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प्रौद्योगिकी के विकास पर वैश्विक नेतृत्व हेतु 6जी के लिए 22 सदस्यीय नवाचार समूह गठित

केंद्र सरकार ने वैश्विक स्तर पर अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के विकास में अग्रणी भूमिका निभाने हेतु मोबाइल नेटवर्क की छठी पीढ़ी (6जी) के मानकों पर एक प्रौद्योगिकी नवाचार समूह का गठन किया।

दूरसंचार विभाग (डॉट) द्वारा गठित समूह का नेतृत्व दूरसंचार सचिव के राजारमन करेंगे।

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फोरम का उद्देश्य दृष्टि और उद्देश्यों के साथ अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी), पूर्व-मानकीकरण, अनुप्रयोगों और उत्पादों के विकास और 6जी प्रौद्योगिकी के लिए कार्य योजनाओं हेतु एक रोडमैप विकसित करना है।

1 नवंबर को डीओटी के ज्ञापन में कहा गया, “भारत को 6जी क्षेत्र में अग्रणी बनने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए सरकार, उद्योग एवं दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, शैक्षणिक व अनुसंधान संस्थानों के सहयोगात्मक प्रयास की आवश्यकता होगी, ताकि नवाचार, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) बनाने, मानकीकरण, वैश्विक मानकों में योगदान करने, नियम बनाने, पथप्रदर्शन करने और वैश्विक स्तर पर निर्माण, परीक्षण व आपूर्ति करने के लिए कार्य क्षेत्र की पहचान की जा सके और तालमेल बनाया जा सके।”

रिपोर्ट के अनुसार, 22 सदस्यीय समूह में अतिरिक्त सचिव अनीता प्रवीण, सदस्य (प्रौद्योगिकी) अशोक कुमार तिवारी, सदस्य (सेवा) दीपक चतुर्वेदी, टेलीमैटिक्स के विकास केंद्र (सी-डॉट) के कार्यकारी निदेशक राजकुमार उपाध्याय सम्मिलित हैं।

समूह के सदस्य के रूप में दिल्ली, चेन्नई, कानपुर, मुंबई, हैदराबाद में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के निदेशक भी हैं। इसके अतिरिक्त, समूह के सदस्यों में भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस) बेंगलुरु के निदेशक, उद्योग निकाय सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय पुरी सम्मिलित हैं, जो भारती एयरटेल के मुख्य परिचालन अधिकारी (भारत और दक्षिण एशिया) भी हैं।

यह गौर किया जाना चाहिए कि डॉट ने यह कदम इसलिए बढ़ाया क्योंकि भारत पहले से ही 5जी तकनीक की नीलामी और तैनाती में विकासशील देशों से पीछे है।