इन्फ्रास्ट्रक्चर
असम में कई इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तैयारी, ब्रह्मपुत्र के नीचे सड़क सुरंग का प्रस्ताव

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंंह से निवेदन किया है कि वे ब्रह्मपुत्र के नीचे एक सुरंग निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना को अनुमति दे दें जो केंद्रीय असम में स्थित मीसा सैन्य बेस से नदी के उत्तरी तट पर स्थित तेज़पुर को जोड़ेगी।

तेज़पुर में सेना का 4 कॉर्प्स का मुख्यालय है जो अरुणाचल प्रदेश पर दृष्टि रखता है। भारत-चीन सीमा पर स्थित तवांग का द्वार भी तेज़पुर ही है। बुधवार (11 अगस्त) को सरमा ने राज्य विधान सभा को बताया कि हाल में जब राजनाथ सिंह अरुणाचल प्रदेश गए थे तब उन्होंने उनसे इस भूमिगत सुरंग के निर्माण प्रस्ताव को अनुमति देने का निवेदन किया था।

गुवाहाटी से फोन पर बात करते हुए सरमा ने स्वराज्य को बताया कि जहाँ भारत से लगी सीमा पर चीन ने अरुणाचल प्रदेश के निकट काफी सड़कें बना दी हैं, वहीं भारत की बस एक सड़क है जो तवांग तक जाती है।

असम के नगाँव जिले में स्थित “एक बड़े सैन्य बेस मीसा से उत्तरी तट पर स्थित तेज़पुर तक वाहनों का आवागमन सिर्फ ब्रह्मपुत्र पर बने कलियाभोमोरा पुल पर निर्भर है। यदि किसी संघर्ष की स्थिति में उसपर हमला होता है या वह क्षतिग्रस्त होता है तो उस सड़क से पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश तक पहुँच पाना बहुत कठिन होगा।”, सरमा ने कहा।

उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए भूमिगत सुरंग का प्रस्ताव दिया गया है। 12-15 किलोमीटर लंबी इस सुरंग की अनुमानित लागत 5,000 करोड़ रुपये की है और यह देश में किसी नदी के नीचे बनी सुरंग के माध्यम से पहला सड़क मार्ग होगा।

इससे पहले हुगली नदी के बीच कोलकाता को हावड़ा से जोड़ने वाली एक सुरंग बन चुकी है और अपेक्षा है कि इस वर्ष से क्रियाशील हो जाएगी। हालाँकि यह मेट्रो रेल के लिए है। सरमा ने बताया कि सुरंग का प्रस्ताव सेना ने बनाया है और उन्हें कुछ समय पहले इसकी जानकारी हुई थी।

कोलकाता मेट्रो की सुरंग

“यह एक महत्त्वपूर्ण परियोजना है जिसपर शीघ्र काम होना चाहिए। इसलिए ही मैंने रक्षा मंत्रालय से निवेदन किया है कि सुरंग बनाने के लिए अनुमति जल्दी दी जाए। प्रस्तावित सुरंग के विषय में मेरी (चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ) जनरल बिपिन रावत से बात हुई थी और वे भी चाहते थे कि रक्षा मंत्री से मैं निवेदन करूँ।”, सरमा ने बताया।

सरमा के अनुसार रावत भी इच्छुक हैं कि सुरंग परियोजना को प्राथमिकता दी जाए। असम के मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ब्रह्मपुत्र के नीचे बनी सुरंग सुनिश्चित करेगी कि पश्चिमी अरुणाचल प्रदेश से सड़क मार्ग सुरक्षित रहे और चीन के साथ संघर्ष होने पर भी इसमें बाधा न खड़ी हो।

सीमा सड़क संगठन दो लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-13 का चौड़ीकरण कर रहा है जो तेज़पुर और तवांग को जोड़ता है। 331 किलोमीटर की दूरी पूरी करने में इस मार्ग में 13 घंटों का समय लगता है। कई भागों में चौड़ीकरण का काम हो चुका है और एक बार पूरा हो जाए तो यात्रा समय घटकर मात्र 5 घंटे रह जाएगा।

1962 के युद्ध में चीनी सेना तवांग को पार करके तेज़पुर से 20 किलोमीटर की दूरी तक पहुँच गई थी जो युद्ध समाप्ति के बाद पीछे हटी थी। भारतीय रेलवे भी भलुकपोंग (असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर स्थित, तेज़पुर से लगभग 58 किलोमीटर दूर) से तवांग के बीच एक ब्रॉड गेज लाइन बना रही है।

भलुकपोंग से तवांग के बीच बनने वाले 378 किलोमीटर रेल मार्ग का लगभग 80 प्रतिशत भाग सुंरगों से गुज़रेगा ताकि पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचे। रेल मार्ग सेला दर्रे से भी गुज़रेगा जो समुद्र तल से 13,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित है।

भलुकपोंग छोर से रेल मार्ग के लिए सर्वेक्षण भी पूरा हो चुका है और तवांग एवं मार्ग में पड़ने वाले अन्य स्थानों के लिए रेलवे स्टेशन स्थल तय किए जा रहे हैं। इस प्रस्तावित रेल मार्ग पर काम शुरू भी हो जाता लेकिन कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण देरी हो गई है।

भारतीय रेलवे एक और परियोजना तय करने के अंतिम चरण पर है जो नगाँव व तेज़पुर को जोड़ेगी और इस मार्ग की रेल पटरियाँ ब्रह्मपुत्र के नीचे बनने वाली प्रस्तावित सुरंग से गुज़र सकती हैं। सरमा ने बताया है कि एक बार तकनीकी व्यवहार्यता रिपोर्ट व परियोजना प्रारूप तैयार हो जाए तो राज्य सरकार दो और सड़क सुरंगों पर विचार करेगी।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के लिए सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। “हम 35 किलोमीटर लंबी एक एलीवेटेड सड़क का निर्माण शुरू करेंगे जो काज़ीरंगा नेशनल पार्क के ऊपर से गुज़रे। संप्रति राजमार्ग पार्क के बीच से होकर गुज़रता है जो वन्यजीवों को परेशान करता है।”, असम मुख्यमंत्री ने कहा।

पलसबाड़ी और सुअलकुची के बीच ब्रह्मपुत्र पर बनने वाले एक और पुल के लिए मार्ग साफ किया जा चुका है। इसकी अनुमानित लागत 4,000 करोड़ रुपये है। लामडिंग और हाफलोन्ग के बीच 1,800 करोड़ रुपये की लागत से एक एलीवेटेड सड़क बनाई जाएगी।

“हमारी योजना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत इस वित्तीय वर्ष में 1,800 किलोमीटर की ग्रामीण सड़कों पर काम शुरू किया जाए। इसके अलावा ऐतिहासिक धोदर अली सड़क को चार लेन का बनाने का काम भी इसी वर्ष आरंभ होगा।”, सरमा ने बताया।

212 किलोमीटर लंबी यह सड़क 1687 के आसपास अहोम राजाओं ने बनवाई थी जो उत्तरी असम के चार जिलों से होकर गुज़रती है परंतु अब इसकी हालत जर्जर हो चुकी है। इसके जीर्णोद्धार तथा चौड़ीकरण के बाद केंद्रीय व उत्तरी असम के बीच सड़क संयोजकता बेहतर होगी।

सरमा ने बताया कि अगले पाँच वर्षों में असम में काफी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास देखने को मिलेगा और राज्य में हर जगह कई सड़कें, पुल व फ्लाईओवर बनाए जाएँगे। “सभी विधायकों को 100-300 करोड़ रुपये अपने विधानसभा क्षेत्र में सड़क व पुल बनाने के लिए दिए जाएँगे।”, मुख्यमंत्री ने कहा।

जयदीप मज़ूमदार स्वराज्य में नियमित रूप से योगदान करने वाले संपादक हैं। वे @joyincal09के माध्यम से ट्वीट करते हैं।