समाचार
केंद्र का 35 लाख हथकरघा कामगारों, 28 लाख बुनकरों को ई-बाज़ार से जोड़ने का लक्ष्य

सरकारी ई-बाज़ार (जेम) ने बुनकरों और कारीगरों को अपने पोर्टल पर लाने के लिए एक नई पहल का आरंभ किया है। उन्हें अधिक से अधिक बाज़ार तक पहुँच प्रदान करने के साथ अपने उत्पादों को सीधे सरकारी विभागों को बेचने का अवसर भी प्रदान किया है।

गत माह के अंत तक लगभग 28,374 कारीगरों और 1,49,422 बुनकरों ने पोर्टल पर अपना पंजीयन कराया था। ई-बाज़ार ने विकास आयुक्त हथकरघा और विकास आयुक्त हस्तशिल्प के कार्यालय से आवश्यक सहायता के साथ जुलाई 2020 में इस प्रक्रिया को पुनः आरंभ किया था।

इस विक्रेता पंजीकरण प्रक्रिया में 28 बुनकर सेवा केंद्रों और 56 हस्तशिल्प सेवा केंद्रों से संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित और नामाँकित किया गया था।

मिंट ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के बयान का हवाला देते हुए कहा, “सरकारी बाज़ारों तक पहुँचने में चुनौतियों का सामना करने वाले हथकरघा और हस्तशिल्प में काम कर रहे कम सेवा वाले विक्रेता समूह जैसे कारीगरों, बुनकरों, सूक्ष्म उद्यमियों, महिलाओं, आदिवासी उद्यमियों व स्वयं सहायता समूहों की इससे भागीदारी में वृद्धि होगी।”

इस पूरी प्रक्रिया का लक्ष्य लगभग 35 लाख हथकरघा कामगारों और 28 लाख बुनकरों की सीधे बाज़ार तक पहुँच प्रदान करना है। हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए क्रमशः 28 विशिष्ट उत्पाद श्रेणियाँ और 170 कस्टम उत्पाद श्रेणियाँ बनाई गई हैं।

भारतीय कारीगरों, बुनकरों, सहकारी समितियों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) व उत्पादकों द्वारा विकसित उत्पादों को प्रदर्शित करने एवं सीधे सरकारी खरीदारों को उनकी बिक्री की सुविधा देने के लिए विशिष्ट वेब-बैनर और बाज़ार पृष्ठ बनाए गए हैं।