समाचार
केंद्र ने ऊर्जा कंपनियों से रूसी तेल परियोजनाओं में भागीदारी प्राप्त करने को कहा

केंद्र सरकार ने सरकारी ऊर्जा कंपनियों से रूसी कंपनी रोसनेफ्ट में ब्रिटिश तेल प्रमुख बीपी की भागीदारी खरीदने की संभावना का मूल्यांकन करने को कहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, बीपी ने घोषणा की कि वह मॉस्को में मुख्यालय वाली ऊर्जा कंपनी में अपनी 19.75 प्रतिशत भागीदारी को बेच रही है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने गत सप्ताह इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड, प्राइज पेट्रोलियम लिमिटेड, ऑयल इंडिया लिमिटेड और गेल (इंडिया) लिमिटेड को इस बारे में अपनी मंशा व्यक्त की थी।

मार्च में बीपी के सीईओ बर्नार्ड लूनी ने कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ बैठक की थी। इसी के बाद यह कदम उठाया गया।

इस बीच, मंत्रालय ने ओएनजीसी की विदेशी निवेश शाखा को रूस की सखालिन 1 परियोजना में एक्सॉन मोबाइल कॉर्प की 30 प्रतिशत भागीदारी प्राप्त करने के लिए भी कहा है।

वास्तव में ओवीएल के पास पहले से ही सखालिन 1 में 20 प्रतिशत का स्वामित्व है।

घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि यह देखते हुए भारतीय कंपनियाँ रूसी कंपनियों में रियायती दरों पर भागीदारी प्राप्त करना चाह रही हैं कि संभावित बिक्री को ‘संकट बिक्री’ कहा जा सकता है।

रिपोर्ट में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची के हवाले से कहा गया, “हमारा प्रयास यह देखने का है कि हम वर्तमान संदर्भ में रूस के साथ आर्थिक लेन-देन, आर्थिक जुड़ाव को कैसे स्थिर कर सकते हैं। निश्चित रूप से बाधाएँ हैं, कुछ देशों द्वारा प्रतिबंध लगे हैं और हमें इसके माध्यम से ही काम करना होगा।”