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केंद्र ने उड़ान क्षेत्रों की जाँच हेतु ड्रोन संचालन के लिए हवाई क्षेत्र मानचित्र लॉन्च किया

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ड्रोन संचालन के लिए एक नया हवाई क्षेत्र का मानचित्र लॉन्च किया। इसका उद्देश्य नागरिक ड्रोन संचालकों को सीमांकित नो-फ्लाई ज़ोन का आकलन करने और ड्रोन उड़ाने से पूर्व विशिष्ट औपचारिकताओं से गुज़रने की अनुमति देना है।

मैपमाईइंडिया और आईटी सेवा कंपनी हैपियस्ट माइंड ने हवाई क्षेत्र का मानचित्र विकसित किया है। इसके उपरांत इसे नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के डिजिटल स्काई मंच पर रखा गया है।

यह मानचित्र (यहाँ देखें) हवाई क्षेत्र को लाल, पीले और हरे क्षेत्रों में विभाजित करता है। इसके बाद के दो में अलग-अलग मानदंड हैं, जिन्हें हाल के घटनाक्रमों के दौरान संशोधित किया गया है।

दूसरी ओर, मानचित्र पर रेड ज़ोन एक ‘नो-ड्रोन ज़ोन’ है, जहाँ केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद ही ड्रोन का संचालन किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए हरे क्षेत्रों में 500 किलोग्राम तक के कुल वजन वाले ड्रोन उड़ाने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। पीले क्षेत्रों में ड्रोन संचालन के लिए संबंधित हवाई यातायात नियंत्रण अधिकारियों से अनुमोदन की आवश्यकता होती है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया कि देश के हवाई क्षेत्र के मानचित्र को संशोधित किया जा सकता है और इस तरह संबंधित संस्थाओं द्वारा समय पर अपडेट किया जा सकता है।