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पेट्रोल, डीजल व जेट ईंधन निर्यात पर लगा कर, घरेलू कच्चे तेल पर भी अतिरिक्त कर

सरकार ने शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी कंपनियों द्वारा विदेश में भेजे जाने वाले पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन (एटीएफ) पर निर्यात कर लगाया। साथ ओएनजीसी और वेदांत लिमिटेड जैसी कंपनियों द्वारा स्थानीय रूप से उत्पादित कच्चे तेल पर भी अप्रत्याशित कर लगाया।

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल और एटीएफ के निर्यात पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल के निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर कर लगाया है।

इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन अतिरिक्त कर लगाया।

कच्चे तेल पर लगे कर देश के स्वामित्व वाली ओएनजीसी, ऑयल और वेदांता लिमिटेड के निजी क्षेत्र केयर्न ऑयल एंड गैस की रिकॉर्ड कमाई को देखकर आते हैं। अकेले घरेलू स्तर पर उत्पादित 2.9 करोड़ टन कच्चे तेल पर सरकार को वार्षिक 67,425 करोड़ रुपये मिलेंगे।

तेल निर्यात कर विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज और रोसनेफ्ट-समर्थित नायरा एनर्जी देता है, जो यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद यूरोप और अमेरिका जैसे घाटे वाले क्षेत्रों में ईंधन निर्यात कर अप्रत्याशित लाभ कमा रहे हैं।

कहा जाता है कि इन कंपनियों ने रूसी कच्चे तेल को पश्चिम द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद छूट पर उपलब्ध कराया था और इससे उत्पादित ईंधन को यूरोप और अमेरिका में निर्यात किया था।

निर्यात पर प्रतिबंध का उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर घरेलू आपूर्ति को कम करना भी है, जिनमें से मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे कुछ राज्यों में इसकी कमी नज़र आई थी। दरअसल, निजी कंपनियाँ स्थानीय स्तर पर तेल बेचने की बजाए ईंधन का निर्यात करना अधिक पसंद करती थीं।