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बीपीसीएल के निजीकरण की प्रक्रिया रद्द, अब 20-25% भागीदारी बचने पर विचार

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के लिए केवल एक बोली लगाने वाला बचने के कारण केंद्र सरकार ने कथित तौर पर तेल पीएसयू को बेचने की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया है।

यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि आरंभिक चरण में इसके लिए तीन बोलीदाता थे लेकिन उनमें से दो बाद में अधिग्रहण के लिए धन की व्यवस्था करने में असमर्थता जताते हुए बाहर हो गए थे।

दि इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, “सरकार ने आधिकारिक तौर पर बीपीसीएल के प्रस्ताव को वापस ले लिया है। शुरुआत में तीन बोलीदाता थे लेकिन प्रभावी रूप से केवल एक बोलीदाता वेदांता ही बचा था । उचित तत्परता के बावजूद अन्य दो फंडिंग को टाई अप नहीं कर सके।”

इसमें सरकार की लगभग 53 प्रतिशत भागीदारी है, जो भारत की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों में से एक है।

विनिवेश प्रक्रिया समाप्त होने के साथ सरकार अब बीपीसीएल की आंशिक बिक्री पर विचार कर रही है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि सरकार बीपीसीएल में 20-25 प्रतिशत भागीदारी के लिए बोलियाँ आमंत्रित करने पर विचार कर रही है।

हालाँकि, अधिकारियों ने कहा कि योजना के बारे में चर्चा शुरुआती चरण में थी और बीपीसीएल की आंशिक बिक्री भी इस वित्त वर्ष में पूरी होने की संभावना नहीं है क्योंकि इस प्रक्रिया में 12 माह से अधिक का समय लगेगा।