रक्षा
एचएएल द्वारा पहले स्वदेशी रूप से निर्मित नागरिक विमान की प्रगति कहाँ तक पहुँची

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने 16 अगस्त को घरेलू रूप से विकसित नागरिक विमान पर एक महत्त्वपूर्ण विकास की घोषणा की थी। एयरोस्पेस कंपनी ने बताया कि उसने भारत में बने हिंदुस्तान-228 (वीटी-केएनआर) विमान के ग्राउंड-रन व कम गति पर टैक्सी ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा किया।

भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस पर इस परीक्षण को एचएएल की कानपुर सुविधा पर किया गया था। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से टाइप सर्टिफिकेट पाने में यह परीक्षण सहायता करेगा जिससे अतिरिक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय प्रमाण-पत्र पाने का मार्ग भी खुलेगा।

एचएएल द्वारा जारी बयान के अनुसार, हिंदुस्तान-228 नवीनतम एफएआर 23 प्रमाण-पत्र प्राप्ति की आवश्यकताओं पर खरा उतरता है जो छोटे विमानों की हवाई यात्रा योग्यता पर बात करता है।

इस परीक्षण का पूरा होना भारत में बने पहले स्थाई पंख वाले नागरिक विमान के लिए एक मील का पत्थर है, एचएएल के एस्सेसरीज़ कॉम्प्लेक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सजल प्रकाश ने कहा और बताया कि क्षेत्रीय संयोजकता को मज़बूत करने की दिशा में यह एक कदम है।

भारत में निर्मित हिंदुस्तान-228

जर्मनी के डॉर्नियर जीएमबीएच के लाइसेंस के तहत एचएएल द्वारा बनाया जाने वाला बहु-उपयोगिता हल्के परिवहन विमान डो-228 का एक नागरिक संस्करण है हिंदुस्तान-228। 1970 के दशक के अंत में जर्मन कंपनी ने डॉर्नियर डो-228 को डिज़ाइन और विकसित किया था।

1983 में डॉर्नियर और एचएएल के मध्य विमान उत्पादन के लिए एक लाइसेंस समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार लाइसेंस के अधीन 150 विमानों के विनिर्माण किया जा सकता था। एचएएल के पास घरेलू रूप से डो-228 बनाने का लाइसेंस है।

पिछले कई वर्षों में रक्षा एवं एयरोस्पेस कंपनी ने कई उन्नतीकरण के साथ ऐसे 150 विमान बनाए हैं जिन्हें भारतीय वायुसेना, नौसेना, तटरक्षक और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रडार विकास अधिष्ठान को दिया गया है। साथ ही भारतीय महासागर में स्थित राष्ट्रों- सेयशेल्स और मॉरिशस को इसका निर्यात भी किया गया है।

इन विमानों का उपयोग समुद्री निगरानी, गश्ती और खोज एवं बचाव अभियानों के लिए किया जाता है। दोहरे इंजन वाले टर्बोड्रॉप डो-229 के समुद्री निगरानी एवं गश्ती संस्करणों को बनाने के लिए एचएएल ने कुछ परिवर्तन किए और भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को जोड़ा।

निगरानी रडार, फ्लिर (आगे देखने वाली इंफ्रारेड), ईएसएम (इलेक्ट्रॉनिक सहायता उपकरण), उपग्रह संचार, डाटा लिंक, वाणी कूटता उपकरण, टीसीएएस (ट्रैफिक टकराव से बचाव प्रणाली) और ईजीपीडब्ल्यूएस (उन्नत भूमि निकटता चेतावनी प्रणाली) जैसी चीज़ें जोड़ी गई हैं।

2016 के अंत में एचएएल ने नागरिक संस्करण बनाने की योजनाओं की घोषणा की थी। इसके एक वर्ष बाद तत्कालीन नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने एचएएल की कानपुर सुविधा पर संरचना जोड़ने की इकाई का उद्घाटन किया था।

कानपुर में परिवहन विमान संभाग ने केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संयोजकता योजना- उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) की सहायता करने के लिए डो-228 के विनिर्माण का दायित्व लिया। जून 2016 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति का एक महत्त्वपूर्ण भाग है उड़ान।

इसका उद्देश्य है कि देश के छोटे शहरों व दूरस्थ क्षेत्रों को सस्ती दर पर हवाई मार्ग से जोड़ा जाए। एचएएल के कानपुर संभाग में उत्पादन का दायित्व इसलिए लिया क्योंकि उसे घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों के लिए हल्के परिवहन एवं प्रशिक्षक विमानों के विनिर्माण, रख-रखाव, परिवर्तन व उन्नतीकरण में दक्षता प्राप्त है।

इसके अलावा आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से कम लागत में स्वदेशी उपकरणों और प्रणालियों को विकसित करने का काम भी यह करता आया है। डो-228 के नागरिक संस्करण के लिए एचएएल को डीजीसीए से हवाई यात्रा हेतु योग्यता प्रमाण-पत्र 21 दिसंबर 2017 में मिला था जिससे एयरलाइन्स द्वारा इसके उपयोग का मार्ग खुल गया था।

150वाँ डो-228 सौंपने के लिए 11 नवंबर 2020 को कानपुर में कार्यक्रम

उस समय अनुमान लगाया गया था कि 200 विमानों की माँग होगी। एचएएल के पास दो डो-228 नागरिक विमान एयरलाइन परिचालकों द्वारा तैनाती के लिए तैयार थे। पिछले वर्ष के आरंभ में डेफएक्सपो-2020 के दौरान इसे डीजीसीए से नागरिक विमान में परिवर्तन का आदेश मिला था।

विमान वज़न को 6,200 किलोग्राम (उड़ान भरने के दौरान अधिकतम वज़न) से कम करके 5,700 किलोग्राम करना था ताकि व्यवसायिक पाइलट लाइसेंस श्रेणी में उड़ने योग्य परिवहन विमान की आवश्यकता पर यह खरा उतर सके।

इसके अलावा, विमान को उन्नत करके डिजिटल कॉकपिट से लैस किया गया है जिसमें सटीक आँकड़े और फीडबैक लूप के साथ उपयुक्त डाटा दिखता है तथा स्व-परीक्षण से यह आपातकाल की स्थिति में पाइलट को सावधान भी कर सकता है। इसमें अत्याधुनिक हवाई इलेक्ट्रॉनिक्स है।

डॉर्नियर-228 का काँच कॉकपिट भविष्य के लिए एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है और अपेक्षा है कि आने वाले वर्षों में यह हमें अधिक राजस्व दिलाएगा।, पिछले वर्ष मार्च में एचएएल ने ट्वीट किया था। इसके अलावा टर्बोड्रॉप माइनस 5 की बजाय माइन 10 इंजन लगाया गयाहै और पाँच-ब्लेड वाले प्रोपेलर से वह एकीकृत है।

एचएएल का कहना है कि छोटा टेक-ऑफ और लैन्डिंग क्षमता, उच्च ईंधन एवं भार क्षमता, कम रख-रखाव लागत, ईंधन कुशलता और अपनी श्रेणी में उच्च गति डो-228 को विशेष बनाते हैं। 19 सीटों तथा कॉकपिट में दो परिचलाकों की क्षमता का है यह विमान।

परिवर्तन करके यात्री एवं वीआईपी परिवहन, कारगो परिवहन, हवाई एम्बुलेन्स, हवाई निगरानी और छायांकन, क्लाउड सीडिंग व पैरा जंपिंग जैसे अनेक रूपों में इसका उपयोग हो सकता है। इस वर्ष की फरवरी में एचएएल ने एयर इंडिया के उपक्रम अलायंस एयर के साथ डो-228 के लिए समझौता किया था।

वह अरुणाचल प्रदेश के उन्नत लैंडिंग भूमि पर इसे तैनात करेगी और इस प्रकार एचएएल के स्वदेशी विमान का उपयोग करने वाली पहली एयरलाइन बन गई है अलायंस एयर। भारत विश्व में नागरिक उड्डयन का सातवाँ सबसे बड़ा बाज़ार है और इस प्रकार घरेलू रूप से विकसित नागरिक विमान का लाभ उठाया जा सकता है।