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केंद्र को भारत में अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए निजी संस्थाओं से 27 प्रस्ताव प्राप्त हुए

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार (22 जुलाई) को कहा कि केंद्र सरकार को अब तक भारत में विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए निजी संस्थाओं से 27 प्रस्ताव प्राप्त हुए।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रस्तावों के प्रकारों में लॉन्च वाहनों का निर्माण एवं लॉन्चिंग, उपग्रहों का निर्माण, स्वामित्व एवं संचालन, उपग्रह आधारित सेवाएँ प्रदान करना, भूमि खंडों की स्थापना, अनुसंधान साझेदारी और मिशन सेवाएँ प्रदान करना सम्मिलित है।

जितेंद्र सिंह ने कहा, “वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था आगामी दो दशकों में एक खरब डॉलर से अधिक बढ़ने की ओर अग्रसर है। अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के साथ भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के मूल तत्वों में योगदान देने के लिए तैयार है। इससे अंतरिक्ष आधारित सेवाएँ, लॉन्च सेवाएँ, लॉन्च वाहनों व उपग्रहों का निर्माण, भूखंड की स्थापना और लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर सम्मिलित हैं।”

उन्होंने कहा कि अकादमिक संस्थानों, स्टार्ट-अप और उद्योगों सहित निजी क्षेत्र की एंड-टू-एंड अंतरिक्ष गतिविधियों में भागीदारी से राष्ट्रीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार होने, रोजगार के अधिक अवसर बनने और बेहतर विनिर्माण सुविधाएँ पैदा होने की उम्मीद है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी के संबंध में एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यमंत्री ने कहा कि न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल), एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) जो अपने आदेश के हिस्से के रूप में ‘भारतीय उद्योग के माध्यम से लॉन्च वाहनों का निर्माण’ के लिए भारतीय उद्योग भागीदारों के माध्यम से पाँच ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के एंड-टू-एंड प्राप्ति के प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) पहले ही जारी कर चुका है।