समाचार
केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर विद्रोही समूहों संग संघर्ष विराम समझौते को एक वर्ष के लिए बढ़ाया

सरकार ने बुधवार (20 अप्रैल) को घोषणा की कि विभिन्न पूर्वोत्तर विद्रोही समूहों के साथ संघर्ष विराम समझौते को एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया।

संघर्ष विराम विस्तार के समझौतों पर मंगलवार (19 अप्रैल) को हस्ताक्षर किए गए थे।

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “युद्धविराम समझौते भारत सरकार और नागालैंड का राष्ट्रीय समाजवादी परिषद्/एनके (एनएससीएन/एनके), नागालैंड का राष्ट्रीय समाजवादी परिषद्/रिफॉर्मेशन (एनएससीएन/आर) और नागालैंड का राष्ट्रीय समाजवादी परिषद्/के-खांगो (एनएससीएन/के-खांगो) के मध्य चल रहे हैं।”

मंत्रालय ने कहा, “एनएससीएन/एनके और एनएससीएन/आर के साथ 28 अप्रैल 2022 से 27 अप्रैल 2023 तक और एनएससीएन/के-खांगो के साथ 18 अप्रैल 2022 से 17 अप्रैल 2023 तक युद्धविराम समझौतों को एक वर्ष की और अवधि के लिए विस्तारित करने का निर्णय लिया गया।”

ये तीन विद्रोही समूह एनएससीएन-आईएम और एनएससीएन-के के अलग हुए गुट हैं।

एशियानेट की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और एनएससीएन-आईएम ने पहली बार 1997 में शांति की तरफ कदम बढ़ाए थे, जबकि 2001 में एनएससीएन-के के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। हालाँकि, 2015 में एनएससीएन-के द्वारा समझौता वापस ले लिया गया था।

हालाँकि, उसने 2020 में पुनः संघर्ष विराम की घोषणा की और स्थायी समाधान खोजने के लिए केंद्र सरकार के साथ वार्ता शुरू की।

गत वर्ष भी संघर्ष विराम को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया था, जो इस महीने समाप्त हो रहा था।