पवित्र अवशेषों को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया और उन्हे उसी जलवायु में रखा गया था जैसा कि वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है। इन अवशेषों को एक विशेष हवाई जहाज सी-17 ग्लोब मास्टर से वापस भारत लाया गया।